RSS BJP want to snatch voting rights of poor Tejashwi big statement on voter revision by election आरएसएस-बीजेपी वाले गरीबों का वोटिंग राइट छीनना चाहते, तेजस्वी का मतदाता पुनरीक्षण पर बड़ा बयान, Bihar Hindi News - Hindustan
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आरएसएस-बीजेपी वाले गरीबों का वोटिंग राइट छीनना चाहते, तेजस्वी का मतदाता पुनरीक्षण पर बड़ा बयान

तेजस्वी यादव ने कहा है कि मतदाता पुनरीक्षण में जिन कागजातों की मांग की जा रही है उन्हें जुटाने में गरीब तबके के लोग परेशान हो जाएंगे। यह एक साजिश है।

Fri, 27 June 2025 03:50 PMSudhir Kumar लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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आरएसएस-बीजेपी वाले गरीबों का वोटिंग राइट छीनना चाहते, तेजस्वी का मतदाता पुनरीक्षण पर बड़ा बयान

चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कराने का फैसला किया है। घर-घर जाकर मतदाताओं का मिलान किया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसका विरोध करते हुए एनडीए सरकार पर बड़ा हमला किया है। उन्होंने कहा कि पहले वोटिंग लिस्ट से नाम हटाएंगे फिर राशन कार्ड से वंचित कर देंगे। पुनरीक्षण में आधार कार्ड और मनरेगा जॉब कार्ड को मान्यता नहीं दिए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि लोकसभा चुनाव के ठीक बाद यह काम शुरू किया जा सकता था। दो महीने में यह काम नहीं हो सकता। बिहार इस साजिश के प्रति अलर्ट है। यह लोकतंत्र और संविधान के साथ मजाक है। किसी भी कीमत पर चुनाव आयोग की मनमानी नहीं चलने देंगे। इससे पहले मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल के साथ बैठक में भी राजद ने इसका विरोध किया था।

मतदाता पुनरीक्षण के मसले पर इंडिया गठबंधन के नेताओं ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाया। राजद के अलावे कांग्रेस और वामदलों के नेता शामिल हुए। तेजस्वी यादव ने वोटर लिस्ट में नाम रहे इसके लिए जिन दस्तावेजों को मांग की जा रही है वह अधिकांश गरीब गुरबे परिवार से आने वाले लोगों के पास नहीं है।

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तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में 25 जून से 26 जुलाई तक मतदाता पुनरीक्षण का काम चलेगा। इस पर तेजस्वी यादव ने कहा कि फरवरी महीने में ही वोटर लिस्ट पब्लिश हुआ था। चुनाव से दो महीने पहले यह काम क्यों किया जा रहा है। आठ करोड़ लोगों का इस अवधि में डोर टू डोर जाकर जांच करना संभव नहीं है। जिन कागजातों की मांग की जा रही है वे गरीब परिवारों के पास होंगे इसकी गारंटी नहीं है। दरअसल मोदी जी और नीतीश जी बिहार में हार से डरे हुए हैं। इसलिए वोट का अधिकार छीनने की साजिश कर रहे हैं। नीतीश कुमार अक्सर दिल्ली जाते रहते हैं। 22 साल पहले इस काम में दो साल लगे थे। इतने कम समय में गहन पुनरीक्षण का कार्य 25 दिनों में पूरा नहीं हो सकता। इस साजिश में नीतीश कुमार का भी बड़ा योगदान है।

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चुनाव आयोग को पता है कि मानसून का समय है। बिहार का 73 फीसदी इलाका बाढ़ प्रभावित है। लोग अपनी जान बचाएंगे या चुनाव आयोग को कागज देंगे। लोगों के पास इतना समय भी है कि नये कागजात बनाए जा सकें। नब्बे प्रतिशत बीएलओ के पास मतदाता सूची भी नहीं है लेकिन काम शुरू करा दिया गया है। बीजेपी और उनके सहयोगी दल गरीबों का मतदान का अधिकार छीनेंगे फिर उनका राशन, पेंशन और छात्र वृत्ति बंद कर देंगे।

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आधार कार्ड और मनरेगा कार्ड को मान्यता नहीं है। बिहार में सबके पास आधार कार्ड भी नहीं है। चुनाव आयोग एक ओर वोटर कार्ड और आधार कार्ड को लिंक करवा रहा है तो पुनरीक्षण में आधार कार्ड को नहीं मानते। यह आरएसएस और बीजेपी की साजिश है जिसमें नीतीश कुमार की जदयू भी संलिप्त है। लोकसभा चुनाव जब हो चुके तो बिहार में अभी चुनाव से पूर्व इसकी क्या जरूरत पड़ गई। बिहार में आठ करोड़ वैध मतदाता हैं जिसमें 4 करो 76 लाख को अपनी नागरिकता का प्रमाण देना पड़ेगा। जो 39-40 वर्ष की आयु के हैं उन्हें नागरिकता का प्रमाण पत्र देना पड़ेगा। जो 20-38 आयु वर्ग के हैं उन्हें माता या पिता का बर्थ सर्टिफिकेट देना पड़ेगा। इनका प्रतिशत 85(लगभग चार लाख) है। 18-20 वर्ष आयु वर्ग वालों को माता और पिता दोनों का बर्थ सर्टिफिकेट और जन्मस्थान का प्रमाण देना पड़ेगा। गांव देहात में लोगों के माता पिता का बर्थ सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा। यह सब तब मांगा जा रहा है जब बिहार में बाढ़ और मानसून सिर पर है। करोड़ों लोग जीविका के लिए पलायन कर चुके हैं। उनका क्या होगा। यह खेल मतदाताओं की छंटाई करके सत्ताधारी दल को फायदा उठाने का प्लान है।

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