बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट की दोबारा जांच क्यों, यह एक साजिश; बोली RJD
राष्ट्रीय जनता दल का कहना है कि मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए जिन दस्तावेजों की मांग की गई है, उससे लाखों परिवार ऐसे हैं, जिनके पास वैसे दस्तावेज उपलब्ध होना संभव नहीं है।

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग भी अब अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है। इस बीच राष्ट्रीय जनता दल ने मतदाता सूची के दोबारा जांच या मूल्यांकन पर आपत्ति जताई है। राष्ट्रीय जनता दल ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का विरोध किया है। RJD के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने गुरुवार को कहा कि इससे बीजेपी और जेडीयू को फायदा होगा।
मंगलनीलाल मंडल ने पटना में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस विशेष अभियान के जरिए भाजपा और जदयू को फायदा पहुंचाने के साथ ही गरीब और वंचितों को मतदान से वंचित रखने की साज़िश रची गई है। अभियान को लेकर काफी कम समय निर्धारित किया जाना इसकी पुष्टि करता है। आपको बता दें कि इससे पहले बुधवार को भी राजनीतिक दलों के साथ बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की हुई बैठक में राजद ने विधानसभा चुनाव के पहले मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का विरोध किया था।
बैठक में राजद का प्रतिनिधित्व प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन, मुख्यालय प्रभारी महासचिव मुकुंद सिंह और प्रदेश महासचिव मदन शर्मा ने किया था।राजद नेताओं ने कहा था कि विधानसभा चुनाव अब करीब है। ऐसी स्थिति में इतने कम समय में बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण कराना किसी भी हाल में व्यवहारिक नहीं होगा। इस दौरान मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए जिन दस्तावेजों की मांग की गई है, उससे लाखों परिवार ऐसे हैं, जिनके पास वैसे दस्तावेज उपलब्ध होना संभव नहीं है।
राजद ने कहा था कि बिहार के लाखों गरीबों को मतदान के अधिकार से वंचित करने की सोची-समझी साजिश है। जब 2003 के बाद अबतक विशेष गहन पुनरीक्षण नहीं हुआ तो इस साल इसे कराने का निर्णय क्यों लिया गया?




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