मन में उलझन, आत्मविश्वास की कमी, क्या करें... बिहार के युवाओं पर NCRPC की सर्वे रिपोर्ट चिंताजनक
किशोर और युवाओं के नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने पर हाल में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एनसीईआरटी के साथ मिलकर सर्वे किया था।

बिहार के 45 फीसदी किशोर और युवाओं में ही नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता नहीं है। चाहे परिवार का मामला हो या फिर खुद के कॅरियर का, निर्णय नहीं ले पाते हैं। इनमें पारिवारिक नेतृत्व संभालने की भी क्षमता नहीं है। किसी तरह के निर्णय लेने में अभिभावकों के ऊपर निर्भर रहते हैं। किशोर और युवाओं के नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने पर हाल में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एनसीईआरटी के साथ मिलकर सर्वे किया था। फरवरी से मार्च यानी 50 दिनों तक चले सर्वे में ये बातें सामने आई हैं।
आयोग ने सर्वे में राज्य के 14 से 25 वर्ष तक के दस लाख पांच हजार 436 किशोर और युवाओं को शामिल किया था। इसमें दसवीं और 12वीं के छात्रों के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं से भी राय ली गई। चार लाख नौ हजार 675 ने माना है कि नेतृत्व करने में उन्हें डर लगता है। चार लाख किशोर अब भी अभिभावक के निर्णय पर चलते हैं। सर्वे रिपोर्ट की मानें तो पिछले पांच सालों में दस फीसदी युवाओं और किशोरों में नेतृत्व क्षमता और कम हुई है, अब यह घट कर 55 फीसदी पर आ गई है। यही स्थिति निर्णय लेने की क्षमता में भी है। इसमें 15 फीसदी की और कमी युवा और किशोरों में दिख रही है। ये खुद का निर्णय नहीं ले पाते हैं।
नहीं लेते खुद निर्णय
लीडरशिप की कमी से राज्य के पांच लाख युवा कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाते हैं। कुछ भी निर्णय लेने के लिए उन्हें आत्मविश्वास नहीं रहता है। वो डरते हैं। कई बार तो परिवार के अन्य लोगों से अपने निर्णय का जिक्र करते हैं कि आगे उनके निर्णय लेने से कोई नुकसान नहीं हो। सर्वे रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्कूल और कॉलेजों में नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए। इसके लिए समय-समय पर नैतिक शिक्षा की कक्षाएं भी हो। कम से कम सप्ताह में एक दिन भी बच्चों को उनके आत्मविश्वास से जुड़े प्रसिद्ध लोगों की जानकारी दी जाये।
क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
पिछले कुछ सालों में खासकर दसवीं से 12वीं तक के किशोरों में नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता में कमी आई है। निर्णय लेने से किशोरों में आत्मविश्वास बढ़ता है। अपनी रूचि के अनुसार उन्हें निर्णय लेना चाहिए। अभिभावक बच्चों को प्रोत्साहित कर उनके निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ा सकते हैं। - प्रमोद कुमार, मनोवैज्ञानिक, एनसीईआरटी
कुछ सालों में किशोर और युवाओं में नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता में कमी आई है। यह स्थिति लगभग सभी राज्यों की है। बिहार में पिछले सालों के मुकाबले इसमें दस फीसदी और कमी आई है। पहले 66 फीसदी के लगभग किशोर और युवा खुद निर्णय ले पाते थे। अब यह प्रतिशत घट कर 55 फीसदी पर आ गया है। -कुमुद सिंह, काउंसिलर, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग
पड़ रहे ये प्रभाव
● नेतृत्व क्षमता नहीं होने से उनके जीवन कौशल हो रहा प्रभावित
● छोटे-छोटे निर्णय के लिए अभिभावकों पर रहते हैं निर्भर
● अपनी रूचि के अनुसार कॅरियर चुनने का नहीं ले पाते हैं निर्णय
● हमेशा मन में उथल-पुथल चलता रहता है
● क्या करें क्या ना करें, के उलझन में रहते हैं




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