Son river water dispute between Bihar Jharkhand resolved agreement in Amit Shah meeting बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी का विवाद सुलझा, अमित शाह की बैठक में समझौता, Bihar Hindi News - Hindustan
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बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी का विवाद सुलझा, अमित शाह की बैठक में समझौता

बिहार एवं झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर चला आ रहा सालों पुराना विवाद अब सुलझ गया है। रांची में अमित शाह की अध्यक्षता में पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के दौरान दोनों राज्यों ने समझौता कर लिया। 

Fri, 11 July 2025 07:01 AMJayesh Jetawat लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी का विवाद सुलझा, अमित शाह की बैठक में समझौता

बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी जल बंटवारे को लेकर सालों से चला आ रहा विवाद सुलझ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गुरुवार को रांची में हुई पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में दोनों राज्यों के बीच इस पर समझौता बना। बैठक में सहमति बनी कि झारखंड के अलग होने से पहले बिहार के हिस्से आए सोन नदी के 7.75 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी में से 5.75 एमएएफ बिहार को और 2.00 एमएएफ पानी झारखंड को दिया जाएगा।

शाह की अध्यक्षता में हुई पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मौजूद रहे। वहीं, बिहार की ओर से डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने प्रतिनिधित्व किया। झारखंड राज्य बनने के बाद से ही सोन नदी के पानी को लेकर दोनों राज्यों में विवाद चला आ रहा था। बिहार सरकार 1973 के समझौते के आधार पर 7.75 मिलियन एकड़ फीट पानी अपने पास रखने पर अड़ी हुई थी। वहीं, झारखंड इसका आधा हिस्सा मांग रहा था। पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में दोनों राज्यों का हिस्सा सुनिश्चित किया गया, जिस पर बिहार और झारखंड की सरकार ने सहमति जताई।

सोन नदी के पानी पर क्यों था विवाद?

दरअसल, सोन नदी के पानी के बंटवारे के लिए बाणसागर परियोजना बनी थी। इसके तहत मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार इन तीन राज्यों के बीच 1973 में समझौता हुआ था। उस समय झारखंड अलग राज्य नहीं था, वह बिहार का ही हिस्सा था। उस समय समझौते के अनुसार बिहार को सोन नदी का 7.75, एमपी को 5.25 और यूपी को 1.35 मिलियन एकड़ फीट पानी मिलना तय हुआ था।

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साल 2000 में झारखंड राज्य का गठन हुआ। झारखंड ने इस पानी में अपनी आधी हिस्सेदारी मांगी, जबकि बिहार पुराने समझौते के तहत सोन नदी का 7.75 एमएएफ पानी दिए जाने पर ही अड़ा रहा। केंद्र सरकार ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए पूर्व में कई बार बैठकें कीं। अब सालों बाद इस पानी का झगड़ा सुलझ पाया है।

दक्षिण बिहार की लाइफलाइन है सोन नदी

सोन नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के अमरकंटक की पहाड़ियों से होता है। यह एमपी से यूपी होकर झारखंड में प्रवेश करती है। झारखंड के गढ़वा से होते हुए यह बिहार में प्रवेश कर जाती है। इसे दक्षिण बिहार की लाइफलाइन माना जाता है। इससे राज्य के एक बड़े क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी मिलता है। पटना जिले में मनेर के पास आकर यह गंगा नदी में मिल जाती है।

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