बिहार के स्कूलों में जोन सेफ्टी प्रोग्राम फेल, ऑडिट में खुलासा; पांच राज्यों में हुई थी शुरुआत
14 साल तक के 38 और 14 से 18 साल के 64 फीसदी बच्चों मौतें सड़क हादसों से होती हैं। देशभर में स्कूली बच्चों की सबसे अधिक मौत सड़क दुघटनाओं से हो रही है।

बिहार में हाईवे और सड़क किनारे के स्कूल सुरक्षित नहीं बन सके हैं। सड़क हादसों में बच्चों की बढ़ती मौत को रोकने के लिए स्कूल जोन सेफ्टी प्रोग्राम बना था। बिहार समेत पांच राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरूआत की गई। इसमें दी गई गाइडलाइन का कितना पालन हुआ, इसको लेकर ऑडिट कराया गया। इसमें सामने आया कि सूबे के स्कूलों में अभियान के तहत सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं। सौ अंक निर्धारित किया गया था, लेकिन अधिकांश स्कूलों को 10-12 अंक ही मिले। कुछ स्कूलों को 40-45 अंक आये हैं।
इस अभियान के तहत स्कूलों के पास सुरक्षा चिह्न, घेरा आदि बनाया जाना था। इसके साथ ही बच्चों को जागरूक भी करना था। राज्य परियोजना निदेशक मयंक वरवड़े ने सभी जिलों के डीईओ और डीपीओ को कहा है कि ऑडिट के बाद सामने आया कि अभी बच्चों को सड़क सुरक्षा को लेकर बड़े स्तर पर जागरूक करने की जरूरत है। ऐसे में सूबे में नए सिरे से यह कार्यक्रम चलेगा। खास तौर पर सड़क किनारे वाले स्कूलों में बच्चे प्रशिक्षित होंगे। इसके साथ ही अन्य लाइन डिपार्टमेंट के साथ इस रिपोर्ट के अनुसार मिली कमियों को दूर करने पर काम किया जाएगा।
स्कूल जोन सुरक्षा पायलट ऑडिट की रिपोर्ट चिंताजनक
स्कूल जोन सुरक्षा पायलट ऑडिट ने बेहद गंभीर चिंताएं पैदा की हैं और खुलासा किया है कि सूबे समेत देशभर के स्कूल जोन लाखों स्कूली बच्चों के लिए बेहद असुरक्षित हैं। सुरक्षा स्कोर चिंताजनक रूप से कम है। छात्रों के जीवन की सुरक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई करने की जरूरत बताई गई है।
14 से 18 साल के 64% बच्चों की मौत सड़क हादसों से
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 14 साल तक के 38 और 14 से 18 साल के 64 फीसदी बच्चों मौतें सड़क हादसों से होती हैं। देशभर में स्कूली बच्चों की सबसे अधिक मौत सड़क दुघटनाओं से हो रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में 10,801 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 8,898 लोगों की मृत्यु हुई और 7,068 लोग घायल हुए। इन दुर्घटनाओं का एक बड़ा हिस्सा शहरी क्षेत्रों में, विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों के पास हुआ। इसलिए स्कूल क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।




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