कुंदन कृष्णन ने किसानों से माफी मांगी; विपक्ष और चिराग ने उठाया था हत्याओं वाले बयान पर सवाल
बिहार के एडीजी मुख्यालय कुन्दन कृष्णन ने किसानों की चर्चा करते हुए अपराध पर दिए अपने बयान के लिए माफी मांग ली है। हालांकि उन्होंने बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप मीडिया पर लगाया है।

बिहार के अपर पुलिस महानिदेशक(एडीजी) मुख्यालय कुन्दन कृष्णन ने अपने एक विवाद बयान को लेकर बैकफुट पर आ गए हैं। उन्होंने अपने उस बयान के लिए किसानों से माफी मांग ली है जिसमें कहा था कि मई, जून में हत्या ज्यादा होती है क्योंकि किसानों के पास काम नहीं होता। एडीजी के बयान पर बिहार के राजनैतिक जगत के साथ साथ सभी वर्गों में खलबली मच गई। केंद्रीय मंत्री और लोजपा-रामविलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने इस पर अपत्ति जताई थी। लेकिन, बयान पर मची हलचल के लिए उन्होंने मीडिया पर तोड़ मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगा दिया।
कई दिनों तक बवाल के बाद एडीजी कुन्दन कृष्णन अपने पिछले बयान को लेकर सामने आए। बिहार पुलिस के ऑफिसियल ट्विटर हैंडल पर उन्होंने अपना वीडियो बयान शेयर किया। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मेरे वक्तव्य के कुछ अंश को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया जिससे विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि किसानों को गलत बताने का उनका कोई मकसद नहीं था। वे किसानों का बहुत सम्मान करते हैं।
एडीजी ने कहा- हमारे देश के किसान भाई अन्नदाता का आपराधिक घटना से कुछ लेना देना नहीं है। वे हमेशा सम्मान के पात्र हैं और रहेंगे। अपराधियों की जात या वर्ग नहीं होता। मेरे पूर्वज भी किसान थे और किसानों से मेरा गहरा संबंध है और किसानों के प्रति काफी आदर भाव है। लेकिन मेरे वक्तव्य से किसी को ठेस पहुंचा है तो खेद है और इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं।
एडीजी ने अपना बयान देखकर पढ़ा जिसे पहले लिखा गया था। इसका वीडियो बिहार पुलिस के एक्स हैंडल पर अपलोड किया गया है। माना जा रहा है कि माफी मांगने के बाद विवाद थमेगा।
एडीजी के बयान चिराग पासवान ने कहा था कि एडीजी का यह बयान बहुत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। किसानों को अपरोक्ष रूप से हत्यारा बताना अन्नदाताओं के मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ है बल्कि उनके श्रम का भी अनादर है। अपराधियों पर शिकंजा कसने के बजाए बिहार पुलिस का ध्यान बेवजह के बयानों पर से अधिक है।




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