मैं जामवंत, जनता हनुमान; तो प्रशांत किशोर की नजर में रावण कौन है, मोतिहारी में पीके ने भरी हुंकार
प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं नेता नहीं जामवंत की भूमिका में हूं। और जनता हनुमान है। उन्हें बताना है कि कैसे अपने हाथ का इस्तेमाल करके अपने बच्चों के पढ़ाई और रोजगार की व्यवस्था होगी।

बिहार की राजनीति में रामायण के पात्र जामवंत और हनुमानजी की एंट्री हो गई है। पूर्वी चंपारण के कोटवा में बिहार बदलाव सभा में पहुंचे जनसुराज के संयोजक प्रशांत किशोर ने खुद को जामवंत तो जनता को हनुमान बताया। स्वाभाविक सवाल है कि पीके किसे रावण बताना चाहते हैं। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी, लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के चेहरे पर नहीं बल्कि अपने बच्चों का चेहरा देखकर वोट डालने की अपील की।
रविवार को पूर्वी चंपारण के कोटवा में जन सुराज की बिहार बदलाव सभा का आयोजन किया गया था। बारिश के बीच बड़ी संख्या में जन सुराज के समर्थक प्रशांत किशोर को सुनने पहुंचे थे। इसे देख पीके उत्साहित हो गए। भाषण खत्म होने के बाद वे पंडाल के बाहर खुले में आ गए और भींगते हुए युवाओं से हाथ मिलाया। बारिश में जुटी भीड़ के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं नेता नहीं जामवंत की भूमिका में हूं। और जनता हनुमान है। उन्हें बताना है कि कैसे अपने हाथ का इस्तेमाल करके अपने बच्चों के पढ़ाई और रोजगार की व्यवस्था होगी।
पीके ने कहा कि युवा को 10-12 हजार की नौकरी के लिए बाहर जाना पड़ता है। लोग यही रास्ता सीखने बरसात में भी आ रहे हैं कि कैसे इतनी कमाई के लिए कहीं पलायन नहीं करना पड़े। अगर वे रास्ता सीख लें तो एक दिन भींगने में कोई हर्ज नहीं है। हजारों की संख्या में लोग भींग रहे हैं तो मैं भी भींग रहा।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल से गर्मी, सर्दी, बरसात में घूम रहा हूं। लोगों को यह बताने के लिए इस बार अपने बच्चों के लिए वोट करें। मोदी जी, लालू यादव या नीतीश कुमार कुछ भी कहें लेकिन उनके उम्मीदवार को नहीं अपने बच्चों का भविष्य संवारने वाले उम्मीदवार को वोट दीजिए। लोगों ने घोषणा कर दी है कि वोट बिहार का तो फैक्ट्री भी बिहार में लगना चाहिए, गुजरात में नहीं। हमें ट्रेन नहीं फैक्ट्री चाहिए ताकि घर में काम मिले। इस बार लोग सबका सफाया हो जाएगा और जनता की सरकार बनेगी।




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