जीतनराम मांझी का मगही प्रेम, 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की; नीतीश को दी यह सलाह
जीतनराम मांझी ने कहा कि बिहार सरकार मगही भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित कर केंद्र सरकार को भेजे।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी का मगही प्रेम उफान ले रहा है। हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा सुप्रीमो और मोदी सरकार में एमएसएमई मंत्री मांझी ने मगही भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की है। गया में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मगही भाषा में भाषण दिया। कहा कि बिहार सरकार मगही भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित कर केंद्र सरकार को भेजे। समारोह में उन्होंने मगही भाषा भाषियों से अधिक से अधिक अपनी भाषा में बात करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जब प्रस्ताव भेज दिया जाएगा उसके बाद प्रधानमंत्री से इस बाबत बात की जाएगी। मगध विश्वविद्यालय के डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में मगही अकादमी गया और विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित मगही महोत्सव सह डॉ. रामप्रसाद सिंह मगही अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह में केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने खुले मंच से यह बात कही। मांझी के बयान को चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
उन्होंने मगही भाषा में कहा कि “हम त जहंवा जाई, मगही में बोले-बतियाई। हमनी सब मगहिया लोगन के चाही कि अपने-अपने बीच अप्पन भाषा में बातचीत करी।” दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. ऋतुराज आनंद ने मगध को मौन क्रांति की भूमि बताया और मगही लोक साहित्य के संकलन और संरक्षण पर जोर दिया। डॉ. गिरीश कुमार चौधरी ने नई शिक्षा नीति के तहत क्षेत्रीय भाषाओं के संवर्धन की दिशा में हो रहे प्रयासों की चर्चा की।
इस मौके पर डॉ. उपेंद्र नाथ वर्मा ने कहा कि मगही अकादमी को सरकारी संरक्षण मिलना चाहिए। फुलगेन मगही, नाट्यकर्मी मिथिलेश सिंह व नवादा के साहित्यकार गोपाल प्रसाद 'निर्दोष' को डॉ. रामप्रसाद सिंह मगही अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मान से नवाजा गया। कुलपति प्रो. एसपी शाही ने कहा कि मगध यूनिवर्सिटी देश का पहला संस्थान होगा, जहां एआई की पढ़ाई शुरू की जा रही है।




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