MP में साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़, 20 आरोपी गिरफ्तार; 1 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त
शिवपुरी जिले से काम कर रहा ये गिरोह 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिये लोगों से ठगी करता था। पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने 'ऑपरेशन मैट्रिक्स' के तहत आरोपियों से मोबाइल फोन और चार पहिया वाहन समेत करीब 1.07 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है।

मध्यप्रदेश पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शिवपुरी जिले से काम कर रहा ये गिरोह 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिये लोगों से ठगी करता था। पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने 'ऑपरेशन मैट्रिक्स' के तहत आरोपियों से मोबाइल फोन और चार पहिया वाहन समेत करीब 1.07 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी 'डेटिंग और चैटिंग' एप के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे।पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़ ने बताया कि नौ विशेष टीमों ने करेरा, भोंटी और पिछोर क्षेत्रों में छापेमारी कर आरोपियों को पकड़ा। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह चार प्रकरण दर्ज किए गए थे, जिनमें 32 आरोपियों को नामजद किया गया है, और इनमें से अब तक 20 को गिरफ्तार किया जा चुका है। राठौड़ ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में अंगद लोधी, विशाल लोधी, सुखदेव, अर्जुन और दीपक प्रजापति शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि अधिकतर आरोपी शिवपुरी और झांसी क्षेत्र के निवासी हैं। उन्होंने कहा कि शेष 12 फरार आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस ने बताया कि आरोपी महिलाओं के नाम से फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर लोगों से अश्लील बातचीत और वीडियो कॉल करते थे। उसने बताया कि बाद में वे खुद को पुलिसकर्मी बताकर दुष्कर्म और बाल अश्लील सामग्री से जुड़े झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर पीड़ितों से पैसे ऐंठते थे। पुलिस ने बताया कि कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सात वाहन, 29 स्मार्टफोन, 1.20 लाख रुपये नकद, एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक बरामद की हैं।
साइबर क्राइम वह अपराध है जिसमें कंप्यूटर, इंटरनेट या किसी डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल कर अवैध काम किए जाते हैं। इसमें हैकिंग, फिशिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, पहचान चोरी, बैंकिंग धोखाधड़ी और मैलवेयर अटैक जैसे कई तरीके शामिल हैं, जिनका उद्देश्य डेटा चुराना, पैसे निकालना या नुकसान पहुंचाना होता है।
ऐसे अपराध आम तौर पर ई-मेल, सोशल मीडिया, मैसेजिंग या फेक वेबसाइट के जरिये किए जाते हैं। साइबर अपराधी पीड़ित की जानकारी चुराकर उसकी निजी या वित्तीय जानकारी का दुरुपयोग करते हैं। रैनसमवेयर और क्रेडिट कार्ड फ्रॉड जैसी तकनीकों के कारण नुकसान की वैल्यू करोड़ों डॉलर तक पहुंच चुकी है और यह समस्या वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही है।
आज साइबर अपराध बेहद गंभीर समस्या बन चुका है क्योंकि इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का उपयोग हर आयु वर्ग कर रहा है। परिणामस्वरूप व्यक्तिगत, कारोबारी और सरकारी डाटा लगातार जोखिम में है और इसके खिलाफ जागरूकता, सुरक्षा और कानूनी कदम उठाना अत्यंत जरूरी हो गया है।




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