एमपी में हैवान पिता ने 13 वर्षीय बेटी का किया रेप, नाबालिग ने सुनाई आपबीती, बोली…
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक पिता द्वारा अपनी 13 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। नाबालिग की शिकायत पर पोहरी थाना पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक पिता द्वारा अपनी 13 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। नाबालिग की शिकायत पर पोहरी थाना पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार आरोपी पिता जयपुर में मजदूरी करता है। वह जब भी अपने गांव आया था, तब अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। इस बार यह घटना परिजनों के सामने हुई, जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ।
दादी ने रोका तो धक्का देकर उठा ले गया बेटी
जानकारी के मुताबिक नाबालिग अपनी दादी के साथ सो रही थी, तभी रात करीब 9 बजे आरोपी पिता वहां पहुंचा। उसने बेटी को जबरन कमरे में ले जाने की कोशिश की। नाबालिग की दादी ने इसका विरोध किया, लेकिन आरोपी ने उन्हें धक्का देकर गिरा दिया। जब तक दादी ने नाबालिग के भाइयों और ताऊ को बुलाया, तब तक आरोपी घटना को अंजाम दे चुका था।
बेटी बोली- 4 बार किया गलत काम
नाबालिग ने पुलिस को बताया कि उसके पिता ने अब तक चार बार उसके साथ गलत काम किया है। घटना के बाद परिजन रात में ही नाबालिग को लेकर पोहरी थाना पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
डरा-धमकाकर करता था घिनौना काम
पुलिस ने बताया है कि आरोपी पिता हर बार जब घर आता था तो अपनी बेटी को डरा धमका कर उसके साथ हैवानियत की घटना को अंजाम देता था… घटना के बाद उसे जान से मारने की धमकी देता था, लेकिन अबकी बार नाबालिक ने यह पूरी घटना अपने दादा और दादी को बताई। उसके बाद इस दरिंदे पिता की करतूत का खुलासा हुआ है।
पॉक्सो के तहत दर्ज हुआ केस, क्या है कानून
पुलिस ने पास्को एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर इस आरोपी पिता की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO Act) 2012 में लागू किया गया एक विशेष कानून है। यह 18 साल से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण, उत्पीड़न और अश्लील कृत्यों से सुरक्षा प्रदान करता है।
यह कानून कठोर सजा, त्वरित सुनवाई और बच्चों के अनुकूल न्यायिक प्रक्रिया का प्रावधान करता है। इसमें आरोपी के खिलाफ सख्त दंड और पीड़ित की पहचान गोपनीय रखने का प्रावधान भी शामिल है।
रिपोर्ट- अमित कुमार




साइन इन