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झंझारपुर विधानसभा सीट: नदियों की तरह बदलती सियासी धारा, अब पारिवारिक साख की परीक्षा

झंझारपुर विधानसभा सीट पर मंत्री नीतीश मिश्रा के सामने अपनी पारिवारिक साख बचाने की चुनौती है। मिथिला की विरासत के समेटे हुए इस सीट के लोग अब भी बाढ़ और सुखाड़ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

Tue, 2 Sep 2025 05:02 PMJayesh Jetawat हिन्दुस्तान, धर्मेंद्र नारायण झा, झंझारपुर (मधुबनी)
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झंझारपुर विधानसभा सीट: नदियों की तरह बदलती सियासी धारा, अब पारिवारिक साख की परीक्षा

कोसी-कमला बलान नदियों से घिरा बिहार के मधुबनी जिले का झंझारपुर विधानसभा क्षेत्र कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था। 1972 से लेकर 1990 के बीच डॉ जगन्नाथ मिश्र ने पांच बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। 1995 में इस सीट पर कांग्रेस का सूर्य अस्त होने के बाद तीन बार जदयू और दो बार राजद का कब्जा रहा। डॉ मिश्र के पुत्र नीतीश कुमार तीन बार विधायक रहने के बाद जदयू के रास्ते भाजपा में पहुंचे और 2020 के चुनाव में झंझारपुर में कमल खिला। नीतीश मिश्रा सूबे के उद्योग मंत्री हैं। उनके सामने अपने परिवार की विरासत को बचाये रखने की चुनौती है।

नीतीश मिश्रा ने 2005 के फरवरी एवं नवंबर और 2010 में जदयू के टिकट पर जीत दर्ज की। 2015 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, पर 834 मतों से हार गए। हालांकि, 2020 में नीतीश मिश्रा ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में 41,788 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। 2020 में यह सीट महागठबंधन में वाम दलों को मिली थी।

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मिथिला की संस्कृति और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध झंझारपुर आर्थिक मानचित्र पर पिछड़ा है। इस क्षेत्र की अधिकतर आबादी हर साल बाढ़ की मार झेलती है। उद्योग-धंधे न होने से रोजगार के लिए बड़ी संख्या में लोगों को रोजी-रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है। झंझारपुर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना एवं मिथिला हाट का निर्माण एनडीए के खाते में बड़ी उपलब्धि के तौर पर है। झंझारपुर को जिला बनाने की बरसों पुरानी मांग पर विपक्ष मुखर है।

संस्कृति और परंपरा समृद्ध :

झंझारपुर अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। ‘झंझारपुर’ नाम का संबंध मैथिली शब्द ‘झंझार’ से माना जाता है, जो लोक नृत्यों में पहने जाने वाले पायलों की झंकार को दर्शाता है। छठ और सामा-चकेवा का त्योहार विशेष रूप से मनाया जाता है। यह क्षेत्र मैथिली साहित्य और संगीत में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। माना जाता है कि 15 शताब्दी के उतरार्द्ध में मिथिला नरेश की ओर से लोगों ने आक्रमणकारी अली वर्दी के खिलाफ भीषण युद्ध किया था। युद्ध के बाद वहां से 15 सेर जनेऊ मिले थे। वहां आज भी कदर्पी घाट बना है और बड़ी श्रद्धा से लोग वहां जाते हैं। क्षेत्र में लोहना रोड के पास बाबा विदेश्वर स्थान का पौराणिक मंदिर है।

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वायदे जो पूरे नहीं हुए

⦁ झंझारपुर के लोगों को तीन दशक से जिला बनने का इंतजार

⦁ 2019 के बाढ़ विस्थापितों के पुनर्वास का मुद्दा अब भी कायम है

⦁ क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बाढ़ और सुखाड़ की है, इससे निजात मिलना बाकी है

⦁ कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर यहां के लोगों को आजीविका के लिए पलायन जारी है

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पिछले 5 सालों में दिखे ये बदलाव-

⦁ झंझारपुर में नए मेडिकल कॉलेज और आधुनिक अस्पताल का निर्माण, एक नर्सिंग कॉलेज भी खुला

⦁ एनएच-27 के किनारे लोहना मौजे में नए औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की प्रक्रिया शुरू, ग्रीन औद्योगिक क्षेत्र का निर्माण शुरू

⦁ एनएच-27 के समीप नरुआर पंचायत स्थित कुम्मर पोखर पर जैव विविधता पार्क के निर्माण की स्वीकृति

⦁ विदेश्वर स्थान, शांतिनाथ सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों का पर्यटकीय विकास और कमला नदी के किनारे कमला व्यू प्वाइंट का निर्माण

⦁ कमला नदी पर 181.85 करोड़ की लागत से दो अतिरिक्त पुलों की स्वीकृति

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इस बार चुनाव के मुद्दे

1. झंझारपुर को जिले का दर्जा

2. पूरे क्षेत्र में जलजमाव की समस्या

3. हजारों बाढ़ विस्थापितों का पुनर्वास

4. युवाओं के पलायन को रोकना एवं स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना

5. बड़ी रेल लाइन बिछाने का काम हुआ पर महानगरों के लिए सीधी ट्रेन नहीं मिली

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झंझारपुर से विधायक एवं मंत्री नीतीश मिश्रा का दावा है कि क्षेत्र को विकसित बनाने के लिए वह हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह जनता की समस्याओं को अपनी मानकर समाधान के लिए काम करते हैं और आगे भी करते रहेंगे।

सीपीआई के प्रत्याशी रहे राम नारायण यादव का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों में झंझारपुर क्षेत्र के किसानों और मजदूरों की उन्नति के लिए कोई काम नहीं किया गया है। लोगों के साथ छल किया गया है। उन्होंने कहा कि वह जनता के मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे।

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झंझारपुर विधानसभा सीट पर विजेताओं का नाम-

1952: कपिलेश्वर शास्त्री- कांग्रेस

1957: देवचंद्र झा - कांग्रेस

1962: - हरीश चंद्र झा- कांग्रेस

1967: हरी नाथ मिश्र - कांग्रेस

1969: रामफल चौधरी

1972: डॉ जगन्नाथ मिश्रा- कांग्रेस

1977: डॉ जगन्नाथ मिश्रा- कांग्रेस

1980: डा. जगन्नाथ मिश्रा- कांग्रेस

1985: डॉ जगन्नाथ मिश्रा- कांग्रेस

1990: डॉ जगन्नाथ मिश्रा- कांग्रेस

1995: रामावतार चौधरी- जनता दल

2000: जगदीश नारायण चौधरी- राष्ट्रीय जनता दल

2005(फरवरी): नीतीश मिश्रा- जनता दल (यू)

2005(नवंबर): नीतीश मिश्रा- जनता दल (यू)

2010: नीतीश मिश्रा- जनता दल (यू)

2015: गुलाब यादव- राष्ट्रीय जनता दल

2020: नीतीश मिश्रा - भारतीय जनता पार्टी

(रिपोर्ट- धर्मेंद्र नारायण झा)

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