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बिहार चुनाव: पिता का रिकॉर्ड तोड़ने मैदान में उतरेंगे नितिन नवीन, बांकीपुर विधानसभा सीट पर महागठबंधन की भी तैयारी

बिहार चुनाव: अबतक चार चुनाव जीत चुके नितिन नवीन इस बार अपने दिवंगत पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा का रिकॉर्ड तोड़ने को मैदान में उतरेंगे। अबतक इस क्षेत्र में भाजपा के लिए जीत की राह आसान रही है। ऐसे में महागठबंधन के सामने नितिन नवीन को रिकॉर्ड बनाने से रोकने की चुनौती होगी।

Mon, 1 Sep 2025 08:03 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान, प्रिय रंजन शर्मा, पटना
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बिहार चुनाव: पिता का रिकॉर्ड तोड़ने मैदान में उतरेंगे नितिन नवीन, बांकीपुर विधानसभा सीट पर महागठबंधन की भी तैयारी

बिहार चुनाव: पटना का बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र भले ही अपने स्वरूप में सिर्फ डेढ़ दशक पुराना है, पर इसकी महत्ता ऐतिहासिक है। वर्षों से जिस ऐतिहासिक गोलघर और गांधी मैदान से पटना की पहचान रही है, वह इसी विधानसभा क्षेत्र में अवस्थित है। गंगा के तट से सटे इस विधानसभा क्षेत्र का अधिकतर इलाका प्राचीन पाटलिपुत्र की गौरव का गवाह रहा है। समय के साथ इसके भूगोल में जरूर बदलाव हुआ। गंगा बांकीपुर से दूर चली गई है। गंगा किनारे बना गंगा पथ और अशोक राजपथ के डबल डेकर पुल ने राजधानी को रफ्तार दी है। यहां के विधायक नितिन नवीन राज्य के पथ निर्माण मंत्री हैं।

वर्ष 2008 में हुए परिसीमन के बाद बांकीपुर सीट अस्तित्व में आया। इसके पहले यह पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। पूर्व में यहां से कांग्रेस, भाकपा, जनता दल, जनक्रांति दल और निर्दलीय को भी जीत का मौका मिला। पर साल 1995 में इस सीट पर नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने भगवा झंडा गाड़ा तो फिर भाजपा को छोड़ किसी अन्य दल को अवसर नहीं मिला। वह लगातार चार बार (1995, 2000, 2005 के फरवरी और नवंबर) विधायक रहे। दिसंबर, 2005 में सिन्हा का निधन हो गया। रिक्त सीट पर अप्रैल 2006 में हुए उपचुनाव में उनके पुत्र नितिन नवीन कांग्रेस के अजय कुमार सिंह को पराजित कर पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद से उनकी लगातार जीत होती रही है। इस दौरान प्रतिद्वंद्वी राजद और कांग्रेस के प्रत्याशी बदलते रहे, पर सफलता नहीं मिली।

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अबतक चार चुनाव जीत चुके नितिन नवीन इस बार अपने दिवंगत पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा का रिकॉर्ड तोड़ने को मैदान में उतरेंगे। अबतक इस क्षेत्र में भाजपा के लिए जीत की राह आसान रही है। ऐसे में महागठबंधन के सामने नितिन नवीन को रिकॉर्ड बनाने से रोकने की चुनौती होगी। बांकीपुर क्षेत्र हाल के दिनों में महागठबंधन के कई राजनीतिक कार्यक्रमों और आंदोलनों का गवाह भी रहा है। उधर, जनसुराज का भी पटना के शहरी इलाकों पर जोर है। वह प्रबुद्ध मतदाताओं के बीच पैठ बनाने में जुटा है। यदि जनसुराज ने प्रत्याशी उतारे तो यहां लंबे समय बाद त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बन सकती है।

हर बार मुकाबला रहा है आसान

नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद 2006 के उप चुनाव में उनके पुत्र नितिन नवीन ने कांग्रेस के अजय कुमार सिंह को 65347 वोटों से मात दी थी। इसके बाद के चुनावों में भी नितिन की जीत की राह आसान रही। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में पटना नगर निगम के 25 वार्ड शामिल हैं। इनमें 19 वार्ड पूरी तरह इस विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जबकि छह वार्ड ऐसे हैं जिनका कुछ हिस्सा बांकीपुर के साथ कुम्हरार और दीघा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत है।

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पांच साल में दिखे ये बदलाव

● जेपी गंगा पथ का निर्माण और इसका दीदारगंज तक विस्तार

● लोहिया पथचक्र टू का निर्माण पूरा

● अशोक राजपथ पर बिहार का पहला डबल हेकर पुल बना

● मंदिरी और बांकरगंज नाले का निर्माण

● बांकीपुर की सड़कों के लिए 150 करोड़ से अधिक का आवंटन

● मीठापुर फ्लाईओवर काम पूरा

विधायक सह पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने कहा कि बांकीपुर विधानसभा के विकास के लिए हमेशा तत्पर रहा हूं। राज्य सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सहयोग से विकास के काफी काम हुए हैं। कई बड़ी परियोजनाएं पूरी हुई हैं। हर क्षेत्र के लोगों का ध्यान रखते हुए विकास कार्य किए जा रहे हैं। जनता ने फिर मौका दिया जो बांकीपुर के विकास में कोई कोर कसर नहीं रहने दूंगा।

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पटना जिला महानगर के कांग्रेस अध्यक्ष शशि रंजन ने कहा कि राजधानी का क्षेत्र होने के बावजूद बांकीपुर में विकास के कार्य नहीं हुए हैं। बारिश होते ही यहां के अधिकांश मोहल्लों में जलजमाव हो जाता है। नल-जल योजना भी कारगर नहीं है। लोगों को सरकारी काम के लिए भटकना पड़ता है। भ्रष्टाचार चरम पर है।

वायदे जो पूरे नहीं हुए

● अतिक्रमण से निजात नहीं मिली

● शहर में जाम की समस्या अब भी कायम

● बारिश में कई मोहल्लों में जलजमाव

● सार्वजिनक स्थानों पर सुविधाओं की कमी

● प्रमुख स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था नहीं

बांकीपुर बिहार की उन चुनिंदा सीटों में है, जहां मतदान का प्रतिशत काफी कम है। यहां 2020 के चुनाव में सिर्फ 35.92% मतदाताओं ने वोट डाले थे। इसके पहले 2010 में 36.96% और 2015 में 40.25% मतदान हुआ था। यह स्थिति तब है जब इस क्षेत्र के मतदाता सरकारी अधिकारी-कर्मचारी, बड़े कारोबारी और शिक्षित वर्ग हैं। इस बार भी चुनाव में यह राजनीतिक दलों और आयोग के समक्ष चुनौती होगी।

बांकीपुर से पूर्व के पटना पश्चिम विधानसभा सीट ने बिहार को दो मुख्यमंत्री भी दिए हैं। 1962 के विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस के कृष्ण बल्लभ सहाय को जीत मिली, जो बिहार के चौथे मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने 2 अक्टूबर 1963 को मुख्यमंत्री की शपथ ली और 1967 तक इस पद पर बने रहे। 1967 के विधानसभा चुनाव में जन क्रांति दल के महामाया प्रसाद सिन्हा ने केबी सहाय को पराजित कर दिया। महज 13 विधायकों वाली पार्टी के विधायक रहते हुए महामाया प्रसाद सिन्हा ने कर्पूरी ठाकुर जैसे दावेदारों को पीछे छोड़ते हुए बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

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