जाले विधानसभा सीट: विचारधारा के अखाड़े में समाजवाद और भगवा का गठजोड़
बिहार की जाले विधानसभा सीट पर बीते दो बार से मंत्री जीवेश कुमार मिश्रा विधायक हैं। किसी समय वामपंथियों एवं समाजवादियों का गढ़ रही इस सीट पर अब भगवा झंडा लहरा रहा है। जीवेश मिश्रा के सामने इस बार हैट्रिक की चुनौती है।

बिहार के दरभंगा जिले की जाले विधानसभा सीट में जाति एवं धर्म से कहीं ज्यादा विचारधारा को तरजीह मिलती रही है। कभी कांग्रेस का गढ़ रही इस सीट पर सीपीआई ने लाल झंडा फहराया तो यहां समाजवाद और सामाजिक न्याय की धारा भी बही। 21वीं सदी आते-आते जाले में भाजपा ने पैठ बढ़ाई और यहां भगवा झंडा लहराया। यहां से जिवेश कुमार उर्फ जीवेश मिश्रा को छोड़ कोई लगातार दो बार विधायक नहीं रहा। नगर विकास मंत्री मंत्री जिवेश कुमार के सामने इस बार हैट्रिक लगाने की चुनौती है।
मधुबनी लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले जाले विधानसभा क्षेत्र में 1952 से 15 सालों तक कांग्रेस का एकाधिकार रहा। 1969 में सीपीआई के खादिम हुसैन ने कांग्रेस के एकनारायण चौधरी को हराकर यहां लाल झंडा फहराया। कांग्रेस कमजोर पड़ती चली गई। 1969 में भारतीय जनसंघ के तेज नारायण राउत ने सीपीआई को शिकस्त जरूर दी, लेकिन 1972, 1980 1995 में फिर से भाकपा ने जीत हासिल की। बीच की अवधि में कांग्रेस ने लोकेश नाथ झा को 1985 और विजय कुमार मिश्र को 1990 के चुनाव में उतारकर भाकपा के अब्दुल सलाम को लगातार दो बार शिकस्त देकर लाल झंडे की चमक फीकी कर दी।
1985 में जीते लोकेश नाथ झा (कांग्रेस) शिक्षा मंत्री भी रहे। 1990 से 2015 तक क्षेत्र में विजय कुमार मिश्र का दबदबा रहा। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस से भाजपा होते हुए जदयू तक की यात्रा की। भाजपा ने 2015 में जिवेश कुमार पर दांव लगाकर विजय कुमार मिश्र और उनके पुत्र ऋषि मिश्र के दबदबे को खत्म कर दिया। 2015 में पहली बार जीवेश कुमार ने ऋषि कुमार को पराजित कर चौंका दिया। जिवेश कुमार दो-दो बार मंत्री बने। 2025 के चुनाव में जिवेश कुमार हैट्रिक लगाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उनके सामने आने वाले चेहरे की तस्वीर अभी साफ नहीं हो पाई है।
विजय मिश्र ने बेटे को MLA बनाकर सीट छोड़ी थी
1990, 2000 और 2010 का विधानसभा चुनाव जीतने वाले विजय कुमार मिश्र (पूर्व केंद्रीय ललित नारायण मिश्र के पुत्र) ने 2014 में अपने बेटे ऋषि मिश्रा को विधायक बनाने के लिए जाले सीट छोड़ दी थी। उन्होंने अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उपचुनाव में जेडीयू ने ऋषि को उतारा और वह जीत भी गए।
माता अहिल्या और गोनू झा से क्षेत्र की है पहचान
जाले का इतिहास महर्षि गौतम व उनकी पत्नी अहिल्या से जुड़ा है। भरवाड़ा कुशाग्र बुद्धि के प्रतीक गोनू झा की जन्मस्थली है। यहां रतनपुर स्थित गंगेश्वरस्थान में 850 वर्ष पुराना गंगेश्वरनाथ शिवालय है, जो राजा नान्यदेव के पुत्र गंगदेव के कार्यकाल का है। यहां महर्षि याज्ञवल्क्य के समय का जालेश्वरीस्थान है।
जाले विधानसभा एक नजर में-
इस सीट पर कुल 331989 मतदाता हैं। इनमें 176074 पुरुष और 155910 महिला मतदाता हैं। 5 थर्ड जेंडर वोटर भी हैं। जाले विधासनभा के उत्तर में बेनीपट्टी, दक्षिण में केवटी, पूर्व में बिस्फी एवं केवटी और पश्चिम में बाजपट्टी एवं औराई पड़ते हैं।
5 सालों में दिखे ये बदलाव-
⦁ जाले रेफरल अस्पताल परिसर में अत्याधुनिक सीएचसी मिला
⦁ कमतौल पानी टंकी से सनहपुर श्याम चौक तक आरसीडी सड़क मिली
⦁ चंदौना (पुरी)से जाले एवं सिंहवाड़ा होते हुए दरभंगा तक बस सेवा शुरू हुई
⦁ जोगियारा में 50 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले साइलो का निर्माण
वायदे जो पूरे नहीं हुए
⦁ जोगियारा के मरखाही एवं रविकारा चौर से जलनिकासी
⦁ जाले एवं सिंहवाड़ा में स्टेडियम का निर्माण
⦁ जाले के रतनपुर स्थित शहीद स्थल का विकास
⦁ सिंहवाड़ा में डिग्री कॉलेज की स्थापना
2025 में विधानसभा चुनाव का मुद्दा
⦁ घोघराहा से जाले होते हुए अतरबेल एसएच-97 के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण, जाले, भरवाड़ा, कटाशा और सिंहवाड़ा पुल के पास जाम से निजात
⦁ भरवाड़ा का विकास और पेयजल संकट दूर करना
जाले से विधायक और मंत्री जीवेश मिश्रा का दावा है कि उन्होंने विधानसभा क्षेत्र की जनता को सभी सुविधाएं दिलवाने का प्रयास किया। सड़कों का जाल बिछाया। अस्पताल भवन, प्रशासनिक भवन, विद्यालय भवन सहित कई संरचनाओं को स्थापित कराकर बेहतर सुविधाओं को बहाल करवाया। क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता को बेहतर करवाया। जनकल्याण की दिशा में लोगों की मदद दिलवाई। क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण एवं संवर्धन का भी प्रयास किया गया।
जाले से कांग्रेस प्रत्याशी रहे मस्कूर अहमद उस्मानी का कहना है कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे जाले विधानसभा क्षेत्र के सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाएंगे। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों एवं दवाओं की उपलब्धता, युवाओं के बेहतर करियर के लिए ‘करियर काउंसलिंग सेल’ का गठन और किसानों को समय पर खाद-बीज एवं पानी उपलब्ध कराने के साथ उनकी फसल को जंगली जानवरों से निजात दिलवाना एवं मजदूरों का पलायन रुकवाना प्राथमिकता होगी। एक उद्योग की स्थापना का भी वह प्रयास करेंगे।
जाले विधानसभा सीट पर कब कौन जीता
1952: अब्दुल समी नदवी- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1957: शेख ताहिर हुसैन- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1962: एक नारायण चौधरी- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1967: खादिम हुसैन- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
1969: तेज नारायण राउत - भारतीय जनसंघ
1972: खादिम हुसैन - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
1977 : कपिलदेव ठाकुर- जनता पार्टी
1980: अब्दुस्सलाम - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
1985: लोकेश नाथ झा - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1990 : विजय कुमार मिश्र - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1995: अब्दुस्सलाम - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
2000: विजय कुमार मिश्र - भारतीय जनता पार्टी
2005: (फरवरी) राम निवास प्रसाद- राष्ट्रीय जनता दल
2005: (अक्टूबर) राम निवास प्रसाद- राष्ट्रीय जनता दल
2010: विजय कुमार मिश्र - भारतीय जनता पार्टी
2014: ऋषि मिश्र - जनता दल (यूनाइटेड)
2015 : जिवेश कुमार - भारतीय जनता पार्टी
2020: जिवेश कुमार - भारतीय जनता पार्टी
(रिपोर्ट- संतोष कुमार झा)




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