अमरपुर विधानसभा सीट: तीन बार से जदयू का कब्जा, फिर भी गुड़ की मिठास नहीं बचा पाए जयंत राज
बिहार के बांका जिले की अमरपुर विधानसभा सीट से नीतीश सरकार में मंत्री जयंत राज विधायक हैं। अमरपुर एक समय गुड़ उद्योग के लिए मशहूर था। मगर समय के साथ यहां के गुड़ की मिठास फीकी पड़ती गई। सत्ताधारी जदयू लगातार 3 बार से यहां जीत रही है, लेकिन गुड़ उद्योग को बचाने की नीति नहीं बन पाई।

कभी गन्ना और गुड़ उद्योग के लिए मशहूर बिहार का अमरपुर विधानसभा क्षेत्र पिछले तीन दशक से समाजवादी दो धड़ों की सियासत का केंद्र बना हुआ है। इस बीच इस क्षेत्र की वह मूल पहचान गुम हो गई, जिसके लिए वह मशहूर हुआ करता था। यहां के गुड़ की मिठास। बांका जिले के अमरपुर में 1985 से 2020 के बीच हुए छह चुनावों में एक बार जनता दल, दो बार राजद और तीन बार जदयू ने जीत दर्ज की। 1995 से 2005 तक सुरेंद्र सिंह विधायक रहे। वह एक बार जनता दल और दो बार राजद के टिकट पर जीते। 2010 और 2015 में जदयू से जीते जनार्दन मांझी के बाद उनके पुत्र जयंत राज 2020 में विरासत को बचाये रखने में कामयाब रहे।
वर्तमान विधायक जयंत राज बिहार सरकार में भवन निर्माण मंत्री हैं। इसके पहले 1957 में अस्तित्व में आई अमरपुर सीट पर कांग्रेस चार बार जीती, लेकिन 1985 के बाद मतदाताओं ने उसे फिर मौका नहीं दिया। पिछले विधानसभा चुनाव में जयंत राज ने कड़े मुकाबले में कांग्रेस के जितेंद्र सिंह को 3114 मतों के अंतर से पराजित किया था। चुनाव मैदान में उतरे लोजपा प्रत्याशी मृणाल शेखर ने 40308 मत पाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया था।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर अमरपुर में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। जदयू सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के भरोसे मैदान में है। दूसरी तरफ महागठबंधन की ओर से राजद लगातार सक्रिय है। हालांकि पिछले चुनाव में यहां महागठबंधन की ओर से कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारा था। उधर, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी जन संवाद के जरिए लोगों तक पहुंच रही है। अमरपुर विधानसभा में कुर्मी-कुशवाहा वोटों की संख्या अधिक है, लेकिन राजपूत वोट भी निर्णायक बनते हैं।
गुड़ उद्योग को बचाने की नीति नहीं बनी
अमरपुर में गुड़ उद्योग का अस्तित्व लगभग समाप्ति की ओर है। इसे बचाने के लिए अब तक कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है। इससे हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट बना हुआ है। पर्यटन की तमाम संभावनाओं के बावजूद यह क्षेत्र अब तक उपेक्षित रहा है। खासकर भदरिया जैसे स्थल को बौद्ध सर्किट से जोड़ने की मांग वर्षों से लंबित है। भदरिया के विकास के लिए काफी खर्च भी हुआ, लेकिन स्थिति जस की तस रह गई है। यहां जेठौरनाथ पौराणिक मंदिर और तेलडीहा मंदिर का भी खास महत्व है।
अमरपुर विधानसभा क्षेत्र एक नजर में-
इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 3,16,993 है। इनमें 166837 पुरुष और 150156 महिला वोटर हैं। 18-19 साल के युवा मतदाताओं की संख्या 5864 है। अमरपुर विधानसभा का क्षेत्रफल लगभग 400 वर्ग किलोमीटर है। इसके पूरब में बांका, पश्चिम में तारापुर, उत्तर में धोरैया और दक्षिण में बेलहर है।
5 सालों में दिखे ये बदलाव
⦁ मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति
⦁ अमरपुर में बायपास निर्माण की शुरुआत
⦁ धोरैया से असरगंज तक स्टेट हाइवे की स्वीकृति, दो सड़कों का चौड़ीकरण
⦁ पावर ग्रिड की स्थापना, रजिस्ट्री कचहरी की सुविधा
वायदे जो पूरे नहीं हुए
⦁ प्रसिद्ध जेठौरीनाथ मंदिर का संपूर्ण विकास
⦁ क्षेत्र की कई ग्रामीण सड़कों का पक्कीकरण
⦁ कई गांव में पुलिया की मांग पूरी नहीं हुई
⦁ अमरपुर को रेल से जोड़ने की मांग
2025 चुनाव के मुद्दे-
⦁ अमरपुर को अनुमंडल का दर्जा
⦁ औद्योगिक इकाइयों की स्थापना
⦁ पर्यटन क्षेत्र का विकास
अमरपुर से विधायक सह भवन निर्माण मंत्री जयंत राज का दावा है कि उन्होंने जनता से जो वादा किया था उस पर खरा उतरने का पूरा प्रयास किया। क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति मिली। ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल खुले और रेफरल अस्पताल का विकास हुआ। असरगंज एचएच निर्माण की स्वीकृति, सिंचाई के लिए कई चेकडैम का निर्माण, अमरपुर में बाईपास निर्माण प्रारंभ, कई ग्रामीण सड़कों का कायाकल्प आदि प्रमुख कार्य किया। आने वाले समय में तेलडीहा मंदिर एवं जेठौरनाथ मंदिर के विकास की योजना है।
वहीं, कांग्रेस के प्रत्याशी रह चुके जितेंद्र सिंह का आरोप है कि पिछले 5 सालों में अमरपुर में जनता का नहीं, सिर्फ बालू माफियाओं का विकास हुआ है। भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। बिजली, पानी, सिंचाई के लिए आज भी अमरपुर की जनता तरस रही है। भदरिया में बौद्ध सर्किट बनाने की योजना अधर में रह गई। रोजगार सृजन के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। वर्तमान विधायक ने चुनाव में जनता से जो भी वादे किए थे, उन पर कोई कार्य नहीं किया।
अमरपुर विधानसभा सीट पर अब तक हुए चुनावों में विजेताओं के नाम-
1957 : शीतल प्रसाद भगत, कांग्रेस
1962 : शीतल प्रसाद भगत, कांग्रेस
1967 : सुखनारायण सिंह, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
1969 : सुखनारायण सिंह, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
1972 : जनार्दन यादव, भारतीय जनसंघ
1977 : जनार्दन यादव, जनता पार्टी
1980 : नील मोहन सिंह, कांग्रेस
1985 : नील मोहन सिंह, कांग्रेस
1990 : माधव मंडल, निर्दलीय
1995 : सुरेंद्र प्रसाद सिंह, जनता दल
2000 : सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राष्ट्रीय जनता दल
2005 : सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राष्ट्रीय जनता दल
2010 : जनार्दन मांझी, जनता दल यूनाइटेड
2015 : जनार्दन मांझी, जनता दल यूनाइटेड
2020 : जयंत राज, जनता दल यूनाइटेड
(रिपोर्ट- जीतेंद्र कुमार झा)




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