Darbhanga Assembly Seat BJP double challenge in stronghold MGB Jan Suraj putting efforts दरभंगा विधानसभा सीट: भाजपा को अपने गढ़ में दोहरी चुनौती, महागठबंधन और जन सुराज लगा रहे जोर, Bihar Hindi News - Hindustan
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दरभंगा विधानसभा सीट: भाजपा को अपने गढ़ में दोहरी चुनौती, महागठबंधन और जन सुराज लगा रहे जोर

बिहार की दरभंगा विधासनभा सीट को भारतीय जनता पार्टी का गढ़ माना जाता है। हालांकि, 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपने इस गढ़ में दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एनडीए का किला ढहाने के लिए महागठबंधन के अलावा प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी जोर लगा रही है।

Mon, 18 Aug 2025 01:56 PMJayesh Jetawat हिन्दुस्तान, संतोष कुमार झा, दरभंगा
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दरभंगा विधानसभा सीट: भाजपा को अपने गढ़ में दोहरी चुनौती, महागठबंधन और जन सुराज लगा रहे जोर

मिथिलांचल की राजनीति का केंद्र माने जाने वाले बिहार के दरभंगा विधानसभा क्षेत्र में साल 2000 के चुनाव तक सियासी उथल-पुथल का दौर रहा। इसके बाद के चुनावों में यहां भगवा झंडा लहरा रहा है। पिछले दो दशक से यहां भाजपा के संजय सरावगी जीत रहे हैं। इस दौरान उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी राजद ने उनकी घेरेबंदी के लिए हर बार प्रत्याशी बदला, पर सफ‌लता नहीं मिली। सरागवी इस सीट से सर्वाधिक पांच बार जीतने वाले विधायक हैं। इस बार 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को दोहरी चुनौती का सामना करना होगा। भाजपा के मजबूत गढ़ में छक्का लगाने की तैयारी कर रहे भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री संजय सरावगी को घेरने के लिए कांग्रेस और जनसुराज दोनों ने जोर लगाया है।

दरभंगा विधानसभा सीट साल 1951 में अस्तित्व में आई थी। तब इसका नाम दरभंगा सेंट्रल था। 1967 के बाद इसका नाम दरभंगा हो गया। हालांकि बोलचाल की भाषा में लोग इसे दरभंगा शहरी विधानसभा भी कहते हैं। यहां हुए कुल 17 चुनावों में 8 बार भाजपा एवं जनसंघ, 6 बार कांग्रेस, एक बार सीपीआई, एक बार जनता दल और एक बार राजद ने जीत दर्ज की है।

1985 के बाद यहां कांग्रेस वापसी नहीं कर सकी। 1952 से 1969 तक कांग्रेस के शेख सईदुल हक एवं रामेश्वर प्रसाद सिन्हा यहां से जीते। 1969 में मारवाड़ी समाज के लोकप्रिय सीपीआई नेता रामाबल्लभ जालान ने भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी सुरेंद्र झा सुमन को पराजित किया। 1972 के चुनाव में जनसंघ ने पहली बार जीत दर्ज की। यहां 1985 में आखिरी बार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में अशफाक अंसारी जीते थे। इस सीट पर 2005 से आज तक लगातार 5 बार संजय सरावगी जीत दर्ज कर चुके हैं।

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राज परिवार से दरभंगा की पहचान

दरभंगा की पहचान राज परिवार से रही है। दरभंगा राज परिवार का शिक्षा, संस्कृति और उद्योग के क्षेत्र में योगदान रहा है। दरभंगा ध्रुपद संगीत का एक प्रमुख केंद्र भी रहा है। साथ ही यहां दो विश्वविद्यालय हैं। दरभंगा शहर स्थित श्यामा मंदिर अस्था का प्रमुख केंद्र है। एयरपोर्ट चालू होने से यहां हवाई संपर्कता बढ़ी है।

जलजमाव, पेयजल संकट क्षेत्र का बड़ा मुद्दा

बारिश के दिनों में शहर के विभिन्न इलाकों में होनेवाला जलजमाव इस बार विधानसभा चुनाव में मुद्दा बन सकता है। हालांकि शहर में स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम के तहत नाला निर्माण का काम चल रहा है, पर इससे शहर के अधिकतर लोग संतुष्ट नहीं हैं। वे इसमें गड़बड़ी की बात कह रहे हैं।

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महागठबंधन और जन सुराज लगा रहे एनडीए के खिलाफ जोर

दरभंगा में राजद और कांग्रेस कार्यकर्ता एनडीए सरकार के खिलाफ काफी मुखर हैं। हाल ही में राहुल गांधी ने भी यहां आकर प्रदर्शन किया था। उधर, जन सुराज पार्टी ने भी दरभंगा में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर यहां पदयात्रा और संवाद कर चुके हैं।

दरभंगा विधानसभा सीट एक नजर में-

दरभंगा विधानसभा में कुल 3,14,719 मतदाता हैं। इनमें 165411 पुरुष और 149295 महिला वोटर हैं। इसके अलावा 13 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। इस विधानसभा के पूरब में दरभंगा ग्रामीण, पश्चिम में बहादुरपुर एवं केवटी, उत्तर में केवटी और दक्षिण में बहादुरपुर पड़ता है।

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पांच साल में दिखे ये बदलाव

1. दरभंगा जंक्शन से एकमी वाया दोनार, कर्पूरी चौक एलिवेटेड कॉरिडोर की वित्तीय स्वीकृति

2. नगर के तीनों प्रमुख तालाबों हराही, दिग्घी तथा गंगासागर के एकीकरण व सौंदर्यीकरण की स्वीकृति

3. 270 करोड़ की लागत से नगर में आठ पंपिंग स्टेशनों के साथ स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज का निर्माण

4. करीब 10 करोड़ की लागत से विद्युत शवदाहगृह सह मुक्तिधाम का निर्माण

5. जाम से मुक्ति दिलाने के लिए छह आरओबी का निर्माण कार्य प्रगति पर

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वायदे जो पूरे नहीं हुए

⦁ बीते 15 सालों में पीएचईडी की ओर से पेयजल की आपूर्ति के लिए पाइप नहीं बिछाई जा सकी

⦁ डीएमसीएच परिसर स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इनडोर सेवा शुरू नहीं हो पाई

⦁ शहर में विभिन्न जगहों पर रखी दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण का काम शुरू नहीं हो पाया

⦁ दरभंगा-लहेरियासराय वीआईपी सड़क समेत शहर की सड़कों से अतिक्रमण नहीं हट सका

⦁ शहर के निचले इलाकों में हो रहे जलजमाव की समस्या को दूर नहीं किया जा सका

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दरभंगा से विधायक सह मंत्री संजय सरावगी का दावा है कि 1868 करोड़ से दरभंगा जंक्शन से एकमी तक एलिवेटेड कॉरिडोर तथा नगर के तीनों प्रमुख तालाबों हराही, दिग्घी तथा गंगासागर के एकीकरण एवं सौंदर्यीकरण की स्वीकृति दिलाई गई। 8 पंपिंग स्टेशनों के साथ स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज का निर्माण कार्य प्रगति पर है। बिहार का पहला विद्युत शवदाह गृह भी बन रहा है। 164.31 करोड़ से अत्याधुनिक तारामंडल बनाया गया है। जाम से मुक्ति के लिए 6 आरओबी का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

राजद के जिलाध्यक्ष उदय शंकर यादव का आरोप है कि संजय सरावगी ने पिछले पांच साल के कार्यकाल में केवल खुद का विकास किया है। पूरे शहर की स्थिति नारकीय हो गई है। न सड़क का पता है और न ही नाले का। जलजमाव और ट्रैफिक जाम से पूरा शहर अस्त-व्यस्त हो गया है। पिछले 5 साल में उन्होंने इन समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है।

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दरभंगा विधानसभा सीट पर अब तक हुए चुनावों में जीते प्रत्याशी-

1952 - शेख सईदुल हक - कांग्रेस

1957 - शेख सईदुल हक - कांग्रेस

1962 - रामेश्वर प्रसाद सिन्हा - कांग्रेस

1967 - रामेश्वर प्रसाद सिन्हा - कांग्रेस

1969 - रामाबल्लभ जालान - सीपीआई

1972 - सुरेंद्र झा सुमन - भारतीय जनसंघ

1977 - शिवनाथ वर्मा - जनता पार्टी

1980 - अब्दुल समी नदवी - कांग्रेस (इंदिरा)

1985 - अशफाक अंसारी - कांग्रेस

1990 - कामेश्वर पूर्वे - जनता दल

1995 - शिवनाथ वर्मा - भाजपा

2000 - सुल्तान अहमद - राजद

2005 (फरवरी) - संजय सरावगी - भाजपा

2005 (नवंबर) - संजय सरावगी - भाजपा

2010- संजय सरावगी- भाजपा

2015 -संजय सरावगी - भाजपा

2020- संजय सरावगी- भाजपा

(रिपोर्ट- संतोष कुमार झा)

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