लखीसराय विधानसभा सीट: समाजवादी गढ़ में विजय सिन्हा के सामने हैट्रिक से आगे की चुनौती
बिहार की लखीसराय विधानसभा सीट पर भाजपा के विजय सिन्हा लगातार 3 बार से जीत रहे हैं। 2025 के चुनाव में उनके सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। समाजवादियों के गढ़ माने जाने वाले लखीसराय में कांग्रेस सिर्फ एक बार जीत हासिल कर पाई।
बिहार का लखीसराय विधानसभा क्षेत्र डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा का निर्वाचन क्षेत्र होने की वजह से खास है। उन्होंने लगातार तीन विधानसभा चुनावों में अपनी विजय पताका यहां फहराई है। हालांकि 10 सालों के दौरान उन्हें मिले वोट और जीत का अंतर घटा है। कभी समाजवाद के गढ़ रहे लखीसराय में साल 2000 में भाजपा ने पहली बार जीत दर्ज की थी। मुंगेर लोकसभा क्षेत्र में आने वाली लखीसराय विधानसभा सीट 1957 तक बड़हिया विस क्षेत्र का हिस्सा थी। 1967 में लखीसराय विधानसभा क्षेत्र पहली बार अस्तित्व में आया।
1967 से 2020 के बीच 13 चुनावों में भाजपा ने 5 और समाजवादी धड़े की पार्टियों ने बार जीत दर्ज की। इनमें संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी व जनता दल ने दो-दो बार, जबकि राजद (अक्टूबर 2005) ने एक बार जीत दर्ज की है। कांग्रेस को सिर्फ 1980 में सफलता मिली थी। विजय सिन्हा 2010 में 59,620 मतों से जीते थे, लेकिन 2015 में जीत का अंतर घटकर 6,556 वोट रह गया। 2020 में उन्होंने कांग्रेस के अमरेश कुमार अनीश को 10,483 मतों से पराजित किया। लगातार तीन बार चुनाव जीतकर विरोधियों के लिए अजातशत्रु बने डिप्टी सीएम को घेरने के लिए विपक्ष भी कारगर रणनीति के साथ उतरने की तैयारी कर रहा है।
बिहार की राजनीति में बढ़ता गया विजय सिन्हा का कद
साल 2020 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद बिहार में एनडीए सरकार बनी तो भाजपा के विजय कुमार सिन्हा विधानसभा अध्यक्ष बने। फिर बिहार में राजनीतिक उठापटक के बीच महागठबंधन की सरकार बनी तो वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने। पुन: एनडीए की सरकार बनने के बाद वह उप मुख्यमंत्री बनाए गए।
कभी मगध साम्राज्य का हिस्सा था लखीसराय
लखीसराय प्राचीन मगध साम्राज्य का हिस्सा रहा है। यहां अशोक कालीन स्तूप, बौद्ध, जैन और हिंदू स्थलों के अवशेष मिलते हैं। खुदाई में प्राचीन मूर्तियां, शिलालेख प्राप्त हुए हैं, जो इसकी सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं। अशोकधाम मंदिर, श्रृंगी ऋषि धाम और बढ़इया का जगदंबा मंदिर में भारी भीड़ लगती है।
उद्घाटन-शिलान्यास, सभाओं में आई तेजी
लखीसराय बिहार की राजनीति में एक अहम स्थान रखता है। यह मुंगेर लोकसभा के अंतर्गत आता है और इस लिहाज से मुंगेर लोकसभा क्षेत्र और लखीसराय विधानसभा क्षेत्र दोनों एक-दूसरे की राजनीति को प्रभावित करते हैं। फिलहाल चुनाव नजदीक आने के साथ ही लखीसराय क्षेत्र में सभाओं, विकास योजनाओं के उद्घाटन, मेल-मुलाकात की होड़ लगी है।
लखीसराय से विधायक और डिप्टी सीएम विजय सिन्हा का दावा है कि बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, कृषि, कला संस्कृति एवं पर्यटन के क्षेत्र में विकास कार्य किए गए। कुछ काम हो रहे हैं। हर गांव को कनेक्टिविटी देने का प्रयास करते हुए 160 से ज्यादा ग्रामीण सड़कों की मंजूरी दिलाई गई है। लखीसराय की ख्याति राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखेगी।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमरेश कुमार अनीश ने आरोप लगाया कि विजय कुमार सिन्हा का पिछला कार्यकाल संतोषजनक नहीं रहा। किसान अपनी उपज को औने-पौने दाम में बेचने पर विवश हैं। लखीसराय में एक भी अंगीभूत महिला कॉलेज नहीं बनवा सके। किऊल नदी के किनारे मरीन ड्राइव एवं बड़हिया को जाम से मुक्त करने को लेकर बायपास नहीं मिला।
लखीसराय विधानसभा सीट एक नजर
लखीसराय के पूरब में सूर्यगढ़ा और जमुई, पश्चिम में मोकामा और शेखपुरा, उत्तर में मटिहानी, दक्षिण में सिकंदरा और शेखपुरा विधानसभा लगती है। लखीसराय सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 4,08,145 है। इनमें से 2,15882 पुरुष और 1,93,263 महिला वोटर हैं। यह आंकड़ें मतदाता गहन पुनरीक्षण होने से पहले के हैं। वोटर लिस्ट रिवीजन के बाद आंकड़ों में बदलाव संभव है।
लखीसराय की बड़ी समस्याएं जो दूर नहीं हुईं-
⦁ लखीसराय, बडिया और सूर्यगढ़ा में जाम की समस्या
⦁ टाल एवं दियारा क्षेत्र में बाढ़ की समस्या
⦁ हलसी एवं रामगढ़ चौक में कैनाल का सुदृढ़ीकरण नहीं
ये घोषणाएं जो पूरी नहीं हुईं
⦁ मरांची से बड़हिया तक मरीन ड्राइव
⦁ बड़हिया से डुमरी स्टेशन पर आरओबी
⦁ एनएच 80 दरियापुर से मपथुआ सूर्यगढ़ा सड़क निर्माण
⦁ बड़हिया में दलहन विकास केंद्र की स्थापना
⦁ हलसी कृषि विज्ञान केंद्र में बीज प्रसंस्करण इकाई
इन प्रोजेक्ट पर चल रहा काम
⦁ किऊल नहीं पर बेली ब्रिज
⦁ अशोक धाम से शिवगंगा का निर्माण
⦁ लाली पहाड़ी का सौंदर्यीकरण
⦁ लखीसराय-किऊल के बीच किऊल नदी पर आरसीसी पुल निर्माण कार्य
⦁ एनएच 80 रामपुर से शृंगीऋषि धाम तक सड़क निर्माण




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