बिहार में बंगाली शरणार्थियों के पास जमीन है या नहीं, 1971 के बाद आने वालों की तलाश शुरू
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएससीआर) के अनुसार, वर्ष 1971 के खूनी संघर्ष में अनुमानत: एक करोड़ बंगाली शरणार्थी भारत आए थे। यही वजह है कि दिसंबर 1971 से बिहार में रह रहे बंगाली शरणार्थियों की खोज की जा रही है।

बिहार में बंगाली शरणार्थियों की खोज शुरू हो गई है। अब इन शरणार्थियों के वंशजों की पहचान की जाएगी। इसको लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सहायक निदेशक भू-अर्जन सह संयुक्त सचिव ने सभी समाहर्ताओं से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मांगने का मुख्य मकसद शरणार्थी परिवारों को मिली भूमि शरणार्थियों के वंशजों के दखल में है या नहीं? दरअसल इन शरणार्थियों के लिए पूर्ण रैयतीकरण का नियम-कानून बनाने की मांग विधानसभा में हो चुकी है।
वर्ष 1971 में ऐसे शरणार्थियों की गृह मंत्रालय से लगातार खोज हो रही है। सहायक निदेशक ने समाहर्ताओें को कहा कि रैयतीकरण का नियम-कानून बनाने के लिए बिहार विधानसभा सचिवालय को जवाब जल्द दिया जाना है। डीएम से कहा गया है कि जिलों में बंगाली शरणार्थी परिवारों को आवंटित या बंदोबस्त भूमि के समग्र आंकड़ों के साथ रिपोर्ट दें।
इन परिवारों को आवंटित या बंदोबस्त भूमि के संबंध में निर्गत पर्चा और आवंटित जमीन की किस्म या प्रकृति बंदोबस्त की गई है नहीं, यह बताएं। अधिकारियों ने बताया कि दिसंबर 1971 से बिहार में रह रहे बंगाली शरणार्थियों की खोज हो रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा बार-बार इसको लेकर रिपोर्ट तलब की जाती रही है। मंत्रालय ने भागलपुर और राजधानी पटना सहित सभी जिलों को बंगाली शरणार्थियों की खोज कर उनकी रिपोर्ट तैयार कर भेजने को कहा है। आधे से ज्यादा जिलों ने रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
अब तक 11 जिलों से ही रिपोर्ट भेजी गई है। बांका, भोजपुर, औरंगाबाद, जमुई, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, नवगछिया, सहरसा, कटिहार और शेखपुरा से ही रिपोर्ट भेजी गई है। जबकि पटना, भागलपुर, अररिया, अरवल, बक्सर, दरभंगा, कटिहार, किशनगंज, खगड़िया, मधेपुरा, मुंगेर आदि से रिपोर्ट मुख्यालय को नहीं मिली है। एडीएम दिनेश राम ने कहा कि विभाग के पत्र के आलोक में सभी सीओ से बंगाली शरणार्थियों के बारे में जानकारी मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद समेकित प्रतिवेदन विभाग को भेजा जाएगा।
इस वजह से रिपोर्ट हो रही तैयार
अधिकारियों ने बताया कि बांग्लादेश का मुक्ति संग्राम वर्ष 1971 में शुरू हुआ था। 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ था। पाकिस्तानी सेना ने 16 दिसम्बर 1971 को भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएससीआर) के अनुसार, वर्ष 1971 के खूनी संघर्ष में अनुमानत: एक करोड़ बंगाली शरणार्थी भारत आए थे। यही वजह है कि दिसंबर 1971 से बिहार में रह रहे बंगाली शरणार्थियों की खोज की जा रही है।




साइन इन