राघोपुर विधानसभा सीट: 6 लेन पुल के सहारे एनडीए की तेजस्वी यादव के गढ़ में सेंधमारी की तैयारी
बिहार की राघोपुर विधानसभा सीट को लालू परिवार का गढ़ माना जाता है। पूर्व डिप्टी सीएम एवं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव यहां से लगातार दो बार से विधायक हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए ने उनके गढ़ में सेंधमारी की तैयारी की है।

बिहार के वैशाली जिले में स्थित गंगा नदी से घिरे राघोपुर विधानसभा क्षेत्र को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार की राजनीति का गढ़ माना जाता है। यहां से लालू परिवार के तीन सदस्य अब तक सात बार चुनाव जीते हैं। मतदाताओं ने लालू यादव, राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव को बारी-बारी से मौका दिया। फिलहाल यहां से नेता विरोधी दल तेजस्वी यादव विधायक हैं। लगातार दो चुनावों में जीत दर्ज करने वाले तेजस्वी राघोपुर से एक ओर जहां हैट्रिक की तैयारी में हैं। वहीं, दूसरी ओर 6 लेन पुल के सहारे एनडीए लालू परिवार के ‘राजनीतिक गढ़’ में सेंधमारी करने की कोशिश में है। राघोपुर के लोगों को 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले गंगा नदी पर 6 लेन पुल के रूप में आवागमन का स्थायी साधन मिला है।
राघोपुर में अब तक हुए 20 चुनावों (उप चुनाव समेत) में सात बार राजद, तीन बार कांग्रेस और दो बार जनता दल को जीत मिली। जनसंघ, संसोपा, सोशलिस्ट पार्टी, लोकदल, जनता पार्टी (सेक्युलर), जनता पार्टी और जदयू को एक-एक बार सफलता मिली है।
उदय नारायण ने लालू के लिए छोड़ी थी सीट
राघोपुर विधानसभा सीट पर हैट्रिक लगाने वाले उदय नारायण राय ने हर बार अलग-अलग पार्टी से जीत दर्ज की। वह 1980 में जनता पार्टी सेक्युलर, 1985 में लोकदल और 1990 में जनता दल के टिकट पर जीते। इसके बाद उन्होंने यह सीट लालू यादव के लिए छोड़ दी थी। तब से यह सीट लालू परिवार का गढ़ बन गई।
पहले दो चुनावों में जीती कांग्रेस
राघोपुर सीट पर शुरुआती दो चुनावों (1951 व 1957) में कांग्रेस के हरिवंश नारायण सिंह ने आसान जीत दर्ज की थी। लेकिन, 1962 में कांग्रेस को पराजित कर सोशलिस्ट पार्टी के देवेंद्र सिन्हा जीते। 1969 के बाद यहां कांग्रेस कभी जीत हासिल नहीं कर पाई।
2010 में राबड़ी देवी की हार ने चौंकाया
लालू परिवार को सिर्फ एक बार साल 2010 के विधानसभा चुनाव में राघोपुर में हार का सामना करना पड़ा था। जदयू के टिकट पर उतरे सतीश कुमार राय ने राबड़ी को करीब 13 हजार वोटों के अंतर से हराकर राजद के किले में सेंधमारी की थी। हालांकि, 2015 में तेजस्वी यादव ने सतीश कुमार (भाजपा) को 22 हजार वोटों से हराकर राघोपुर पर कब्जा जमा दिया। 2020 में तेजस्वी की जीत का अंतर 2015 के मुकाबले दो गुना हो गया।
राघोपुर विधानसभा सीट एक नजर
यह विधानसभा क्षेत्र वैशाली जिले में आता है। इसकी दो पंचायतें हाजीपुर और कुछ बिदुपुर में आती हैं। हर साल बाढ़ में कटाव एक बड़ी समस्या है। यह विधानसभा सीट साल 1951 में अस्तित्व में आई थी। राघोपुर विधानसभा में कुल 3,64,706 मतदाता हैं। इनमें 1,91,639 पुरुष और 1,73,059 महिला वोटर हैं। इनके अलावा 6 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। यह आंकड़ा 2025 के वोटर लिस्ट रिवीजन होने से पहले का है। राघोपुर के पूरब में महनार, पश्चिम में हाजीपुर, उत्तर में राजापाकर और दक्षिण में पटना सिटी स्थित है।
पांच सालों में दिखा यह बदलाव
⦁ 6 लेन पुल के रूप में आवागमन का स्थायी साधन मिला
⦁ छह लेन पुल से राघोपुर और बिदुपुर की कई पंचायतों को फायदा
⦁ पटना से राघोपुर तक बस सेवा शुरू हुई
⦁ सरकारी योजनाएं दियारा के गांवों तक पहुंची
वादे, जो पूरे नहीं हुए
⦁ हर वर्ष बाढ़ में 15 से 16 पंचायतें डूब जाती हैं, कटाव का स्थायी समाधान नहीं हुआ
⦁ क्षेत्र के लोगों की रिंग बांध बनाने की पुरानी मांग
⦁ युवाओं की मांग- स्टेडियम का निर्माण और डिग्री कॉलेज
⦁ राष्ट्रीय स्तर से बैंक की शाखाएं यहां पर नहीं हैं, सिर्फ दो ग्रामीण बैंक चल रहे हैं
रिंग बांध होगा इस बार मुद्दा
चारों तरफ गंगा नदी से घिरे राघोपुर विधानसभा क्षेत्र में साल 2025 के चुनाव का मुद्दा रिंग बांध होगा। राघोपुर की जनता अपनी इस पुरानी मांग की लंबे समय से बाट जोह रही है। क्योंकि राघोपुर प्रखंड की करीब 20 पंचायतों में से 16 पंचायतें हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलती हैं।
राघोपुर से मौजूदा विधायक और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का दावा है कि उन्होंने चकसिकंदर, बिदुपुर में इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना कराई। कच्ची दरगाह बिदुपुर छह लेन पुल तथा राघोपुर को संपर्कता देने के लिए रैंप बनवाया। पान अनुसंधान केंद्र एवं एक अतिरिक्त पीपा पुल बनावाए। 358 करोड़ की ग्रामीण सड़कें बनवाईं।




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