Gaya Town Assembly Seat How will grand alliance break 35 year spell of BJP गया टाउन विधानसभा सीट: भाजपा के 35 साल के तिलिस्म को कैसे तोड़ेगा महागठबंधन, Bihar Hindi News - Hindustan
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गया टाउन विधानसभा सीट: भाजपा के 35 साल के तिलिस्म को कैसे तोड़ेगा महागठबंधन

बिहार की गया टाउन विधानसभा सीट पर बीते लगभग 35 सालों से भारतीय जनता पार्टी के प्रेम कुमार जीतते आ रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के सामने भाजपा के साढ़े तीन दशक के तिलिस्म को तोड़ना चुनौती है।

Tue, 5 Aug 2025 09:41 AMJayesh Jetawat हिन्दुस्तान, मनोरंजन कुमार, गयाजी
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गया टाउन विधानसभा सीट: भाजपा के 35 साल के तिलिस्म को कैसे तोड़ेगा महागठबंधन

पितरों को मोक्ष दिलाने वाली नगरी गया जी में भाजपा का तिलिस्म 35 साल से बरकरार है। प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी के राजनीतिक कद के हिसाब से जीत का अंतर ऊपर-नीचे जरूर हुआ लेकिन डॉ. प्रेम कुमार की नैया हर बार पार लगी है। भाजपा के डॉ. प्रेम कुमार 35 सालों से गया टाउन विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं। विपक्षी दलों ने प्रेम कुमार को पटखनी देने के लिए बार-बार अलग-अलग चेहरे उतारे। लेकिन, कभी सफलता नहीं मिली। हालांकि पिछले तीन चुनावों से जीत का अंतर घटता रहा है। प्रेम कुमार नीतीश सरकार में सहकारिता मंत्री हैं।

1990 में ‘मंडल’ की लहर में कांग्रेस के गढ़ ढहने शुरू हुए तो इसकी चपेट में गया टाउन विधानसभा क्षेत्र भी आया। यहां 1990 में डॉ प्रेम कुमार ने जो खूंटा गाड़ा, वह आजतक कायम है। उनके खिलाफ सबसे ज्यादा वोट कांग्रेस के उम्मीदवार अखौरी ओंकार नाथ (55034) को 2020 के चुनाव में मिले। वोटों के अंतर के लिहाज से प्रेम कुमार को सबसे कड़ी टक्कर 2000 में सीपीआई के मसउद मंजर से मिली थी। तब, हार और जीत में मतों का अंतर सिर्फ 3959 था। प्रेम कुमार को 37 हजार 264 और मसउद मंजर 33 हजार 205 वोट मिले थे।

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पिछले चुनाव यानी वर्ष 2020 में भाजपा और कांग्रेस की सीधी टक्कर रही। कांग्रेस के उम्मीदवार अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव 11898 वोट से हारे। इस बार चुनाव में महागठबंधन की चुनौती भाजपा के तिलिस्म को तोड़ने की है।

1985 के बाद कभी नहीं जीत पाई कांग्रेस

1951 में इस सीट के अस्तित्व में आने के बाद अब तक पांच बार कांग्रेस ने यहां जीत हासिल की है। दो बार जनसंघ और एक बार निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली। हालांकि 1985 के बाद कांग्रेस कभी इस सीट पर कब्जा नहीं जमा पाई।

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प्रसिद्ध तीर्थस्थल है गयाजी :

सरकार ने इस साल गया का नाम बदलकर ‘गया जी’ कर दिया है। पितरों को मोक्ष दिलाने वाले इस नगर का देश-दुनिया में खास महत्व है। यहां मां मंगला गौरी, विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी, सीता कुंड, अक्षयवट, ब्रह्मयोनि पहाड़, सूर्यकुंड जैसे कई स्थल हैं।

गया टाउन विधानसभा जातीय समीकरण

गया जी शहर में अल्पसंख्यक समुदाय और वैश्य समाज के करीब 50-50 हजार वोटर हैं। वहीं कायस्थ और चंद्रवंशी समाज के 25-25 हजार मतदाता हैं। नई बसावट के कारण भूमिहार 25 हजार, राजपूत 15 हजार, अतिपिछड़ा करीब 30 हजार, कोयरी-कुर्मी आदि के 25 हजार वोटर हैं। शहर के पास पहाड़ों पर लोगों ने घर बना लिए हैं। ऐसे लोगों को वोट देने का अधिकार तो मिला है लेकिन शहर की सुविधाओं में इजाफा नहीं हुआ।

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पांच साल में दिखा यह बदलाव

⦁ फल्गु नदी पर रबर डैम बना, गंगा जी का पानी घरों तक पहुंचा

⦁ गया जी पहुंचना हुआ आसान, फोरलेन सड़क की मिली सुविधा

⦁ गांधी मैदान में जिम और रामशिला के पास चिल्ड्रन पार्क का निर्माण

⦁ गया जी में बिपार्ड का निर्माण और बिपार्ड के सामने ब्रह्मवन यानि तितली पार्क

वायदे जो पूरे नहीं हुए

⦁ गया में बागेश्वरी गुमटी पर आरओबी का नहीं हुआ निर्माण

⦁ बीथो बीयर बांध की मांग नहीं हुई पूरी

⦁ गया जी से शहर से बोधगया तक फल्गु नदी किनारे सड़क निर्माण

⦁ घुघड़ीटांड बाइपास पर ओवरब्रिज का काम नहीं हुआ शुरू

⦁ गया जी शहर में जाम की समस्या बरकरार

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गया टाउन सीट से कब-कौन जीते

1951- केशव प्रसाद (कांग्रेस)

1957- सरदार मोहन (कांग्रेस)

1962- श्याम बर्थवार (निर्दलीय)

1967- गोपाल मिश्र (जनसंघ)

1969- गोपाल मिश्र (जनसंघ)

1972- डॉ. युगल किशोर (कांगेस)

1977- सुशील सहाय (जनता पार्टी)

1980-जय कुमार पालित (कांग्रेस)

1985- जय कुमार पालित (कांग्रेस)

1990 से 2020 तक आठ बार (भाजपा)

बिहार सरकार में मंत्री एवं गया के विधायक प्रेम कुमार का दावा है कि शहर को विकसित बनाने के लिए काम हुए हैं। अभी घुघड़ीटांड बायपास पर फ्लाईओवर, बागेश्वरी गुमटी पर आरओबी, कंडी नवादा के पार्क का विकास किया जा रहा है। गांधी मैदान का पुनर्विकास किया गया। केंद्र सरकार ने पर्यटन विकास के तहत विष्ण्पुपथ कॉरिडोर पथ निर्माण की घोषणा की है।

कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी अखौरी ओंकार नाथ का आरोप है कि वर्षों से काबिज विधायक ने यहां कोई काम नहीं किया। जाम की समस्या बढ़ती जा रही है। प्रेम कुमार कोई ऐसी योजना नहीं बता सकते जो उनके प्रयास से हुई है। कुछ काम जो होते दिख रहे हैं उनमें इनका कोई सहयोग नहीं है। जबकि हम लोगों ने पांच साल में कई काम किए।

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