सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र कैसे चढ़ाएं, नोट करें बेलपत्र चढ़ाने का मंत्र
Sawan ki Pooja, bel patra kaise chadhta hai: सावन की पूजा में बेलपत्र चढ़ाते समय कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाने से शिव जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

Sawan ki Pooja,bel patra kaise chadhta hai: भोलेनाथ को समर्पित सावन का महीना शुरू हो चुका है। इस साल ये महीना 9 अगस्त तक रहने वाला है। इस पूरे महीने भक्त महादेव की भक्ति में डूबे नजर आएंगे। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाया जाता है। भोले बाबा को बिल्व पत्र बेहद प्रिय माना जाता है। ये पत्तियां त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाने से शिव जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं। बेलपत्र चढ़ाते समय कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। इसलिए आइए जानते हैं सावन की पूजा के दौरान शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के नियम और मंत्र-
सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र कैसे चढ़ाएं?
- बेलपत्र चढ़ाने से पहले उसे पवित्र जल से धो लेना चाहिए
- बेलपत्र का चिकना हिस्सा (सीधा भाग) शिवलिंग को स्पर्श करना चाहिए
- बेलपत्र 3, 5, 11, या 21 की संख्या में चढ़ा सकते हैं
- शिवलिंग पर बेलपत्र इस तरह चढ़ाना चाहिए कि बेलपत्र का डंठल आपकी ओर हो
- बेलपत्र चढ़ाते समय मंत्र जाप करना अत्यंत फलदायक होता है। अगर आपको बेलपत्र चढ़ाने का मंत्र नहीं याद है तो आप ॐ नमः शिवाय मंत्र पढ़कर भी बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं
- बेलपत्र न होने पर शिवलिंग पर चढ़ाया गया बेलपत्र वापस पानी से धुलकर भी चढ़ाया जा सकता है
कैसा होना चाहिए बेलपत्र?
- बेलपत्र कम से कम तीन पत्तियों वाला होना चाहिए
- कटा-फटा या छेद वाला बेलपत्र नहीं चढ़ाना चाहिए
- शिवलिंग पर हमेशा ताजा और हरा-भरा बेलपत्र ही अर्पित करें। बेलपत्र की मुरझाई पत्तियां नहीं चढ़ानी चाहिए
- कोशिश करें दाग-धब्बे वाला बेलपत्र न चढ़ाएं
नोट करें बेलपत्र चढ़ाने का मंत्र
नमो बिल्ल्मिने च कवचिने च नमो वर्म्मिणे च वरूथिने च नमः श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो
दुन्दुब्भ्याय चा हनन्न्याय च नमो घृश्णवे॥
दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनम् पापनाशनम्।
अघोर पाप संहारं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्॥
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥
अखण्डै बिल्वपत्रैश्च पूजये शिव शंकरम्।
कोटिकन्या महादानं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्॥
गृहाण बिल्व पत्राणि सपुश्पाणि महेश्वर।
सुगन्धीनि भवानीश शिवत्वंकुसुम प्रिय॥
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।




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