Saphala Ekadashi: सुबह से शाम तक इन शुभ मुहूर्त में करें सफला एकादशी पूजा, जानें उपाय व मंत्र
Saphala Ekadashi Time: पौष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा-दृष्टि तो बनी रहती है साथ ही पापों का नाश भी होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सोमवार के दिन सफला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

Saphala Ekadashi Time: इस साल सफला एकादशी का व्रत सोमवार को है। पौष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा-दृष्टि तो बनी रहती है साथ ही पापों का नाश भी होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, 06:49 पी एम से 14 दिसंबर को एकादशी तिथि शुरू होगी, जिसका समापन 15 दिसंबर को 09:19 पी एम तक होगा। ऐसे में आइए जानते हैं सफला एकादशी पर पूजा के शुभ मुहूर्त, उपाय, मंत्र, विधि-
सफला एकादशी शुभ योग: इस दिन सूर्य, बुध और शुक्र ग्रह एक साथ वृश्चिक राशि में रहेंगे, जिससे त्रिग्रही योग का निर्माण होगा। इसके साथ ही सूर्य, बुध एक साथ होने से बुधादित्य योग भी बनेगा। वहीं, शोभन योग और चित्रा और स्वाती नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। यह योग कॅरियर में सफलता, धन लाभ और आत्मविश्वास में वृद्धि लाने वाला माना जाता है। यानी त्रिग्रही योग में त्रिलोक नाथ की कृपा सफला एकादशी पर खूब बरसेगी।
सुबह से शाम तक इन शुभ मुहूर्त में करें सफला एकादशी पूजा
- ब्रह्म मुहूर्त 05:17 ए एम से 06:12 ए एम
- अभिजित मुहूर्त 11:56 ए एम से 12:37 पी एम
- विजय मुहूर्त 02:00 पी एम से 02:41 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त 05:24 पी एम से 05:51 पी एम
- अमृत काल 04:15 ए एम, दिसम्बर 16 से 06:03 ए एम, दिसम्बर 16
- निशिता मुहूर्त 11:49 पी एम से 12:44 ए एम, दिसम्बर 16
- अमृत - सर्वोत्तम 07:06 ए एम से 08:24 ए एम
- शुभ - उत्तम 09:41 ए एम से 10:59 ए एम
- चर - सामान्य 01:34 पी एम से 02:51 पी एम
- अमृत - सर्वोत्तम 04:09 पी एम से 05:26 पी एम
- चर - सामान्य 05:26 पी एम से 07:09 पी एम
उपाय- सफला एकादशी के दिन किसी गरीब या जरूरतमंद को भोजन कराएं। भगवान विष्णु को गुड़ और चने की दाल का भोग लगाएं।
मंत्र- ॐ विष्णवे नमः, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
पूजा-विधि
- स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें
- भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें
- प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
- विष्णु भगवान को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
- मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
- संभव हो तो व्रत रखें और व्रत लेने का संकल्प करें
- सफला एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें
- पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें
- विष्णु जी को तुलसी दल सहित भोग लगाएं
- अंत में क्षमा प्रार्थना करें
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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