Numerology: 4, 13, 22 और 31 तारीख को जन्मे लोग बरतें ये सावधानियां, इस मंत्र के जाप से दूर होंगे सारे दुख
न्यूमेरेलॉजी के अनुसार मूलांक 4 वालों का ग्रह स्वामी राहु होता है और इन लोगों को कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। साथ ही इनके लिए 2 ऐसे मंत्र हैं जिनके जाप से इनका मन हमेशा शांत रहेगा।

न्यूमेरेलॉजी यानी अंक ज्योतिष में भी भविष्यवाणी की जाती है। इस शास्त्र में जन्म की तिथि के आधार पर सब होता है। जन्म तिथि के योग से हमें हमारा मूलांक मिल जाता है और न्यूमेरेलॉजी का आधार यही मूलांक होता है। अगर आपको जन्म 6 तारीख को हुआ है तो आपका मूलांक 6 होगा। वहीं अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 13 तारीख को हुआ है तो आपका मूलांक 4 आएगा। आज बात करेंगे मूलांक 4 वालों के ही बारे में। इस मूलांक की कैटेगरी में वो लोग आते हैं, जिनका जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22 या फिर 31 तारीख को होता है। जानेंगे कि न्यूमेरेलॉजी के अनुसार इन लोगों को को किन-किन चीजों में सावधानी बरतनी चाहिए? साथ ही जानेंगे कि इस मूलांक के लिए वो दो मंत्र कौन से हैं, जिनके जाप से लाभ मिलेगा?
मूलांक 4 वाले लोग बरतें ये सावधानियां
1. जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22 या फिर 31 तारीख को हुआ है तो ऐसे लोगों को किसी दूसरे को कभी भी झूठा आश्वासन देने से बचना चाहिए। अगर आपसे हो पाए तभी हां कहें नहीं तो क्लैरिटी के साथ मना ही कर दें। इससे आपकी पर्सनैलिटी खराब नहीं होगी बल्कि लोगों को लगेगा कि आप साफ बात करने वाले इंसान हैं। दूसरों को खुश करने के लिए हमेशा हां ना कहते रहें। अपनी प्रियॉरिटी के हिसाब से चीजें करें।
2. मूलांक 4 वाले जातक झूठी शान शौकत से हमेशा दूरी बनाकर रखें। आपकी स्थिति जैसी है, वैसा ही रहन-सहन रखें। दूसरों के रहन-सहन और खानपान से अपनी तुलना ना करें। किसी की नकल ना करें। आप जैसे हैं वैसे ही रहें।
3. न्यूमेरेलॉजी के हिसाब से मूलांक 4 वाले जातकों को ट्रैवल के समय सावधानी बरतनी चाहिए। इस दौरान अपना और अपनी चीजों का ख्याल रखें। ट्रैवलिंग के समय किसी दूसरे इंसान पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचें।
मूलांक 4 वाले पढ़ें ये मंत्र
इस मूलांक का ग्रह स्वामी राहु होता है। वहीं न्यूमेरेलॉजी के आधार पर इस मूलांक के प्रधान देवता भगवान गणेश हैं। ऐसे में इन लोगों को गणपति की पूजा हमेशा करनी चाहिए। साथ ही इन्हें ध्यान में रखते हुए दो मंत्रों का जाप जरूर करना चाहिए। नीचे जानें इन मंत्रों के बारे में...
पहला मंत्र
द्वि चतुर्दश वर्ण भूषितांड्ग
शशि सूर्याग्नि विलोचनं सुरेशम्।
अहि भूषित कण्ठमक्षसूत्रं
प्रभयेत्तं हृदये गणेशम्॥
दूसरा मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वरवरद सर्वजनं मे वशमानाय स्वाहा॥
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए अंकशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)




साइन इन