भजन के वक्त मन में उलटे ख्याल आते हैं, क्या करें? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब
एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से पूछा कि अध्यात्म की तरफ चलते-चलते अचानक मन विचलित सा हो जाता है। उल्टे से ख्याल आते हैं और मन में नकारात्मक विचार उत्पन्न से हो जाते हैं। इसके लिए क्या करें। चलिए जानते हैं कि महाराज जी ने क्या जवाब दिया?

मथुरा-वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज के वीडियो खूब वायरल होते हैं। इनके दर्शन के लिए लोग दूर दराज से आते हैं। दर्शन के साथ-साथ महाराज जी से लोग सवाल भी पूछते हैं। ऐसे ही एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से पूछा कि अध्यात्म की तरफ चलते-चलते अचानक मन विचलित सा हो जाता है। उल्टे से ख्याल आते हैं और मन में नकारात्मक विचार उत्पन्न से हो जाते हैं। इसके लिए क्या करें। चलिए जानते हैं कि महाराज जी ने क्या जवाब दिया?
महाराज जी का जवाब
प्रेमानंद महाराज इस सवाल का जवाब देते हुए कहते हैं कि मन को संसार का मनोरंजन काफी प्रिय लगता है। मन मानी आचरण करना उसको प्रिय लगता है। वो कहते हैं कि उसकी गलती नहीं, हम जहां लगाते हैं वहीं, लगता है। प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि हमारा मन स्वभावतः बहुत तेज और अशांत होता है। वह आसानी से किसी भी चीज की ओर आकर्षित हो जाता है, चाहे वह अच्छा हो या बुरा, बस उसे लगता है कि “इसी में सुख है।” यह मन की प्रकृति है कि वह भटकता रहता है।
महाराज जी कहते हैं कि जैसे अध्यात्म मार्ग में लगा रहे हैं, तो इसमें जहां-जहां वो लगा रहा है, उसके विरुद्ध बात है। उसको भोग चाहिए। वो कहते हैं कि आप इस मन के भुलावे में आकर मन भोगों के भुलावे में आकर आपको फसाकर यह सदैव अधीन रखा है। अब अध्यात्म सुनना शुरू किया। अब इसमें मन को वश में किया जाता है। अभी तक आप मन के वश में रहें। जब आप सपोर्ट नहीं देंगे, तो वो आपका सपोर्ट करने लगेगा।
वश में करने की कोशिश
महाराज जी कहते हैं कि आपके बिना मन की कोई सत्ता नहीं है। वो आपके बिना कुछ नहीं कर सकता है। जैसे की हमारा मन कह रहा है कि मैं देखूं, लेकिन हम कह रहे हैं कि नहीं देखना है। वो 100 बार कहेगा देखो, लेकिन आप कहोगे नहीं, ये देखो। अब आप जिधर मन को लगाओगे, उधर लग जाएगा। ऐसे में कुछ समय के लिए लगेगा। फिर वो आपको अपने वश में करने की कोशिश में लगेगा। इसके बाद जब आप ना करेंगे,तो वो आपको जलाएगा। अगर उस जलन को सह गए, तो मन को अधीन कर लेंगे और नहीं सह पाए, तो मन आपको अधीन कर लेगा।
मन को कोई चेला बना ले, वही सच्चा गुरु
महाराज जी कहते हैं कि प्राय सब मन के अधीन ही होते हैं। मन को कोई चेला बना ले, वही सच्चा गुरु है। दूसरों को तो चेला बनाना सहज है। मन जैसा कहता है वैसा ही करना पड़ता है। बड़ा बात यह है कि मन को हम जैसा कहे शास्त्र आज्ञा से तो ऐसा चला ले, तो वो महात्मा।
नाम जप करें
प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि मन को शांत और शुद्ध रखने का सबसे असरदार उपाय है भगवान का नाम जप (जैसे राधा-राधा), सत्संग में बैठना और भक्ति में मन लगाने की आदत डालना। निरंतर भक्ति के अभ्यास से मन के बुरे विचार धीरे-धीरे कम हो जाते हैं। हमेशा खाली समय देना मन को उल्टे ख्यालों की ओर खींचता है। इसलिए मन को अच्छे कामों, अच्छे विचारों और भक्ति-साधना में लगे रखना चाहिए, जैसे सत्संग सुनना, याद रखना, सेवा करना आदि
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




साइन इन