Does worshipping multiple idols of God yield more benefits Know the answer from Premanand Maharaj भगवान के अनेक विग्रहों की पूजा करने से अधिक फल मिलता है? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
More

भगवान के अनेक विग्रहों की पूजा करने से अधिक फल मिलता है? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब

एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से सवाल पूछा कि क्या घर में भगवान के अनेक विग्रहों की पूजा करने से अधिक फल मिलता है? चलिए जानते हैं कि महाराज जी ने क्या जवाब दिया? प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि भगवान तो एक ही हैं। उनके 100 या 200 नहीं बल्कि अनंत रुप हैं।

Mon, 26 Jan 2026 05:38 PMDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
share
भगवान के अनेक विग्रहों की पूजा करने से अधिक फल मिलता है? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब

उत्तर प्रदेश में मथुरा के फेमस संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से उनके कई वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। यहां तक उनके दर्शन के अलावा लोग उनसे तरह-तरह के सवाल भी पूछते हैं। ऐसे ही एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से सवाल पूछा कि क्या घर में भगवान के अनेक विग्रहों की पूजा करने से अधिक फल मिलता है? चलिए जानते हैं कि महाराज जी ने क्या जवाब दिया?

महाराज जी का जवाब
इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि भगवान तो एक ही हैं। उनके 100 या 200 नहीं बल्कि अनंत रुप हैं। आप जितने चाहों विराजमान करके पूजा कर लो, लेकिन फल तो एक ही मिलेगा। वो आगे कहते हैं कि आप हजार जगह भाव बांटे हुए, तो आपका भाव उस कोटि का नहीं जितना एक पूजा में भाव लगाए हुए है, तो आपका कम रहेगा।

महाराज जी कहते हैं कि हजार जगह पूजा करने पर भी आपका फल कम रहेगा और एक जगह पूजा करता है, तो बाजी मार लेता है। क्योंकि भगवान तो एक ही हैं ना। तो आप किसी एक रूप की पूजा करें। जैसे- रामकृष्ण परमहंस जी ने मां काली को पूजा। उन्होंने मां काली में ही भगवान श्री कृष्ण को देखा, मां में राम को देखा, मां में ही सबको देखा। जैसे तुलसी दास जी ने राम जी को, गोपियों ने श्रीकृष्ण को देखा। प्रेम एक जगह होता है, बहुत जगह नहीं होता है। बहुत जगह पर व्यवहार होता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:माता-पिता और गुरु के ऋणों से कैसे मुक्त हों? जानिए प्रेमानंद महाराज का जवाब
ये भी पढ़ें:कमाई का कितना हिस्सा दान या धर्म में लगाना चाहिए? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब
ये भी पढ़ें:कुंडली के खराब ग्रह-नक्षत्र से बचने के लिए क्या करें? प्रेमानंद जी महाराज से जान
ये भी पढ़ें:मन में आने वाले गंदे विचारों से छुटकारा कैसे पाएं? प्रेमानंद जी महाराज से जानें

एक भगवान की पूजा
महाराज जी कहते हैं कि भगवान से यदि प्रेम करना है तो भगवान के किसी एक रूप को आप स्वीकार कर लो और उन्हीं का नाम जप करो, उन्हीं का ध्यान करो। उन्हीं की पूजा करो। इसीलिए गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। अर्थात् अनन्य चिंतन की मांग भगवान ने की है।अनन्य माने एक में लग जाना है। एक भरोसो, एक बल और एक आस विश्वास एक राम घनश्याम हे चातक तुलसी दास। जैसे चातक गंगा जी में भी गिरे तो चोंच नहीं मारेगा। प्यासा मर जाएगा। वो पिएगा, तो सिर्फ स्वाति की बूंद को ही पीएगा।

महाराज जी कहते हैं कि ऐसे ही एक भगवान में रति हो जाए राम जी में, श्याम जी में, माता या पिता जी में, जहां भी एक मान लो उनको एक मानकर के पूजा करो, पर प्रारंभ अनेक से होती है। लेकिन धीरे-धीरे एक में रति हो जाती है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!