Kartik Purnima Time Date Kartik Purnima 2025 Muhurat on 5 November Pooja kab kare आज शाम इतने बजे से शुरू कार्तिक पूर्णिमा की पूजा व दान मुहूर्त, जानें लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, उपाय व पूजा की विधि, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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आज शाम इतने बजे से शुरू कार्तिक पूर्णिमा की पूजा व दान मुहूर्त, जानें लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, उपाय व पूजा की विधि

Kartik Purnima Time 2025: उदया तिथि में पूर्णिमा व्रत, पूजा व दान बुधवार को होगा। इस साल की पूर्णिमा और अधिक पुण्यदायी मानी जा रही है। जानें, पूजा का मुहूर्त, भद्रा प्रभाव व समय, पूजा व व्रत विधि, उपाय और चांद निकलने का समय।

Wed, 5 Nov 2025 04:19 PMShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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आज शाम इतने बजे से शुरू कार्तिक पूर्णिमा की पूजा व दान मुहूर्त, जानें लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, उपाय व पूजा की विधि

Kartik Purnima Time Date 2025: इस साल शुभ संयोग में कार्तिक पूर्णिमा पूजा की जाएगी। इस शुभ दिन पर लोग पवित्र स्नान के साथ ही पूजा-पाठ और दान कर पुण्य कमाते हैं। इस साल कार्तिक पूर्णिमा पर भद्रा का साया भी मंडरा रहा है। 4 नवंबर को रात 10 बजकर 37 मिनट से आरंभ होगी और 5 नवंबर को 06:47 पी एम तक रहेगी। उदया तिथि में पूर्णिमा व्रत, पूजा व दान बुधवार को होगा। पंचांग और पंडितों के अनुसार, इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग, हंस राजयोग और शिववास का शुभ संयोग। इस कारण यह पूर्णिमा और अधिक पुण्यदायी मानी जा रही है। इस दिन माता लक्ष्मी और नारायण भगवान विष्णु की पूजा होगी। जानें, पूजा का सुबह से शाम तक का मुहूर्त, भद्रा प्रभाव व समय, पूजा व व्रत विधि, उपाय और चांद निकलने का समय-

इतने बजे से शुरू कार्तिक पूर्णिमा की पूजा व दान मुहूर्त

  1. ब्रह्म मुहूर्त: 04:52 ए एम से 05:44 ए एम
  2. लाभ: उन्नति 06:36 ए एम से 07:58 ए एम
  3. अमृत: सर्वोत्तम 07:58 ए एम से 09:20 ए एम
  4. शुभ: उत्तम 10:42 ए एम से 12:04 पी एम

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  • विजय मुहूर्त: 01:54 पी एम से 02:38 पी एम
  • चर: सामान्य 02:49 पी एम से 04:11 पी एम
  • लाभ: उन्नति 04:11 पी एम से 05:33 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त: 05:33 पी एम से 05:59 पी एम
  • शुभ: उत्तम 07:11 पी एम से 08:49 पी एम
  • अमृत: सर्वोत्तम 08:49 पी एम से 10:27 पी एम
  • चर: सामान्य 10:27 पी एम से 12:05 ए एम, नवम्बर 06
  • अमृत काल: 02:23 ए एम, नवम्बर 06 से 03:47 ए एम, नवम्बर 06

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  • निशिता मुहूर्त: 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, नवम्बर 06
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: 06:34 ए एम, नवम्बर 06 से 06:37 ए एम, नवम्बर 06

भद्रा: 06:36 ए एम से 08:44 ए एम तक रहेगी। इस दिन चंद्रमा मेष राशि में रहेंगे। ऐसे में पृथ्वी पर भद्रा का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ेगा और न ही यह पृथ्वी पर मान्य होगी।

चांद निकलने का समय: 05:11 पी एम

जानें लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

प्रदोषकाल मुहूर्त: 05:15 पी एम से 07:50 पी एम

अवधि - 02 घण्टे 35 मिनट्स

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उपाय

  1. इस दिन विशेष कर ब्रह्ममुहूर्त बेला में गंगा नदी में स्नान-दान करना सबसे पुण्यदायी कर्म है।
  2. पवित्र जल में स्नान कर भगवान को जल अर्पण के बाद दान करने का विधान है। इससे देवता तो प्रसन्न होते ही हैं। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  3. कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपों का दान करना भी बेहद शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
  4. स्नान-दान के बाद घर में गंगाजल का छिड़काव करने से दुख-दरिद्रता दूर होती है।
  5. श्री सत्यनारायण स्वमी की कथा पाठ का श्रवण करना भी फलदायी माना जाता है।
  6. श्री विष्णु चालीसा और श्री लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।
  7. लक्ष्मी माता को शृंगार का समान चढ़ाएं।
  8. धन-समृद्धि के लिए श्री लक्ष्मी सूक्तम का पाठ करें।

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पूजा की विधि

कार्तिक पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं, अगर आप नदी में स्नान नहीं कर सकते तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर घर में ही स्नान करें। कार्तिक पूर्णिमा के दिन पूरे विधि-विधान से लक्ष्मी नारायण की साथ में पूजा करनी चाहिए। इस दिन विष्णु भगवान को पीले रंग के फल, फूल और वस्त्र चढ़ाने चाहिए। मां लक्ष्मी को गुलाबी या लाल रंग के फूल और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण की कथा पढ़ना पुण्यदायक माना जाता है। चंद्रोदय के समय पवित्र जल में कच्चा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।

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कार्तिक पूर्णिमा पर उपवास विधि: इस दिन व्रत रखने की भी परंपरा है। इसके लिए ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान के समय ही व्रत का संकल्प लिया जाता है। अपने आराध्य देव की स्तुति कर भगवान गणेश के साथ भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी, शिव जी, मां पार्वती की पूजा करने के बाद विधि-विधान से कथा सुनने की परंपरा है।

देव दीपवाली: कार्तिक पूर्णिमा पर ही देव दीवाली मनाने की परंपरा है। कहा जाता है कि देव लोक से देवी-देवता पृथ्वी पर दीवाली मनाने गंगा के घाट पर आते हैं। देव दीवाली पर लक्ष्मी नारायण और शिववास का संयोग होने के कारण भगवान शिव की पूजा का भी विधि-विधान है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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