14 करोड़ की डील, 12 लाख की सुपारी और 'मौत' वाली शर्त, मां की ममता पर ऐसे हावी हुआ लालच
Arjun Sharma murder: सबसे चौंकाने वाला था ममता की छांव के पीछे का लालच। चौदह करोड़ के इस खूनी सौदे में जो शहीद की विरासत और एक मां के हाथों बेटे की बलि की दास्तां है। खुलासा हुआ कि 12 लाख रुपये की सुपारी देकर अर्जुन की हत्या कराई गई। पुलिस ने पांच हत्यारोपी गिरफ्तार किए हैं।

Arjun Sharma murder: देहरादून में पुलिस ने शहीद कर्नल के बेटे अर्जुन शर्मा के खूनी ड्रामे से पर्दा हटा दिया। रिश्तों के कत्ल की इस कहानी के तीन आरोपी हाई प्रोफाइल निकले। सबसे चौंकाने वाला था ममता की छांव के पीछे का लालच। चौदह करोड़ के इस खूनी सौदे में जो शहीद की विरासत और एक मां के हाथों बेटे की बलि की दास्तां है। खुलासा हुआ कि 12 लाख रुपये की सुपारी देकर अर्जुन की हत्या कराई गई। पुलिस ने पांच हत्यारोपी गिरफ्तार किए हैं।
गैस ऐजेंसी की कमाई बनी क्लेश की वजह
बेटे की हत्या का बीज दो दशक पहले तब उगता है जब एक शहीद कर्नल की याद में मिली गैस एजेंसी की कमाई मां-बेटे के बीच क्लेश बन जाती है। अर्जुन को मां बीना शर्मा का अपने नजदीकी विनोद उनियाल पर मेहरबानी करना बिल्कुल पसंद नहीं था। बेटा मानता था कि मां सालों तक शहीद पिता की कमाई का बड़ा हिस्सा चुपचाप विनोद के खातों में भरती रही। अर्जुन ने होश संभालने के बाद अपनी विरासत का हिसाब मांगा, तो उसे अहसास हुआ कि उसकी मां घर की तिजोरी किसी और के लिए खाली कर रही है। यहीं से नफरत की पहली दीवार खड़ी हुई।
शूटरों ने मांगे थे 15 लाख , 12 में तय हुआ सौदा
शूटर पंकज ने खुलासा किया कि वह कई महीने से हत्याकांड के मुख्य मास्टरमाइंड विनोद उनियाल के यहां ड्राइवरी का काम कर रहा था। विनोद अर्जुन से आ रही परेशानियों का जिक्र ड्राइवर के सामने किया करते थे। सामने आया कि अर्जुन को रास्ते से हटाने को शूटरों ने 15 रुपये लाख की मांग की थी। सौदा 12 लाख में तय हुआ। साजिशकर्ताओं ने हत्यारों को तीन लाख रुपये बतौर एडवांस दिए थे और बाकी रकम काम पूरा होने के बाद मिलनी थी।
सौतेले पिता की हत्या में जेल जा चुका है राजीव
अर्जुन हत्याकांड को अंजाम देने वाला शूटर राजीव उर्फ राजू कोई नौसिखिया अपराधी नहीं है। राजीव ने अपराध की दुनिया में करीब तीन दशक पहले कदम रखा था। साल 1997 में क्लेमनटाउन क्षेत्र में अपने सौतेले पिता की हत्या में जेल गया। हालांकि, बाद में साक्ष्य के अभाव में वह बरी हो गया। वारदात के दौरान राजीव ने ही अर्जुन को गोली मारी, उसकी बड़ा भाई पंकज स्कूटर चला रहा था।
14 करोड़ की डील और वो 'मौत' वाली शर्त
विवाद की आग तब भड़की जब विनोद के इशारे पर बीना ने जीएमएस रोड की करोड़ों की जमीन डॉ. अजय खन्ना को बेच दी। अर्जुन को इस सौदे की भनक लगी तो उसने रोड़ा अटका दिया। जमीन पर चार करोड़ का कर्ज था। बीना ने गुपचुप तरीके से डॉ. खन्ना से पैसे लेकर लोन चुकाया और 14 करोड़ में रजिस्ट्री कर डाली। हैरत की बात यह थी कि इस रकम में से आठ करोड़ रुपये अगले ही दिन बीना ने विनोद उनियाल के खाते में सरका दिए।
सौदे में एक खतरनाक शर्त थी कि अगर कब्जा नहीं मिला, तो डॉ. खन्ना को दोगुनी रकम लौटानी होगी। अर्जुन ने कोर्ट से स्टे ले लिया। अब न कब्जा मिल सकता था, न पैसे वापस थे। साजिशकर्ता 28 करोड़ के भारी-भरकम बोझ के नीचे दबने लगे। जब अर्जुन ने स्टे हटाने और पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, तो मां की ममता पर लालच हावी हो गया। बीना, विनोद और डॉ. खन्ना ने मिलकर एक खौफनाक फैसला लिया अर्जुन के अंत का।
विनोद ने वफादार ड्राइवर पंकज को शूटर बनाया
हत्याकांड के 24 घंटे के भीतर पुलिस ने दो मुठभेड़ों में शूटर पंकज राणा और उसके भाई राजीव को गिरफ्तार किया। विनोद ने अपने सबसे वफादार पंकज को साये की तरह अर्जुन के पीछे लगा दिया। अंत के लिए परेड ग्राउंड का टेनिस कोर्ट चुना गया, जहां भीड़भाड़ के बीच से भागना आसान था। तिब्बती मार्केट के बाहर बुधवार को दिनदहाड़े अर्जुन की गोली मार हत्या कर दी गई।
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