यूपी में क्यों उठी 70 लाख उपभोक्ताओं के बिजली मीटर बदलने की मांग ? नियामक आयोग पहुंचा मामला
याचिका में उपभोक्ता परिषद प्रीपेड किए गए 70 लाख से ज्यादा बिजली मीटरों को तत्काल पोस्टपेड में बदलने की मांग की है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग से मांग की है कि वह इस संबंध में तत्काल बिजली कंपनियों और पावर कॉरपोरेशन को आदेश जारी करे।

UP Electricity News: उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के मीटर पोस्टपेड से जबरन प्रीपेड किए गए मीटरों का मामला नियामक आयोग पहुंच गया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग में लोकमहत्व प्रस्ताव दाखिल किया है। सूत्र बताते हैं कि उधर पावर कॉरपोरेशन में मीटरों को प्रीपेड किए जाने और प्रीपेड मोड में ही नया कनेक्शन दिए जाने के आदेश को वापस लेने की तैयारी कर रहा है।
याचिका में उपभोक्ता परिषद प्रीपेड किए गए 70 लाख से ज्यादा मीटरों को तत्काल पोस्टपेड में बदलने की मांग की है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग से मांग की है कि वह इस संबंध में तत्काल बिजली कंपनियों और पावर कॉरपोरेशन को आदेश जारी करे। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा नई अधिसूचना जारी किए जाने के आठ दिन बाद भी प्रीपेड मोड में ही नए कनेक्शन देना केंद्र सरकार के आदेशों की स्पष्ट अवहेलना है।
उन्होंने कहा कि अगर समय रहते आयोग ने बिजली कंपनियों को स्पष्ट निर्देश नहीं दिए तो उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी झेलनी होगी और वे केंद्र द्वारा दिए गए आदेशों का लाभ पाने से वंचित रह जाएंगे। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर का बयान आने के बाद से ही उपभोक्ता बिजली केंद्रों पर पहुंच कर मीटर पोस्टपेड कराने की दरख्वास्त दे रहे हैं। सिलसिला जारी है।
अवमानना नोटिस पर मांगा जवाब
नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन और केस्को से अवमानना नोटिस पर भी सात दिनों में जवाब मांगा है। कानपुर में टैरिफ पर सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद ने विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) का उल्लंघन करने पर अवमानना याचिका दाखिल की थी। इसी धारा के तहत ही उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का विकल्प दिया गया है। हाल ही में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी इस धारा पर स्पष्ट किया था। इसके अलावा सीईए ने नई अधिसूचना में स्मार्ट मीटरों के प्रीपेड होने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है।




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