यूपी पिछड़ा आयोग के चेयरमैन बने राम औतार सिंह, कमीशन में दो-दो रिटायर्ड ADJ और IAS भी सदस्य
UP OBC Commission: उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति राम औतार सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया है। कमीशन में दो-दो रिटायर्ड एडीजे और आईएएस अफसर भी रखे गए हैं।

UP OBC Commission: उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति राम औतार सिंह को पंचायत चुनाव में आरक्षण के निर्धारण के मकसद से गठित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाया है। कमीशन में चेयरमैन राम औतार सिंह के अलावा रिटायर्ड दो एडीजे और दो आईएएस अफसर भी सदस्य रखे गए हैं। रिटायर्ड अपर जिला जज में बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, जबकि रिटायर्ड आईएएस अफसर में अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह शामिल हैं। सरकार ने आयोग को छह महीने का कार्यकाल दिया है, जिसकी सिफारिश के आधार पर राज्य में पंचायत चुनावों का रास्ता खुलेगा। यूपी में पंचायत चुनाव अब विलंबित हो चुकी है।
बता दें कि 18 मई को हुई योगी कैबिनेट की बैठक में पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर जरूरी ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी दी गई थी। इसके साथ ही पंचायत चुनाव के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा और कानूनी अड़चन दूर हो गई। यूपी पंचायत चुनाव में पहले ही देर हो गई है। पिछली बार यानी 2021 में हुए चुनाव में 2 मई को नजीते आ गए थे। अब समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनने के बाद चुनावी तैयारियों में तेजी आने की संभावना है। आयोग की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही सीटों के आरक्षण का रोटेशन तय किया जाएगा जिससे सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले की वैधानिक बाध्यता पूरी हो जाएगी। योगी कैबिनेट के फैसले के अनुसार बुधवार को रामऔतार सिंह की अगुवाई में पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया गया।
तीन महीने में रिपोर्ट देगा आयोग
समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का मुख्यालय लखनऊ में होगा। आयोग के गठन की अधिसूचना मंगलवार को जारी की गई थी। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि आयोग तीन महीने या राज्य सरकार द्वारा तय की गई तारीख तक रिपोर्ट देगा। राज्य सरकार यह अवधि बढ़ा भी सकती है।
26 को खत्म हो रहा प्रधानों का कार्यकाल, 10 जून को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट
उत्तर प्रदेश में 26 मई 2026 को ग्राम पंचायत प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म होगा। फाइनल वोट लिस्ट राज्य निर्वाचन आयोग 10 जून को जारी करने वाला है। हालांकि इससे पहले निर्वाचन आयोग अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख पांच बार बढ़ा चुका है। फिर भी यदि वह इस निर्धारित तारीख पर फाइनल वोटर लिस्ट जारी भी कर देगा तो भी प्रशासक या प्रशासक समिति को पंचायतों की बागडोर सौंपनी होगी। पंचायती राज विभाग की ओर से शासन को प्रशासक समिति या पंचायत प्रतिनिधियों को ही प्रशासक बनाने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायतों में भी प्रशासक बैठाना या फिर निर्वाचित प्रतिनिधियों का ही कार्यकाल बढ़ाना होगा।




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