UP Panchayat Elections: OBC Commission formation Notification issued, will submit report on reservation in 3 months यूपी पंचायत चुनाव: ओबीसी आयोग के गठन की अधिसूचना जारी, 3 महीने में देगा आरक्षण पर रिपोर्ट, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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यूपी पंचायत चुनाव: ओबीसी आयोग के गठन की अधिसूचना जारी, 3 महीने में देगा आरक्षण पर रिपोर्ट

UP Panchayat Elections:  उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना मंगलवार को जारी कर दी गई।

Tue, 19 May 2026 09:10 PMDeep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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यूपी पंचायत चुनाव: ओबीसी आयोग के गठन की अधिसूचना जारी, 3 महीने में देगा आरक्षण पर रिपोर्ट

UP Panchayat Elections: यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना मंगलवार को जारी कर दी गई। अधिसूचना के मुताबिक आयोग तीन महीने या राज्य सरकार द्वारा तय की गई तारीख तक रिपोर्ट देगा। राज्य सरकार यह अवधि बढ़ा भी सकती है। आयोग का मुख्यालय लखनऊ में होगा।

पंचायती राज विभाग की ओर से समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के लिए जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, पांच सदस्यीय आयोग होगा। इसमें पिछड़ा वर्ग से संबंधित मामलों की जानकारी रखने वाले व्यक्ति शामिल किए जाएंगे। पांच सदस्यों में ही एक अध्यक्ष होगा जो कि उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश होगा। आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों का कार्यकाल छह माह का होगा।

अध्यक्ष व सदस्य को पद से हटाया जा सकेगा, अगर सरकार को यह लगता है कि उसका पद पर बने रहना लोकहित में नहीं है। वहीं आयोग में इन सदस्यों के अलावा सचिव, उप सचिव, शोध अधिकारी, समीक्षा अधिकारी, कार्यालय सहायक व अन्य कर्मचारी भी होंगे। यह अन्य विभागों से प्रतिनियुक्ति पर आयोग में लिए जाएंगे। यही नहीं सेवानिवृत्त अधिकारियों व कर्मियों की सेवाएं संविदा पर ली जा सकेंगी। आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों व कर्मचारियों को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा-2 (28) के अधीन लोक सेवक समझा जाएगा।

10 जून को आएगी अंतिम मतदाता सूची

आपको बता दें कि यूपी में 26 मई को ग्राम पंचायत प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग 10 जून को अंतिम मतदाता सूची जारी करेगा। हलांकि इससे पहले पांच बार वह अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख बढ़ा चुका है। फिर भी अगर वह इस निर्धारित तारीख को अंतिम मतदाता सूची जारी भी कर देगा तो भी प्रशासक या प्रशासक समिति को पंचायतों की बागडोर देनी होगी। पंचायती राज विभाग की ओर से शासन को प्रशासक समिति यानी पंचायत प्रतिनिधियों को ही प्रशासक बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई व क्षेत्र पंचायत प्रमुखों का 19 जुलाई को खत्म होगा। यहां भी प्रशासक बैठाना या फिर इन निर्वाचित प्रतिनिधियों का ही कार्यकाल बढ़ाना होगा।

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ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल प्रशासक समिति के माध्यम से बढ़ा कर भाजपा सरकार उनकी हमदर्दी हासिल करने का प्रयास कर सकती है। जो आगे विधानसभा चुनाव में उसके काम आ सकती है। वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव रैपिड सर्वे से हुआ था और वर्ष 2015 के ओबीसी आंकड़े भी रखे गए थे। क्योंकि उत्तराखंड, मध्य प्रदेश व राजस्थान की तर्ज पर यूपी में भी पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है।फिलहाल, सत्तापक्ष ही नहीं विपक्षी दल भी पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने को लेकर शांत हैं। ऐसे में ज्यादा उम्मीदें विधानसभा चुनाव के बाद हों। मामला न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में वहां से जो दिशा-निर्देश मिलेंगे उसका सरकार पालन करेगी।

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