लखनऊ का सबसे बड़ा जिम और रियल एस्टेट का बड़ा बिजनेस; पीछे क्या-क्या छोड़ गए प्रतीक यादव?
मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव राजनीति से दूर रहकर लखनऊ के रियल एस्टेट और फिटनेस इंडस्ट्री के बड़े नाम बन गए थे। लखनऊ का सबसे बड़ा जिम चलाने वाले प्रतीक ने फिटनेस मैगजीन के कवर तक का सफर तय किया।

उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा नाम मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया। प्रतीक के जाने से न केवल यादव परिवार शोक में है, बल्कि लखनऊ के व्यावसायिक हलकों में भी सन्नाटा पसर गया है। जहां मुलायम सिंह का बेटा होने के नाते उनके लिए राजनीति का रास्ता सबसे आसान था, वहीं प्रतीक ने सत्ता की चकाचौंध से दूरी बनाकर अपनी मेहनत से 'व्यावसायिक साम्राज्य' खड़ा किया। लखनऊ में सबसे बड़ा जिम बनाया और रियल इस्टेट के कारोबार में भी खुद को मजबूत किया।
यूपी का पहला ऐसा जिम बनाया, जहां एंड्रॉयड कॉर्डियोवैस्कुलर मशीनें
प्रतीक यादव को फिटनेस का जुनून तो था ही, उनका जिम एक सफल व्यावसायिक उपक्रम था जिसने लखनऊ में पहली बार फिटनेस को लग्जरी परिभाषा दी। गोमती नगर में मिठाईवाला चौराहे के पास स्थित जिम आयरन कोर फिट को वह अपने इंस्टाग्राम हैंडल से भी प्रमोट करते थे। इस जिम में इटली के प्रसिद्ध ब्रांड पेनाट्टा और अमेरिकी लाइफ फिटनेस के अत्याधुनिक उपकरण लगे हैं।
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स से एमबीए करने के बाद उन्होंने व्यावसायिक प्रबंधन का उपयोग अपने रियल एस्टेट और फिटनेस ब्रांड्स को स्थापित करने में किया। उनके घर के बाहर शोकाकुल जान पहचान वालों ने बताया कि प्रतीक का यूपी में पहला ऐसा जिम था जहां एंड्रॉयड आधारित कार्डियो वैस्कुलर एक्सरसाइज मशीनें हैं। करीब 10 हजार वर्गफुट में फैले इस जिम में एक समय 150 से 200 लोग वर्कआउट कर सकते हैं।
एंड्रॉयड आधारित कार्डियोवैस्कुलर जिम मशीनें फिटनेस उद्योग में अभी नई आई हैं। ये मशीनें टचस्क्रीन, इंटरनेट कनेक्टिविटी और मनोरंजन सुविधाओं के साथ वर्कआउट को इंटरैक्टिव बनाती हैं। कैलोरी बर्न करने के साथ हृदय स्वास्थ्य में सुधार के लिए रीयल टाइम विस्तृत डेटा विश्लेषण भी प्रदान करती हैं। इसके अलावा ‘द फिटनेस प्लेनेट’ ब्रांड के भी प्रतीक मालिक थे और अन्य जिम के लिए कंसल्टेंसी सेवाएं प्रदान करते थे।
गोमती नगर विस्तार से सरोजनीनगर तक रियल एस्टेट कारोबार
प्रतीक एक बड़े रियल एस्टेट कारोबारी भी थे। उनके इस कारोबार का केन्द्र शहीद पथ और सुलतानपुर रोड की कॉमर्शियल बेल्ट पर था। उन्होंने अपना दफ्तर फन सिनेमा के पास बनाया था, जहां पूरा समय दे रहे थे। प्रतीक ने कई जगह लैंड बैंक बनाकर उन्हें कॉमर्शियल शोरूम और रिटेल आउटलेट्स के लिए लीज पर दिया हुआ है। उनकी कंपनी प्रतीक एडुविज का कुछ कारोबार और भी स्थानों पर बताया जा रहा है। यह कंपनी बड़े भूखंडों को खरीदकर उनको व्यावसायिक या आवासीय उपयोग के लिए विकसित करती रही है।
सूत्रों के अनुसार गोमती नगर विस्तार और सरोजनी नगर क्षेत्र में उनके पास करोड़ों की व्यावसायिक भूमि है। पहले की कई कंपनियों में उनकी दिवंगत मां साधना गुप्ता की हिस्सेदारी है। कुछ में पत्नी अपर्णा यादव की हिस्सेदारी है। पत्नी अपर्णा के 2017 में प्रत्याशी के रूप में दाखिल हलफनामे के अनुसार प्रतीक का शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में भी अच्छा-खासा निवेश था। वर्ष 2015-16 के रिटर्न के अनुसार, प्रतीक की सालाना आय करीब ₹1.47 करोड़ थी। उनकी और उनकी पत्नी की कुल सम्पत्तियां 23 करोड़ रुपये थीं।
11वीं में ही 100 किलो से ज्यादा वजन
11वीं में पढ़ने के दौरान ही 100 किलो से अधिक वजन के बाद भी प्रतीक ने अपनी फिटनेस यात्रा से सबको चौंका दिया था। उन्होंने न केवल वजन घटाया, बल्कि एक 'आयरन मैन' जैसी काया हासिल की। उनकी फिटनेस का लोहा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी माना गया और उनका सफर 'इंटरनेशनल फिटनेस मैगजीन' के कवर पेज तक पहुंचा। फिटनेस इंडस्ट्री में उनका बहुत बड़ा निवेश और प्रभाव था।
रियल एस्टेट और 'प्रतीक एडुविज' का सफर
प्रतीक की व्यावसायिक सूझबूझ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने विरासत में मिली संपत्ति को अपने टैलेंट से कई गुना बढ़ाया। लखनऊ के रियल एस्टेट मार्केट में उनका बड़ा नाम था। वे 'प्रतीक एडुविज' (Prateek Eduwiz) जैसी कंपनियों के जरिए कॉर्पोरेट जगत में सक्रिय थे। उनकी नेटवर्थ और व्यावसायिक पोर्टफोलियो में कई प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट्स शामिल थे। उन्होंने कभी भी अपने काम के लिए राजनीतिक प्रभाव का सहारा नहीं लिया, बल्कि अपनी व्यावसायिक योग्यता से अलग मुकाम हासिल किया।
बेजुबानों के मसीहा, गायों और आवारा पशुओं के लिए समर्पित रहा जीवन
बेजुबान जानवरों, खासकर गायों और आवारा पशुओं के प्रति प्रतीक यादव का लगाव दिखावे तक सीमित नहीं था। उन्होंने वर्षों तक जमीन पर उतरकर उनके लिए काम किया। नगर निगम के अमौसी स्थित कान्हा उपवन गौशाला में उनके प्रयासों की छाप आज भी दिखाई देती है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार प्रतीक जानवरों से बेहद प्रेम करते थे और उनके लिए लगातार सक्रिय रहते थे।
प्रतीक ने कान्हा उपवन गौशाला में गायों के लिए पहली बार कूलर और पंखे लगवाए। गौशाला में हरे चारे की नियमित व्यवस्था भी उन्होंने सुनिश्चित कराई थी। वह अक्सर खुद गौशाला पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेते थे और कर्मचारियों से फीडबैक लेते थे।
2013 से 2017 तक संस्था ने संभाली थी जिम्मेदारी
नगर निगम की कान्हा उपवन गौशाला का संचालन 2013 से जुलाई 2017 तक प्रतीक की संस्था जीव आश्रय के पास रहा। इस दौरान गौशाला में कई बदलाव हुए। पशुओं के इलाज की सुविधाओं को मजबूत किया और आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए गए। यहां एक्स-रे मशीन और सिटी स्कैन मशीन तक लगवाई गई, जिससे घायल और बीमार पशुओं का बेहतर उपचार संभव हो सका।
गोमती नगर में बनवाया पशु चिकित्सालय
प्रतीक ने गोमती नगर में बेजुबान जानवरों के लिए पशु चिकित्सालय भी बनवाया। यहां गाय, कुत्ते समेत अन्य जानवरों का इलाज होता था। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि वह जानवरों की तकलीफ को लेकर बेहद संवेदनशील थे और हर संभव मदद के लिए आगे रहते थे।
सत्ता बदलने के बाद भी नहीं रुके कदम
2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उनकी संस्था से कान्हा उपवन गौशाला के संचालन का कार्य वापस ले लिया गया। इसके बावजूद उन्होंने जानवरों के लिए काम करना नहीं छोड़ा। आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुए प्रदर्शनों में भी वह सक्रिय रूप से शामिल रहे।




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