Notice to UPPCL in electricity smart prepaid meter case, why not impose a fine of Rs 1 lakh each? स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले में UPPCL को नोटिस, क्यों न एक-एक लाख रुपए जुर्माना लगाया जाए?, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले में UPPCL को नोटिस, क्यों न एक-एक लाख रुपए जुर्माना लगाया जाए?

यूपी में विद्युत नियामक आयोग ने उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन को नोटिस जारी किया है। आयोग ने कहा है कि क्यों न पावर कारपोरेशन के खिलाफ मार्च से अप्रैल तक अलग-अलग तिथि में स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस के उल्लंघन को लेकर प्रत्येक मामले में एक-एक लाख रुपए जुर्माना लगाया जाए।

Thu, 23 April 2026 08:41 PMDeep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले में UPPCL को नोटिस, क्यों न एक-एक लाख रुपए जुर्माना लगाया जाए?

UP News: विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश में मार्च से अप्रैल के बीच प्रीपेड उपभोक्ताओं के रीचार्ज के बाद भी बिजली दो घंटे में न जोड़े जाने के मामलों को लेकर कड़ा एतराज जताया है। आयोग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन को नोटिस जारी किया है। कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक से 15 दिन में जवाब मांगा है। आयोग ने कहा है कि क्यों न पावर कारपोरेशन के खिलाफ मार्च से अप्रैल तक अलग-अलग तिथि में स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस के उल्लंघन को लेकर प्रत्येक मामले में एक-एक लाख रुपए जुर्माना लगाया जाए।

पावर कारपोरेशन ने 17 अप्रैल को जो जवाब विद्युत नियामक आयोग में दाखिल किया था, उसमें स्वीकार किया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति पुन: बहाल करने के मामले में तय मानकों का पालन नहीं हुआ। प्रदेश में 193143 विद्युत उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मोड में रिचार्ज किए जाने के बावजूद भी दो घंटे से ज्यादा समय व्यतीत हो जाने पर नहीं जुड़े। दरअसल, इसे लेकर उपभोक्ता परिषद की तरफ से आयोग में लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल किया गया था।

16 में से 10 दिन मिला नियमों का उल्लंघन

कारपोरेशन के जवाब पर नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार व सदस्य संजय कुमार सिंह के निर्देश पर आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। कहा है कि प्रत्येक मामले में एक लाख रुपये की पेनल्टी विद्युत अधिनियम 2003 की धारा-142 के तहत क्यों ना लगा दी जाए। कारपोरेशन के निदेशक कमर्शियल की तरफ से दाखिल जवाब में 16 दिन के 2 घंटे के अंदर और 2 घंटे के बाद प्रीपेड मीटर के मामले में पूरी रिपोर्ट दाखिल की गई थी, जिसमें 10 दिन के मामले में उल्लंघन पाया गया। स्टैंडर्ड्स ऑफ परफॉर्मेंस विनियम-2019 के अनुसार रिचार्ज या भुगतान के दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल करना अनिवार्य है और यह कार्य कम से कम 95 फीसदी मामलों में होना चाहिए। हालांकि, आयोग द्वारा समीक्षा किए गए आंकड़ों से पता चला है कि कई दिनों में यह प्रतिशत 77 प्रतिशत तक गिर गया, जो निर्धारित सीमा से काफी कम है। विशेष रूप से 13, 14, 16, 17, 18, 23, 25 और 28 मार्च तथा 2 और 7 अप्रैल 2026 को नियमों का उल्लंघन पाया गया।

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70 लाख प्रीपेड मीटरों पर जल्द निर्णय ले आयोग: अवधेश

वही उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने गुरुवार को फिर नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार व सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर भारत सरकार की सूचना के खिलाफ उत्तर प्रदेश में अभी भी नए कनेक्शन पर प्रीपेड मीटर अनिवार्य किए जाने का मामला उठाया। पूर्व में बिना उपभोक्ताओं की सहमत से जो 70 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर प्रीपेड मोड में लगाए गए उसे अभी तक पोस्टपेड में ना कन्वर्ट करने के संबंध में उपभोक्ता परिषद के पूर्व में दाखिल लोकमहत्व प्रस्ताव पर अभिलंब निर्णय लेने की मांग उठाई।

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