यूपी किडनी कांड में नया खुलासा, वेस्ट यूपी के इस अस्पताल में हुए थे 20 से अधिक ट्रांसप्लांट
वेस्ट यूपी के इस अस्पताल में अवैध तरीके से 20 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट किए गए थे। कानपुर की जेल में पुलिस पूछताछ के दौरान ओटी टेक्निशियन रोहित ने इसका खुलासा किया। ओटी टेक्निशियन रोहित ने बताया कि 2022-23 के दौरान मेरठ के अल्फा अस्पताल में यह ट्रांसप्लांट किए गए थे।

UP News: उत्तर प्रदेश किडनी कांड में नया खुलासा हुआ है। पता चला है कि वेस्ट यूपी के मेरठ के अल्फा अस्पताल में अवैध तरीके से 20 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट किए गए थे। यह जानकारी कानपुर की जेल में पुलिस पूछताछ के दौरान ओटी टेक्निशियन रोहित ने दी। ओटी टेक्निशियन रोहित ने बताया कि 2022-23 के दौरान मेरठ के अल्फा अस्पताल में यह ट्रांसप्लांट किए गए थे।
अल्फा अस्पताल के मालिक फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. अमित, उसके दोस्त डॉ. वैभव मुद्गल और डॉ. अफजाल फरार हैं। तीनों की तलाश में कानपुर पुलिस मेरठ, नोएडा और लखनऊ में छापेमारी कर रही है। बताया जा रहा है कि आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं। केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल और मेडिलाइफ हॉस्पिटल में भी अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए गए थे। इस मामले में अब तक डॉ. सुरजीत आहूजा, डॉ. प्रीति आहूजा, शिवम अग्रवाल, राजेश कुमार, नरेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह राघव, नरेंद्र तोमर, रोहित तिवारी, परवेज सैफी, राम प्रकाश कुशवाहा और मुदस्सर अली को जेल भेजा जा चुका है। अली ने कोर्ट में सरेंडर किया था। डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी ने बताया कि रोहित से पूछताछ में मेरठ के अल्फा अस्पताल में ट्रांसप्लांट होने की अहम जानकारी मिली है। फिलहाल डॉ. अमित, वैभव और अफजाल फरार है।
मुदस्सर अली को रिमांड पर लेगी पुलिस
किडनी कांड में और बड़े खुलासे के लिए पुलिस अब सरेंडर करने वाले मुदस्सर अली से जेल में पूछताछ की तैयारी कर रही है। अनुमति मांगी जा रही है। आरोपियों को रिमांड पर लेकर आमना-सामना भी कराया जाएगा। डॉ. अफजाल को पकड़ने पुलिस ने उसके करीबियों पर नजर रखते हुए जाल बिछा रखा है। फरारी के दौरान रोहित करीबी हरदोई के बिलग्राम निवासी शिवम यादव के रिश्तेदार के घर उन्नाव में छिपा था। पुलिस शिवम के रिश्तेदारों की जानकारी जुटा रही है। बताया जा रहा है कि किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान शिवम भी सहयोग करता था।
करीबियों की तलाश तेज हुई
पुलिस को अभी तक रोहित का मोबाइल फोन नहीं मिल सका है। रोहित ने बताया कि उसने अपना मोबाइल गंगा बैराज में फेंक दिया था, लेकिन काफी तलाश के बावजूद उसे बरामद नहीं किया जा सका। मोबाइल न मिलने के कारण कई अहम जानकारियां सामने नहीं आ पा रही हैं। पुलिस के अनुसार रोहित की जड़ें पूरे गिरोह में काफी गहरी हैं और वह अभी पूरी तरह से खुलकर जानकारी नहीं दे रहा है। यही वजह है कि मामले के कई पहलू अब भी सामने नहीं आ सके हैं। फिलहाल पुलिस गिरोह से जुड़े लोगों और आरोपियों के करीबियों की तलाश में जुटी है।




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