कानपुर किडनी कांड: सात ट्रांसप्लांट में दो लोगों की जा चुकी जान, आरोपी अब भी फरार
यूपी के कानपुर में हुए सात किडनी ट्रांसप्लांट में एक नहीं दो किडनी रिसीवरों की मौत हो चुकी है। किडनी जैसी बड़ी सर्जरी झोलाझापों की टीम करती थी। यह बात पुलिस की जांच में साफ हो गई है। ऑपरेशन के दौरान लोगों की मौत की जानकारी पुलिस को मिली है।

यूपी के कानपुर में हुए सात किडनी ट्रांसप्लांट में एक नहीं दो किडनी रिसीवरों की मौत हो चुकी है। किडनी जैसी बड़ी सर्जरी झोलाझापों की टीम करती थी। यह बात पुलिस की जांच में साफ हो गई है। ऑपरेशन के दौरान लोगों की मौत की जानकारी पुलिस को मिली है। मेडीलाइफ अस्पताल से घर भेजी गई एक महिला और नेपाल के एक युवक की मौत की जानकारी पुलिस को मिली है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि मामले में जांच चल रही है। मेडीलाइफ अस्पताल में किस महिला की मौत हुई इसका पता पुलिस लगा रही है। वहीं नेपाल के एक पुरुष मरीज की मौत की बात भी सामने आयी है।
नेपाल वाले डोनर का मोबाइल नंबर पुलिस को मिला है हालांकि उसने फोन बंद कर लिया है। तब से फोन नहीं खोला है। डोनर लिंगु नाम का व्यक्ति बताया जा रहा है जबकि रेसीपेंट का नाम पता लगाने में पुलिस जुटी है। वहीं इस किडनी कांड के तार मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा से तो जुड़े ही हैं अब यह आंच दिल्ली तक पहुंच गई है। दिल्ली के कई नामी अस्पताल ग्रुपों से भी जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि जितना बड़ा यह रैकेट है उतना ही अधिक दबाव कमिश्नरेट पुलिस पर है। जिसके चलते अब पुलिस ने किडनी ट्रांसप्लांट का ऑपरेशन करने वाले अली और अफजल की खोजबीन तक ही अपने को सीमित कर लिया है। आरोपियों की तलाश में एक टीम दिल्ली में थी जो बुधवार की सुबह कानपुर वापस आ गई।
रावतपुर के केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल में 29 मार्च को रोहित और उसकी टीम ने किडनी ट्रांसप्लांट का ऑपरेशन किया। बिहार के बेगूसराय निवासी एमबीए छात्र आयुष कुमार की किडनी मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर को लगाई गई। ऑपरेशन के दूसरे दिन पारुल को प्रिया हास्पिटल के आईसीयू जबकि आयुष को मेडलाइफ अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने इस मामले में किडनी कांड के मास्टरमाइंड रोहित तिवारी के साथ आहूजा अस्पताल की संचालक डॉ. प्रीति आहूजा, पति सुरजीत सिंह आहूजा, एजेंट शिवम अग्रवाल, मेडलाइफ अस्पताल के मालिक राजेश कुमार व राम प्रकाश कुशवाहा, प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह, गाजियाबाद के एक अस्पताल में ओटी मैनेजर राजेश कुमार व ओटी संचालक कुलदीप सिंह राघव और डॉ. अफजल के ड्राइवर परवेज सैफी को जेल भेजा था।
खेल के दो अहम खिलाड़ी मोबाइल बंद कर फरार
इस खेल के दो अहम खिलाड़ी डॉ. अफजल और मुद्स्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली मोबाइल बंद करके फरार हैं। इनकी तलाश में एक टीम दिल्ली गई जो वापस आ गई है। दरअसल विभागीय सूत्र बताते हैं कि किडनी कांड के तार दिल्ली और नोएडा में स्थित नामी अस्पतालों से जुड़ रहे हैं। जिसके चलते कानपुर से लेकर दिल्ली तक डॉक्टरों में भी खलबली मची है। जिसके चलते कमिश्नरेट पुलिस पर भी काफी दबाव है। पुलिस की ढीली पड़ती कार्रवाई से साफ है कि वह भी कहीं न कहीं इस दबाव के प्रभाव में है। बहरहाल डीसीपी एसएम कासिम आबिदी बताते हैं फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। रिश्तेदारों और परिचितों के यहां दबिश दी जा रही है। जल्द ही दोनों पुलिस की गिरफ्त में होंगे।




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