Marriage is not a license to exploit anyone, Allahabad High Court also imposed a fine of Rs 15 lakh शादी किसी का शोषण करने का लाइसेंस नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 15 लाख हर्जाना भी लगाया, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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शादी किसी का शोषण करने का लाइसेंस नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 15 लाख हर्जाना भी लगाया

हाईकोर्ट ने वैवाहिक शोषण के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पति की याचिका खारिज कर दी। उस पर 15 लाख रुपए का हर्जाना भी लगाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाह किसी का शोषण करने का लाइसेंस नहीं है।

Thu, 23 April 2026 09:23 PMDeep Pandey ​प्रयागराज, विधि संवाददाता
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शादी किसी का शोषण करने का लाइसेंस नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 15 लाख हर्जाना भी लगाया

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग और वैवाहिक शोषण के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पति की याचिका को न केवल खारिज कर दिया, बल्कि उस पर 15 लाख रुपये का हर्जाना भी लगाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाह किसी का शोषण करने का लाइसेंस नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह हर्जाना न केवल पीड़ित पत्नी को राहत देने के लिए है, बल्कि उन लोगों के लिए एक सबक भी है जो झूठे आधारों पर न्यायालयों का समय बर्बाद करते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने रंजीत सिंह की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है।

याची ​रंजीत सिंह ने याचिका दाखिल कर इटावा फैमिली कोर्ट में लंबित अपने भरण-पोषण के मामले को जल्द निपटाने की मांग की थी। उसने दावा किया था कि वह एक बेरोजगार युवा है और उसके पास आय का कोई साधन नहीं है जबकि उसकी पत्नी इलाहाबाद हाईकोर्ट में अतिरिक्त निजी सचिव के पद पर कार्यरत है। पत्नी ने कोर्ट को बताया कि पति ने उसे झांसा देकर उसके वेतन खाते से साढ़े 11 लाख और 13.56 लाख रुपये के दो व्यक्तिगत ऋण लिए। उसने इन पैसों का उपयोग विलासिता और शराब पर किया तथा पत्नी अब भी 26,020 रुपये की मासिक ईएमआई भर रही है।

​सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पति ने न्यायालय से कई महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए थे। पति पहले से ही एक अन्य मामले में पत्नी से पांच हजार रुपये प्रति माह का अंतरिम भरण-पोषण प्राप्त कर रहा था, जिसकी जानकारी उसने इस याचिका में नहीं दी। ​कोर्ट ने कहा कि पति पेशेवर वकील है और शारीरिक रूप से स्वस्थ है। कानून के अनुसार स्वस्थ और शिक्षित पति अपनी पत्नी पर पूरी तरह निर्भर होकर गुजारा भत्ता नहीं मांग सकता। ​कोर्ट ने अपने 30 पन्नों के आदेश में पति के आचरण को निंदनीय बताते हुए कहा कि ​पति एक धोखेबाज और झूठा व्यक्ति प्रतीत होता है जो विलासितापूर्ण जीवन जीने के लिए पत्नी की मेहनत की कमाई पर नजर गड़ाए हुए है।

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बीएनएसएस की धारा 144 के तहत ऐसा पति अपनी पत्नी से भरण-पोषण पाने का कानूनी हकदार नहीं है। कोर्ट ने पति पर 15 लाख रुपये का हर्जाना लगाते हुए उसे आदेश दिया कि वह छह सप्ताह के भीतर पत्नी को हर्जाने की रकम का भुगतान करे। यदि पति यह राशि नहीं चुकाता है, तो इटावा के जिला मजिस्ट्रेट को उसकी संपत्ति से भू-राजस्व के बकाया के रूप में इसे वसूलने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने हर्जाने की वसूली तक पति की किसी भी संपत्ति के हस्तांतरण या बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है। साथ ही फैमिली कोर्ट प्रयागराज को याची पति द्वारा झूठा हलफनामा दाखिल करने के लिए उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही शुरू करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पत्नी की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य की सुनवाई बंद कमरे में करने का भी आदेश दिया है।

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