यूपी के विश्वविद्यालयों में होने जा रहा बड़ा बदलाव, राज्यपाल सचिवालय ने दी मंजूरी; जानें डिटेल
यूपी के विश्वविद्यालयों में पेपर की छपाई से लेकर मूल्यांकन तक के सिस्टम में कई बदलाव होने जा रहे हैं। राज्यपाल सचिवालय ने राज्य विवि में प्रश्नपत्रों को ऑनलाइन भेजने, डिजिटल मूल्यांकन और परीक्षा संचालन में सीसीटीवी-बॉयोमैट्रिक उपस्थिति के AKTU मॉडल लागू करने को मंजूरी दे दी है।

UP News : गोपनीयता की आड़ में सालाना अरबों रुपये की पेपर प्रिंटिंग के बीच उत्तर प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में पेपर छपने से मूल्यांकन तक की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्यपाल सचिवालय ने राज्य विवि में प्रश्नपत्रों को ऑनलाइन भेजने, डिजिटल मूल्यांकन और परीक्षा संचालन में सीसीटीवी-बॉयोमैट्रिक उपस्थिति के एकेटीयू मॉडल लागू करने को मंजूरी दे दी है। एकेटीयू वर्षों पहले यह प्रक्रिया लागू कर चुका है।
कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी डॉ.सुधीर एम बोबडे के आदेशों के अनुसार प्रदेश के कृषि एवं चिकित्सा विवि को छोड़कर अन्य सभी राज्य विवि को एकेटीयू मॉडल अक्षरश: लागू करेंगे। यदि ऐसा हुआ तो हर राज्य विवि में सालाना करोड़ों रुपये की गोपनीय प्रिंटिंग, पेपर भेजने में करोड़ों रुपये का ट्रांसपोर्टेशन खर्च और मूल्यांकन को सिर्फ कैंपस में ही कॉपी जांचने की बाध्यता खत्म हो जाएगी। नई व्यवस्था में केंद्रों पर ही पेपर प्रिंट होंगे और मूल्यांकन कॉलेजों में।
कॉपियों का ऑनलाइन डिजिटल मूल्यांकन
केंद्रों पर छात्र द्वारा दी गई परीक्षा की कॉपियों का विवरण विवि की ईआरपी पर अपलोड कर भारतीय डाक विभाग इंश्योरेंश के साथ विवि को प्रेषित करेगा। विवि पहुंचने पर बैग आईडी बनेंगी। कॉपियों को बारकोड के जरिए कंप्यूटर जनरेटेड ऑटोमैटिक डमी नंबर मिलेंगे। फिर कॉपियों की थ्रेड कटिंग के साथ स्कैनिंग होगी। स्कैन कॉपियों के कुल पृष्ठ संख्या गिनने के साथ ओएमआर कवर पेज एवं प्रत्येक पृष्ठ पर अंकित क्यूआर कोड स्कैन हेागा। फिर कॉपियों के ओएमआर पृष्ट की मास्किंग के बाद कोडिंग कर सर्वर पर मूल्यांकन को भेजा जाएगा। सर्वर से ही कॉपियां पंजीकृत मूल्यांकन केंद्रों को लॉगिन में उपलब्ध कराई जाएंगी। यहां रैंडम प्रक्रिया से परीक्षकों को मूल्यांकन के लिए कॉपी आवंटित होंगी। परीक्षक को कॉपी के साथ प्रश्न पत्र एवं उत्तर कुंजी ऑनलाइन मिलेगी। प्रत्येक परीक्षक को मूल्यांकन के लिए निर्धारित न्यूनतम समय मिलेगा। इसके बाद सभी कॉपियों को सर्वर के जरिए हार्डडिस्क में सुरक्षित किया जाएगा। मूल्यांकन के बाद परीक्षक का पारिश्रमिक सर्वर के जरिए ऑडटोमेडिट बिल जनरेशन से बिल तैयार कर भुगतान होगा। प्राप्त नंबर रिजल्ट के लिए भेजे जाएंगे।
डिजिटल मूल्यांकन से ये होगा फायदा
कॉपियां खोने या बदलने की आशंका खत्म हो जाएगी। कॉपियां का रिकॉर्ड रखना आसान होगा। भौतिक स्थान की जरुरत नहीं होगी। छात्रों को कॉपी आसानी से भेजी जा सकेगी। चुनौती मूल्यांकन के लिए कॉपी छात्रों को जल्द मिल सकेगी। मूल्यांकन केंद्रों पर कॉपियों का ट्रांसपोर्टेशन व्यय नहीं होगा। परीक्षक मूल्यांकन अपने संस्थान में करेंगे और उन्हें विशेष मूल्यांकन केंद्रों पर आने की जरुरत नहीं होगी।
केंद्रों पर ऐसे होगी परीक्षा और बॉयोमैट्रिक हाजिरी
परीक्षा केंद्रों पर पेपर से पहले प्रवेश द्वार, कंट्रोल रूम एवं कक्ष सीसीटीवी से कवर होंगे। सीसीटीवी में ही परीक्षार्थियों की जांच होगी। कक्ष में बैठने के बाद छात्रों के कॉपियों के नंबर या बारकोड स्कैन कर उनकी बॉयोमैट्रिक हाजिरी होगी। विवि का कंट्रोल रूम समस्त कक्षों की निगरानी करेगा। कॉपी खोने या बदलने की आशंका खत्म हो जाएगी। छात्र के जगह कोई दूसरा पेपर नहीं दे सकेगा। समस्त प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाएगी।
केंद्रों पर ऐसे भेजे जाएंगे प्रश्न पत्र
प्रश्नपत्रों के प्रथम-द्वितीय पाली के दो एन्क्रिप्टेड फोल्डर्स बनेंगे। विवि ईआरपी (इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) से सभी केंद्रों के लॉगइन में ये पेपर अपलोड करेगा। पेपर शुरू होने के 35-40 मिनट पहले विवि इन एन्क्रिप्टेड फोल्डर को डिक्रिप्ट करेगा। इसके बाद केंद्र के सीसीटीवी युक्त कंट्रोल रूप में विवि से नियुक्त पर्यवेक्षक ये पेपर डाउनलोड कर प्रिंट करेंगे। प्रत्येक प्रश्न पत्र पर केंद्र संख्या, इंटरनेट आईपी वाटर मार्क के साथ प्रिंट होगा। ये फोल्डर्स इंटरनेट नहीं होने पर भी पर्यवेक्षक द्वारा पासवर्ड एवं हैश-की उपलब्ध कराकर खोले जा सकेंगे। इस व्यवस्था में प्रश्न पत्रों की छपाई छात्र संख्या के अनुरूप सीमित होगी और खर्च में कटौती होगी। यदि किसी कारण परीक्षा शुरू होने से पहले पेपर लीक हो जाए या बदलने की जररुत पड़े तो मात्र पांच मिनट में इसे बदला जा सकेगा। किसी भी स्थिति में समय से पहले पेपर नहीं खोला जा सकेगा।




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