यूपी विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने की रची जा रही साजिश, स्लीपर सेल तैयार कर रहे आतंकी
स्लीपर सेल से सैन्य ठिकानों से लेकर महत्वपूर्ण जगहों पर रेकी कराई जा रही है और लोकेशन ली जा रही थी। साइबर हैकर्स की टीम भी इसमें लगाई गई है। कुछ लोगों को ब्लैकमेल करके ग्रुप का हिस्सा बनाया जा रहा है। यूपी और दिल्ली में पिछले कुछ समय में इसी इनपुट के बाद कई आरोपियों की धरपकड़ की गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2027 को प्रभावित करने की साजिश का खुलासा हुआ है। एटीएस और खुफिया एजेंसियों के पास इनपुट है कि चुनाव से पहले ही कई घटनाएं अंजाम देने की प्लानिंग की जा रही है। आईएसआई और आतंकी संगठन इसके लिए पिछले कुछ समय से कश्मीर से लेकर यूपी, दिल्ली और एनसीआर में सक्रिय हैं। यहां युवाओं को बरगलाकर स्लीपर सेल का हिस्सा बनाया जा रहा है और इनसे आतंकी गतिविधियां अंजाम दिलाई जा रही हैं।
सैन्य ठिकानों से लेकर महत्वपूर्ण जगहों पर रेकी कराई जा रही है और लोकेशन ली जा रही थी। साइबर हैकर्स की टीम भी इसी काम में लगाई है और कुछ लोगों को ब्लैकमेल करके ग्रुप का हिस्सा बनाया जा रहा है। यूपी और दिल्ली में पिछले कुछ समय में इसी इनपुट के बाद लगातार कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों की धरपकड़ की गई है। यूपी एटीएस, गुजरात एटीएस, जम्मू कश्मीर पुलिस, आईबी और एनआईए समेत बाकी एजेंसियों ने पिछले कुछ महीने में आतंकी मॉड्यूल पर लगातार कार्रवाई की है। जम्मू कश्मीर से लेकर गुरुग्राम, दिल्ली, लखनऊ और सहारनपुर तक आतंक का नेटवर्क तोड़ा था। इसी मॉड्यूल से जुड़े बाकी फरार डॉक्टरों ने दिल्ली में विस्फोट भी अंजाम दिया था। नए इनपुट्स के आधार पर एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
नवंबर 2025 में गुजरात एटीएस ने यूपी के दो आतंकी गिरफ्तार आजाद सुलेमान शेख निवासी शामली, मोहम्मद सुहेल निवासी लखीमपुर और हैदराबाद के अहमद मोहिउद्दीन को गिरफ्तार किया था। ये आरोपी जैविक हथियार बनाने की फिराक में थे और इसके लिए केमिकल जुटाया था।
आईबी और यूपी एटीएस ने गाजियाबाद में सैन्य ठिकानों की रेकी करने और सोलर कैमरे लगाने के मामले में 18 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई थी। इसके बाद मामले में एनआईए भी शामिल हो गई। वहीं, लगातार वेस्ट यूपी और दिल्ली समेत आसपास के शहरों में पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी, आबिद जट और कुछ अन्य पाकिस्तानी आतंकी संगठनों ने नेटवर्क बढ़ाया है। सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को बरगलाकर साथ मिलाया गया है।
दुबई-सउदी में काम करने वालों का सत्यापन
दुबई और सउदी अरब समेत बाकी जगहों पर काम करने वाले लोगों का डाटा जिलेवार जुटाया जा रहा है। पता किया जा रहा है कि कौन-कौन कहां और किस कंपनी में काम करता है। परिजनों को जो पैसा भेजा जा रहा है, वह किस माध्यम से आ रहा है। इनके संपर्क में रहने वाले लोगों की भी निगरानी की जा रही है।




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