यूपी में 12 वीं पास झोलाछापों ने धड़ाधड़ किए किडनी के ऑपरेशन, रोहित के बाद अली का खुलासा
दिल्ली के उत्तम नगर के रहने वाले अली ने 16 अप्रैल को कोर्ट में सरेंडर किया था। उसे जेल भेज दिया गया था। कोर्ट की अनुमति लेकर पुलिस ने जेल में पूछताछ की। अली ने विवेचक को बताया कि वह भी 12वीं पास है। ओटी टेक्नीशियन कोर्स करने के बाद एक बड़े निजी अस्पताल में उसने किडनी ऑपरेशन देखा और करना सीखा।

उत्तर प्रदेश के कानपुर से खुले किडनी कांड में रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। किडनी का काला कारोबार 12वीं पास झोलाछापों ने ही संभाल रखा था। वे धड़ाधड़ ऑपरेशन कर रहे थे। जेल में मुदस्सिर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली से हुई पूछताछ में यह बात सामने आयी है। जेल में विवेचक को अली ने बताया कि वह भी 12वीं पास है और दिल्ली से ओटी टेक्नीशियन का कोर्स किया है। इसी दौरान दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में काम करने का मौका मिला तो किडनी ऑपरेशन की एक टीम का हिस्सा बना। यहीं से उसने भी ऑपरेशन करना सीखा हालांकि किडनी जैसा बड़ा ऑपरेशन वह करता था, इस पर जांच एजेंसियों को संदेह है। इसके पहले इस मामले में गिरफ्तार रोहित भी 12 वीं पास निकला था।
दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाले अली ने 16 अप्रैल को कोर्ट में सरेंडर किया था। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। जिसके बाद पुलिस ने उससे जेल में पूछताछ के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी। कोर्ट की अनुमति लेकर पुलिस ने जेल में पूछताछ की। अली ने विवेचक को बताया कि वह भी 12वीं पास है। ओटी टेक्नीशियन को कोर्स करने के बाद दिल्ली के एक बड़े निजी अस्पताल में उसने कई साल काम किया। यहीं उसने किडनी ऑपरेशन देखा और करना सीखा। हालांकि पुलिस को उसकी इस बात पर भरोसा नहीं है। मामले की जांच कर रही है।
2018-19 में रोहित तिवारी से मुलाकात हुई
उसने बताया कि दिल्ली में ही वर्ष 2018-19 में रोहित तिवारी से उसकी मुलाकात हुई। रोहित उसे मेरठ ले गया और डॉ. वैभव मुद्गल से मुलाकात कराई। अल्फा अस्पताल में दो से तीन ऑपरेशन किए। इसके बाद अल्फा अस्पताल के संचालकों में रुपये को लेकर विवाद हो गया तो वह रोहित के साथ कानपुर में ऑपरेशन करने लगा।
कानपुर में करीब 10 ऑपरेशन किए
कानपुर में करीब 10 ऑपरेशन किए। इसमें से एक ऑपरेशन के बाद परिजन महिला को सीधे घर ले गए। इंफेक्शन से उसकी हालत बिगड़ गई। एक और महिला की मौत हुई लेकिन अली ने उसका नाम नहीं बताया। कब-कब और किसके ऑपरेशन किए इस पर अली ने कहा कि याद नहीं। एक ऑपरेशन का उसे कितना रुपया मिलता था इस पर अली ने बताया कि 15 से 20 लाख रुपये उसे मिलते थे। अली ने पुलिस को बताया कि किडनी के सभी ऑपरेशन ठीक हुए थे।
मामले में ये आरोपी पहुंच चुके जेल
कल्याणपुर के केशवपुरम के आहूजा हॉस्पिटल और मसवानपुर के मेडीलाइफ हॉस्पिटल में अवैध तरीके से हुए किडनी ट्रांसप्लांट मामले में 11 आरोपियों को पुलिस अब तक जेल भेज चुकी है। इनमें डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीति आहूजा, शिवम अग्रवाल, राजेश कुमार, राम प्रकाश कुशवाहा, नरेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह राघव, राजेश तोमर, परवेज सैफी, रोहित तिवारी, मुदस्सर अली सिद्दीकी जेल में हैं। अन्य की तलाश की जा रही है।
अभी इन लोगों की है तलाश
पुलिस इस मामले में अफजल, डॉ. अमित, डॉ. वैभव मुद्गल, नवीन पांडेय समेत पांच आरोपियों की तलाश कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक तीन टीमें दिल्ली एनसीआर में भेजी गई हैं। बता दें 29 अप्रैल को आहूजा हॉस्पिटल में मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर को बिहार के बेगूसराय निवासी एमबीए छात्र आयुष कुमार की किडनी ट्रांसप्लांट की गई थी। सर्जरी के बाद पारुल को कल्याणपुर के प्रिया हॉस्पिटल और आयुष को मेडलाइफ में शिफ्ट किया गया था।
क्या बोली पुलिस
कानपुर के डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि जेल में अली से पूछताछ की गई है। उसने 12वीं पास व कानपुर में सभी ऑपरेशन की बात स्वीकार की है। कस्टडी रिमांड लेने के लिए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।




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