अखिलेश ने मुझे बड़ी बहन कहा, फिर उनके लोगों ने जूते क्यों मारे? मेयर सुषमा खर्कवाल के सवाल
राजधानी लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से सवाल किए हैं। मेयर ने कहा कि जब अखिलेश यादव उन्हें बड़ी बहन बताते हैं, तो उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा उनके आवास पर पहुंचकर उनकी नेम प्लेट पर जूते-चप्पल चलाना कैसे सही ठहराया जा सकता है।

UP News: यूपी के लखनऊ नगर निगम सदन की बैठक में गुरुवार को मेयर सुषमा खर्कवाल ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा सवाल दागते हुए हाल ही में हुई घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। मेयर ने कहा कि जब अखिलेश यादव उन्हें बड़ी बहन बताते हैं, तो उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा उनके आवास पर पहुंचकर उनकी नेम प्लेट पर जूते-चप्पल चलाना कैसे सही ठहराया जा सकता है।
सदन में महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर निंदा प्रस्ताव के दौरान मेयर ने यह सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनका अपमान नहीं, बल्कि पूरे लखनऊ शहर के सम्मान से जुड़ा मामला है। मेयर ने बताया कि उन्हें 10.50 लाख में से 5.25 लाख वोट मिले हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाएं जनता के जनादेश का भी अपमान हैं।
ये जूता आखिर किसे मारा गया?
मेयर ने सदन में कहा, जो लोग मेरे घर पर पहुंचे और अभद्रता की, उन्होंने सिर्फ एक व्यक्ति नहीं बल्कि लखनऊ की प्रथम नागरिक को निशाना बनाया। यह जूता आखिर किसे मारा गया मुझे या पूरे शहर को? भाजपा पार्षद रामनरेश रावत ने भी सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिन लोगों ने मेयर के साथ अभद्रता की है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को जूते की माला पहनाकर जवाब दिया जाएगा।
महिला आरक्षण पर सदन में हंगामा, जनता के मुद्दे हाशिये पर
नगर निगम सदन की बैठक गुरुवार को पूरी तरह राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ गई। जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की बजाय महिला आरक्षण के प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। हालात इतने बिगड़े कि बैठक के दौरान जमकर नारेबाजी, विरोध और बहिष्कार देखने को मिला।
महापौर सुषमा खर्कवाल ने जैसे ही सदन में अपना भाषण शुरू किया विपक्षी पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के पार्षदों ने भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सदन की वैधता पर ही सवाल खड़े कर दिए। उनका कहना था कि इस तरह के राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए नगर निगम का मंच उपयुक्त नहीं है। देखते ही देखते स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सपा और कांग्रेस के पार्षद सदन का बहिष्कार करते हुए बाहर चले गए।
आमने-सामने आए पार्षद, नोकझोंक के बीच नारेबाजी
बैठक के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। भाजपा पार्षदों ने विपक्ष के खिलाफ जोरदार नारे लगाए और महापौर के समर्थन में आवाज बुलंद की। वहीं विपक्षी पार्षद लगातार विरोध जताते रहे। माहौल इतना गर्म हो गया कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल ही नहीं पाई।
धरने पर बैठे कांग्रेस पार्षद, सपा ने किया बहिष्कार
हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी के सभी 22 पार्षद नगर निगम परिसर से बाहर निकल गए, जबकि कांग्रेस के पार्षद अंत तक डटे रहे। कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान और ममता चौधरी ने नगर निगम मुख्यालय में ही महापौर की गाड़ी के पास बैठकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि जनता के असल मुद्दों को नजरअंदाज कर राजनीतिक एजेंडा थोपने की कोशिश की जा रही है।
बीजेपी की महिला पार्षदों ने संभाला मोर्चा, सुरक्षा का मुद्दा उठाया
उधर भाजपा की महिला पार्षदों ने मोर्चा संभालते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। पार्षद नेहा सिंह ने बुधवार को महापौर की नेम प्लेट को चप्पल से पीटने का जिक्र करते हुए कहा कि यह बेहद निंदनीय है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शहर की महापौर ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति भी मांगी।




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