RPSC के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा को सुप्रीम कोर्ट से राहत, फिलहाल जेल में ही रहेंगे
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के इतिहास में पेपर लीक के सबसे बड़े और काले अध्याय से जुड़े निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेड सेकंड शिक्षक भर्ती-2022 पेपर लीक मामले में कटारा को अंतरिम जमानत प्रदान कर दी है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के इतिहास में पेपर लीक के सबसे बड़े और काले अध्याय से जुड़े निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेड सेकंड शिक्षक भर्ती-2022 पेपर लीक मामले में कटारा को अंतरिम जमानत प्रदान कर दी है। हालांकि, यह राहत फिलहाल कागजों तक ही सीमित रहेगी, क्योंकि अन्य मामलों में गिरफ्तारी के चलते उनकी जेल से रिहाई अभी संभव नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
कटारा की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह आदेश पारित किया। अदालत ने राजस्थान सरकार को कड़ा रुख अपनाते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि अब तक जांच कहां तक पहुंची है, चार्जशीट दाखिल हुई या नहीं, मामले में कुल कितने गवाह हैं और जांच में देरी के क्या कारण हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि लंबी न्यायिक हिरासत और जांच में सुस्ती जैसे मुद्दों पर वह गंभीरता से विचार करेगा। इस मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च, 2026 को निर्धारित की गई है।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट
गौरतलब है कि इससे पहले अगस्त 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट ने बाबूलाल कटारा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद कटारा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अंतरिम जमानत दिए जाने को कानूनी तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि शीर्ष अदालत जांच की गति और आरोपी की लंबी हिरासत को लेकर संतुष्ट नहीं है।
वकील की दलील – बिना ठोस सबूत कब तक जेल?
कटारा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक जैन ने अदालत में जोरदार दलील दी। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के समय उनके मुवक्किल के पास से कोई आपत्तिजनक दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस या ठोस सबूत बरामद नहीं हुआ।
वकील ने तर्क दिया कि जांच एजेंसियां केवल परिस्थितिजन्य आधार पर आरोप गढ़ रही हैं और किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना संविधान के मूल अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने में असामान्य देरी हो रही है, जबकि आरोपी पहले से ही लंबा समय जेल में बिता चुका है।
फिर भी जेल में ही रहेंगे कटारा
सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बावजूद बाबूलाल कटारा को फिलहाल सलाखों के पीछे ही रहना होगा। इसकी वजह यह है कि वे केवल ग्रेड सेकंड शिक्षक भर्ती-2022 ही नहीं, बल्कि SI भर्ती-2021 पेपर लीक मामले और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े मामलों में भी आरोपी हैं और इन प्रकरणों में उनकी गिरफ्तारी जारी है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, जब तक अन्य मामलों में भी उन्हें जमानत या राहत नहीं मिलती, तब तक सुप्रीम कोर्ट की यह अंतरिम जमानत उन्हें जेल से बाहर नहीं निकाल पाएगी।
RPSC पर पहले से ही सवालों के घेरे
बाबूलाल कटारा का मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने राजस्थान लोक सेवा आयोग की साख पर भी गहरे सवाल खड़े किए हैं। पिछले कुछ वर्षों में लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों ने आयोग की कार्यप्रणाली, भर्ती प्रक्रिया और निगरानी तंत्र पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
कटारा, जो कभी आयोग के ताकतवर सदस्य माने जाते थे, आज उसी संस्था के इतिहास में पेपर लीक के काले धब्बे के रूप में देखे जा रहे हैं।
आगे की सुनवाई पर टिकी नजर
अब सभी की निगाहें 23 मार्च 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मांगे गए हलफनामे के बाद यह साफ होगा कि जांच एजेंसियों की प्रगति और राज्य सरकार की भूमिका पर अदालत क्या रुख अपनाती है।
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