गहलोत ने CM भजनलाल शर्मा को लिखा पत्र, जोधपुर के लंबित कामों पर जताई चिंता
राजस्थान की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने ही अंदाज़ में सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर जोधपुर की बदहाली का मुद्दा उठा दिया है। गहलोत की यह चिट्ठी सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं

राजस्थान की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने ही अंदाज़ में सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर जोधपुर की बदहाली का मुद्दा उठा दिया है। गहलोत की यह चिट्ठी सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि अपने गृह नगर के अधूरे विकास कार्यों की लंबी फेहरिस्त है, जिसे उन्होंने तथ्यों और आंकड़ों के साथ रखा है।
पत्र की शुरुआत में ही गहलोत ने दो टूक शब्दों में लिखा कि विकास कार्य किसी पार्टी की जागीर नहीं होते, बल्कि जनता का अधिकार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद जोधपुर के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को या तो रोक दिया गया है या फिर ‘जांच’ के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, जिससे आम जनता को सीधा नुकसान हो रहा है।
ऐतिहासिक तालाबों की अनदेखी का आरोप
गहलोत ने जोधपुर की ऐतिहासिक पहचान से जुड़े रानीसर, पदमसर, गुलाबसागर और फतेहसागर जैसे तालाबों का विशेष तौर पर जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि इन जलाशयों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए पूर्व सरकार के समय स्वीकृत राशि को रोक दिया गया है। परिणामस्वरूप ये तालाब आज भी संरक्षण की राह देख रहे हैं, जबकि ये न सिर्फ विरासत हैं, बल्कि शहर के जल प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
300 करोड़ की सीवरेज योजना अटकी
पूर्व मुख्यमंत्री ने जोधपुर की सीवरेज व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि 300 करोड़ रुपये की सीवरेज सुधार योजना केवल ‘जांच’ के नाम पर फाइलों में धूल फांक रही है। इससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो रही है और आम लोग रोजमर्रा की समस्याओं से जूझ रहे हैं।
खिलाड़ियों के भविष्य पर सवाल
पत्र का सबसे भावुक और तीखा हिस्सा खेल सुविधाओं को लेकर रहा। गहलोत ने लिखा कि 100 करोड़ रुपये की लागत से बना स्टेट स्पोर्ट्स आवासीय सेंटर लगभग तैयार है, लेकिन महज 3.8 करोड़ रुपये की फाइल अटकने के कारण स्वीमिंग पूल और इंडोर हॉल अब तक अधूरे हैं।
उन्होंने अफसोस जताया कि हॉस्टल का हैंडओवर न होने से प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ी आज भी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं। गहलोत ने इसे सीधे तौर पर युवाओं और खेल प्रतिभाओं के भविष्य के साथ अन्याय बताया।
स्वास्थ्य और शिक्षा के मुद्दे भी उठाए
गहलोत ने पत्र में जोधपुर के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान एमडीएम अस्पताल की 81 करोड़ रुपये की देनदारी का मुद्दा भी उठाया। इसके साथ ही मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी के धीमे कामकाज पर चिंता जताई और कहा कि इससे मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी लिखा कि सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी का नया भवन पूरी तरह तैयार है, लेकिन स्टाफ और बजट के अभाव में वह जनता के लिए अब तक नहीं खोला जा सका है। इससे छात्रों और शोधकर्ताओं को भारी परेशानी हो रही है।
बजट से उम्मीद, पूर्वाग्रह छोड़ने की अपील
चिट्ठी के अंत में गहलोत ने आगामी राज्य बजट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया कि राजनीतिक पूर्वाग्रह छोड़कर जोधपुर की लंबित परियोजनाओं के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान किए जाएं। उन्होंने बदहाल सड़कों, जल वितरण की समस्या और बुनियादी सुविधाओं की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि इन मुद्दों का समाधान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
गहलोत की यह चिट्ठी न सिर्फ जोधपुर के विकास कार्यों को लेकर सवाल खड़े करती है, बल्कि आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति में नए सियासी वार-पलटवार के संकेत भी दे रही है।
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