खेजड़ी बचाओ आंदोलन को गहलोत का समर्थन, बोले- यह राजस्थान के भविष्य के लिए शुभ संकेत
राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण को लेकर चल रहे जन आंदोलन को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का समर्थन मिला है। गहलोत ने सोशल मीडिया के जरिए जारी अपने विस्तृत बयान में खेजड़ी बचाओ आंदोलन को न केवल समय की मांग बताया, बल्कि इसे राजस्थान के भविष्य के लिए एक शुभ और सकारात्मक संकेत करार दिया।

राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण को लेकर चल रहे जन आंदोलन को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का समर्थन मिला है। गहलोत ने सोशल मीडिया के जरिए जारी अपने विस्तृत बयान में खेजड़ी बचाओ आंदोलन को न केवल समय की मांग बताया, बल्कि इसे राजस्थान के भविष्य के लिए एक शुभ और सकारात्मक संकेत करार दिया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ती जनचेतना का प्रमाण है।
अशोक गहलोत ने अपने बयान में कहा कि हाल के वर्षों में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर समाज में जो जागरूकता देखने को मिली, उसी कड़ी में अब खेजड़ी जैसे महत्वपूर्ण वृक्ष को बचाने के लिए आमजन का आगे आना उम्मीद जगाने वाला है। उन्होंने कहा कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक, सामाजिक और पर्यावरणीय पहचान का प्रतीक है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आम लोगों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ती समझ और सक्रियता बेहद सराहनीय है। यह बदलाव आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है, क्योंकि प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन भविष्य के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। गहलोत ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण के बिना विकास की कल्पना अधूरी है और बिना संतुलन के किया गया विकास लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकता।
गहलोत ने विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब विकास योजनाओं को बनाते और लागू करते समय पर्यावरणीय नियमों और मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि पर्यावरणीय स्वीकृतियों को केवल औपचारिकता बनाकर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया गया, तो इसके दुष्परिणाम पूरे समाज को भुगतने पड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि राजस्थान की प्राकृतिक धरोहरें चाहे वह खेजड़ी हो, अरावली हो या अन्य जैव विविधताएं—प्रदेश की पहचान और विरासत हैं। इनकी रक्षा केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। गहलोत ने कहा कि जब तक आमजन पर्यावरण संरक्षण को अपना व्यक्तिगत दायित्व नहीं समझेगा, तब तक बड़े बदलाव संभव नहीं होंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जनभागीदारी को सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि जब लोग किसी मुद्दे को अपना मानकर आगे आते हैं, तब आंदोलन मजबूत बनते हैं और स्थायी परिणाम सामने आते हैं। खेजड़ी बचाओ आंदोलन इसका उदाहरण बन सकता है, जहां आम नागरिक, सामाजिक संगठन और पर्यावरण प्रेमी एक साझा उद्देश्य के लिए एकजुट हो रहे हैं।
गहलोत ने उम्मीद जताई कि खेजड़ी संरक्षण को लेकर शुरू हुआ यह जन आंदोलन प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई मिसाल कायम करेगा। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की चेतना और सहभागिता बनी रही, तो राजस्थान आने वाले समय में पर्यावरण संतुलन और सतत विकास का बेहतर मॉडल प्रस्तुत कर सकता है।
गौरतलब है कि खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है और यह न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक जीवनशैली से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में खेजड़ी के संरक्षण को लेकर उठ रही आवाजें प्रदेश की दीर्घकालिक भलाई से जुड़ी मानी जा रही हैं।
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