प्रिंसिपल मजाक उड़ाते हैं...ये लिखकर राजस्थान में सरकारी मास्टर ने किया सुसाइड, 5 महीने बाद था रिटायरमेंट
राजस्थान के अलवर जिले से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। अकबरपुर थाना क्षेत्र के निर्भमपुरा गांव में रविवार दोपहर सरकारी शिक्षक ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक शिक्षक के पास से चार पेज का सुसाइड नोट मिला है

राजस्थान के अलवर जिले से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। अकबरपुर थाना क्षेत्र के निर्भमपुरा गांव में रविवार दोपहर सरकारी शिक्षक ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक शिक्षक के पास से चार पेज का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उन्होंने स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और प्रिंसिपल पर मानसिक प्रताड़ना, कार्य दबाव और अपमान का आरोप लगाया है। शिक्षक का महज पांच महीने बाद रिटायरमेंट होना था।
मृतक की पहचान बड्डन लाल बलाई (59) के रूप में हुई है। वह राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेहलावास, पंचायत समिति उमरेण, जिला अलवर में अध्यापक पद पर कार्यरत थे। घटना रविवार दोपहर करीब 2 बजे की है। शिक्षक ने घर से लगभग 100 मीटर दूर स्थित बाड़े की टीन शेड में फंदा लगाकर आत्महत्या की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया।
38 साल की सेवा, 5 महीने बाद रिटायरमेंट
सुसाइड नोट में बड्डन लाल ने लिखा है कि वह करीब 38 साल की राजकीय सेवा पूरी कर चुके थे और 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले थे। उन्होंने बताया कि बीते चार-पांच साल से वह मानसिक, बौद्धिक और शारीरिक रूप से गंभीर रूप से पीड़ित थे। बेटे की शादी से ठीक दो दिन पहले उन्हें जबरदस्त माइंड स्ट्रोक आया था, जिससे शरीर का आधा हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया, आंखों की रोशनी कम हो गई और मानसिक स्थिति भी प्रभावित हुई।
उन्होंने लिखा कि वह अपने बेटे की बारात में भी शामिल नहीं हो सके। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर बताते हुए आजीवन दवाइयों की जरूरत बताई थी।
काम का भारी दबाव और चार्ज नहीं लेने का आरोप
सुसाइड नोट में शिक्षक ने बताया कि उनकी मानसिक स्थिति बेहद खराब होने के बावजूद उनसे लगातार काम कराया जाता रहा। उन्होंने प्रिंसिपल और वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार अनुरोध किया कि उनका कार्यभार किसी अन्य शिक्षक को सौंप दिया जाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
उन्होंने लिखा कि उनके पास PEEO नोडल के तहत आठ स्कूलों की निशुल्क पाठ्यपुस्तक, वर्क बुक, लाइब्रेरी और कक्षा 1 से 12 तक का चार्ज था। इसके अलावा स्वयं के विद्यालय का भी पूरा कार्यभार उन्हीं पर था। कोई भी शिक्षक यह जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं था।
मजाक उड़ाया, शराब पीकर गाली देने के आरोप
सुसाइड नोट में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए बड्डन लाल ने लिखा कि स्कूल में उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। उनसे कहा जाता था—“यह काम कैसे भी करो, हमें नहीं पता, आप जानो आपका काम जाने।” उनका मजाक उड़ाया जाता था और कुछ शिक्षक शराब पीकर गाली-गलौज भी करते थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शिक्षक कहते थे कि उनकी कलेक्ट्रेट और शिक्षा विभाग में ऊंची पहुंच है और वे उनकी नौकरी खा जाएंगे, रिटायरमेंट नहीं लेने देंगे।
नींद और खाना छूटा, अवकाश भी नहीं ले सके
शिक्षक ने लिखा कि काम के दबाव और मानसिक तनाव के चलते उनकी नींद उड़ गई थी, खाना-पीना छूट गया था। उनके पास 600 हाफ पे लीव होने के बावजूद वह अवकाश नहीं ले सके, क्योंकि स्कूल में पढ़ाने वाला कोई नहीं था और न ही कोई उनका चार्ज लेने को तैयार था। रिटायरमेंट से जुड़े कागजात भी वह समय पर तैयार नहीं कर पाए।
‘मुझे आत्महत्या करने को मजबूर किया’
सुसाइड नोट के अंतिम हिस्से में बड्डन लाल ने लिखा कि इन सभी परिस्थितियों ने उन्हें आत्महत्या करने को मजबूर कर दिया। उन्होंने दोषियों को कड़ी सजा देने और शिक्षा विभाग से कार्रवाई की मांग की। परिवार, रिश्तेदारों और ग्रामवासियों से माफी मांगते हुए उन्होंने सभी को अंतिम राम-राम कहा।
पुलिस जांच में जुटी
अकबरपुर थाना के एएसआई प्रकाश चंद ने बताया कि मृतक के परिजनों की ओर से शिकायत दी गई है। सुसाइड नोट के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
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