मजदूरों ने बवाल किया, तो एजेंसी और ठेकेदार होंगे जिम्मेदार; दे दी गईं 2 बड़ी चेतावनी
Noida Ghaziabad labour protest: हाई लेवल कमेटी की मीटिंग में साफ तौर पर कड़े शब्दों में कहा गया है- यदि किसी एजेंसी अथवा उसके कर्मचारी/श्रमिक द्वारा उपद्रवी व्यवहार किया जाता है, तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की मानी जाएगी।

Noida Ghaziabad labour protest: गाजियाबाद जनपद में मजदूर फिर से हिंसा पर न उतरे, इसके लिए यूपी सरकार हाई लेवल कमेटी गठित करके समाधान निकालने की कोशिश में जुटी हुई है। इसी क्रम में कलेक्ट्रेट सभागार में औद्योगिक विकास आयुक्त एवं हाई लेवल कमेटी के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में आउटसोर्सिंग एजेंसियों/संविदाकारों की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस मीटिंग में कमेटी द्वारा सख्त निर्देश दिए गए कि “यदि किसी एजेंसी अथवा उसके कर्मचारी/श्रमिक द्वारा उपद्रवी व्यवहार किया जाता है, तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की मानी जाएगी।”
अब मजदूरों का बवाल पड़ेगा एजेंसियों पर भारी
आसान शब्दों में कहें तो उपद्रवी व्यवहार करने वाले मजदूर को जिस एजेंसी या ठेकेदार के द्वारा भर्ती किया गया होगा, उसे ही इसका खामियाजा भुगतना होगा। चेतावनी देते हुए कहा गया- "ऐसी एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के साथ-साथ उसका लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी।" कमेटी द्वारा स्पष्ट किया गया कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां/संविदाकार उद्योगों के संचालन एवं रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपने श्रमिकों को अनुशासित रखें तथा उन्हें इस प्रकार प्रशिक्षित करें कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अशांति की स्थिति उत्पन्न न हो।
कुछ अन्य निर्देश भी दिए गए हैं
1- कमेटी द्वारा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन के अनुपालन पर विशेष बल दिया गया तथा निर्देशित किया गया कि अकुशल श्रमिकों को 13,690 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये एवं कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये प्रतिमाह वेतन का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जाए।
2- साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी श्रमिकों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित किया जाए।
3- श्रम आयुक्त द्वारा निर्देशित किया गया कि सभी कर्मकारों का जॉइनिंग के समय पुलिस सत्यापन कराया जाए तथा भविष्य निधि (PF) एवं कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) की कटौती नियमानुसार सुनिश्चित की जाए, जिससे श्रमिकों में किसी प्रकार की असंतोष की भावना उत्पन्न न हो।
4- इसके अतिरिक्त, श्रम विभाग द्वारा स्थापित स्थायी कॉल सेंटर के टोल-फ्री नंबर 9411900251 सभी आउटसोर्सिंग एजेंसियों को उपलब्ध कराए गए। निर्देशित किया गया कि किसी भी विपरीत परिस्थिति अथवा आवश्यकता की स्थिति में इस टोल फ्री नंबर पर तत्काल संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जिससे समस्याओं का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
हाई लेवल कमेटी वाली मीटिंग में कौन-कौन मौजूद रहा
आपको बताते चलें कि आज कलेक्ट्रेट सभागार में औद्योगिक विकास आयुक्त एवं हाई लेवल कमेटी के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में आउटसोर्सिंग एजेंसियों/संविदाकारों की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इसमें अपर मुख्य सचिव लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग उत्तर प्रदेश आलोक कुमार, प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन विभाग उत्तर प्रदेश एम.के.एस. सुंदरम, श्रम आयुक्त उत्तर प्रदेश कानपुर मार्कंडेय शाही सहित संबंधित अधिकारीगण एवं औद्योगिक इकाइयों आउटसोर्सिंग एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।




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