NCERT की नई किताब में दिल्ली-NCR की जहरीली हवा का जिक्र, 'AQI 400 पार' पर गंभीर चेतावनी
National Council of Educational Research and Training (NCERT) की नई कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान की किताब में दिल्ली-NCR के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के 400 से ऊपर पहुंचने का जिक्र किया गया है। इसके साथ ही इसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम से जोड़ा गया है।

देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण का मुद्दा अब स्कूली की किताबों यानी सिलेबस का हिस्सा बन गया है। National Council of Educational Research and Training (NCERT) की नई कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान की किताब में दिल्ली-NCR के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के 400 से ऊपर पहुंचने का जिक्र किया गया है। इसके साथ ही इसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम से जोड़ा गया है।
NCERT की किताब में क्या लिखा है
‘इंडियाज़ अर्बन लैंडस्केप’ नामक चैप्टर में शहरों के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र किया गया है। इस चैप्टर में तेजी से बढ़ती आबादी, अव्यवस्थित शहरीकरण, संकरी और जर्जर सड़कें, पानी-सैनिटेशन की कमी, कचरा प्रबंधन की समस्याएं और वाहनों की बढ़ती संख्या के चलते शहरों पर बन रहे दबाव का जिक्र किया गया है। इसी संदर्भ में NCR का उदाहरण देते हुए लिखा गया है कि यहां AQI का स्तर अक्सर 400 से ऊपर दर्ज होता है, जो सुरक्षित सीमा 50 से कहीं अधिक है और लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
AQI की परिभाषा को भी समझाया गया
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक- किताब में AQI की परिभाषा भी दी गई है। इसमें बताया गया है कि AQI एक संख्यात्मक पैमाना है, जो PM2.5, PM10, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषकों के आंकड़ों को एकट्ठा कर एयर क्वालिटी को सरल तरीके से बताता है। आसान भाषा में समझिए तो AQI जितना अधिक होगा, प्रदूषण और इंसानों पर पड़ने वाला प्रभाव यानी स्वास्थ्य जोखिम उतना ही ज्यादा होगा।
इसके तहत हो रहा है बदलाव
नई किताबें नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुरूप विकसित की जा रही हैं। पहले इतिहास, भूगोल और राजनीतिक विज्ञान की अलग-अलग किताबें होती थीं, लेकिन अब ‘Exploring Society: India and Beyond’ (भाग 1 और 2) के रूप में कंबाइन्ड सोशल साइंस की किताबें जारी की जा रही हैं।
पुरानी किताबों में इतनी स्पष्टता से जिक्र नहीं था
आपको बताते चलें कि पुरानी कक्षा 8 की किताबों में NCR और AQI के बारे में इस तरह से आसान भाषा में क्लियर करके नहीं बताया गया था। हालांकि प्रदूषण पर सामान्य चर्चा पहले भी की गई थी। इस बीच, नई किताब के एक अन्य हिस्से में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ संबंधी उल्लेख पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आपत्ति जताई है।




साइन इन