केजरीवाल शराब घोटाले में राहत को अपनी जीत बता रहे? क्या बोलीं सीएम रेखा गुप्ता
अरविंद केजरीवाल समेत 21 लोगों को आबकारी नीति घोटाले में राहत मिल चुकी है। पूर्व सीएम समेत सभी आप नेता इसे अपनी जीत बता रहे हैं। इस मामले में दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने क्या कहा?

क्या केजरीवाल शराब घोटाले में राहत को अपनी जीत बता रहे हैं? इस सवाल के जवाब में दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने पहले तो कहा कि ये मामला कानूनी है और अभी कोर्ट में है। इसलिए मेरे लिए खास कार्रवाई पर कमेंट करना ठीक नहीं होगा। लेकिन, फिर बातचीत के दौरान उन्होंने सवाल करते हुए कहा- AAP नेताओं ने सैकड़ों फोन समेत सबूत नष्ट कर दिए और जांच एजेंसियों के समन का जवाब नहीं दिया। वे क्या छिपाने की कोशिश कर रहे थे?
केजरीवाल को अभी HC-SC का सामना करना
सीएम रेखा गुप्ता की ये बातचीत यूएनआई से हुई है। केजरीवाल द्वारा शराब स्कैम में मिली राहत को जीत की तरह दिखाए जाने के सवाल पर आगे कहा- हमारा संवैधानिक सिस्टम इस सिद्धांत पर काम करता है कि कोर्ट कानूनी सवालों का फैसला खुद से करते हैं। केजरीवाल को अभी भी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का सामना करना है।
क्या छिपाने की कोशिश कर रहे थे
इसके बाद उन्होंने दिल्ली की जनता द्वारा ट्रांसपेरेंसी और साफ जवाब की उम्मीद की बात करते हुए कहा- पॉलिटिकल नेताओं को कानूनी डेवलपमेंट को पॉलिटिकल नैरेटिव में बदलने के बजाय अपने कामों को समझाने पर फोकस करना चाहिए। इसके बाद उन्होंने आप पर हमलावर होते हुए कहा- AAP नेताओं ने सैकड़ों फोन समेत सबूत नष्ट कर दिए, और जांच एजेंसियों के समन का जवाब नहीं दिया। वे क्या छिपाने की कोशिश कर रहे थे?
केजरीवाल-सिसोदिया समेत 21 बरी
आपको बताते चलें कि दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में पूर्व सीएम एवं आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ-साथ अन्य 21 आरोपियों को बरी कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच कराने का आदेश दिया था।
इन अहम लोगों को किया गया बरी
राउज एवेन्यू अदालत के विशेष न्यायाधीश जितेन्द्र सिंह ने इस मामले में जिन सभी 23 आरोपियों को बरी किया है, उनमें तेलंगाना से पूर्व सांसद के. कविता, विजय नायर, समीर महेंद्रू शामिल हैं। यह मामला 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा था। इस नीति को तत्कालीन केजरीवाल सरकार ने अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया था।




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