एक्सपर्ट्स को पसंद आ रही दिल्ली की नई EV नीति, बताई इसकी खूबियां और जताया एक बात का डर
एक विशेषज्ञ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह नीति केवल कागजों पर सिमट कर रह गई और जमीनी स्तर पर निगरानी, सुरक्षित लॉजिस्टिक्स और उच्च रिकवरी मानकों की कमी रही, तो यह पर्यावरण के लिए कमजोर साबित हो सकती है।

दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने शनिवार को अपनी EV (इलेक्ट्रिक वाहन) पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी कर दिया और सभी शहरवासियों से इसे पढ़ने की अपील करते हुए अगले 30 दिनों के भीतर अपना फीडबैक देने की अपील की है। वैसे भले ही आम जनता की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों को सरकार का ये प्रस्ताव अभी से पसंद आ गया है और उन्होंने इसका स्वागत किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति में बैटरी रिसाइकिलिंग और उनके जीवनचक्र प्रबंधन पर ध्यान दिया गया है, जो कि इसे पिछली नीतियों से अलग और प्रभावी बनाता है। वहीं एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा कि यह पॉलिसी स्वच्छ हवा के अधिकार को सीधे जीवन के संवैधानिक अधिकार से जोड़ती है। हालांकि, विशेषज्ञों ने इस बात को लेकर आगाह भी किया है कि इस नीति की सफलता काफी हद तक इसके सख्ती से लागू होने पर निर्भर करेगी।
एक प्रावधान को बताया सबसे महत्वपूर्ण
दिल्ली विश्वविद्यालय में पर्यावरण अध्ययन विभाग के प्रमुख राधेश्याम शर्मा ने इस नीति की जमकर सराहना की है और इस नीति में बैटरी रीसाइक्लिंग को शामिल करने को इसके सबसे असरदार हिस्सों में से एक बताया है। उनके अनुसार इस नीति में केवल ईवी वाहनों को अपनाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि बैटरी निपटान से जुड़े पर्यावरणीय जोखिमों को लेकर भी फोकस किया गया है।
पर्यावरण विभाग को सौंपा गया बेहद खास काम
शर्मा ने कहा, यह ड्राफ्ट नीति एक व्यवस्थित बैटरी रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम बनाने पर जोर देती है। इसमें पर्यावरण विभाग को बैटरी कचरा प्रबंधन नियमों को लागू करने और उत्सर्जन में कमी की निगरानी करने का काम सौंपा गया है, जबकि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) बैटरी कलेक्शन सेंटर बनाने में मदद करेगी और सुरक्षित हैंडलिंग व रीसाइक्लिंग के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर जारी करेगी।
बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट का सख्ती से पालन किया अनिवार्य
उन्होंने बताया कि यह नीति बैटरी कचरा प्रबंधन नियम, 2022 का सख्ती से पालन करना अनिवार्य बनाती है, खासकर एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) पर फोकस करते हुए। साथ ही इसने पर्यावरण विभाग को यह सुनिश्चित करने का काम सौंपा है कि OEMs (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर) और अन्य संबंधित संस्थाएं इस्तेमाल की गई बैटरियों की सही रिपोर्टिंग और सुरक्षित हैंडलिंग से जुड़े नियमों का पालन करें।
सख्ती से लागू करने पर ही मिलेगी सफलता
शर्मा ने कहा, 'कुल मिलाकर, यह प्रावधान पर्यावरण के लिहाज से सकारात्मक है, लेकिन इसकी सफलता काफी हद तक इसके लागू होने पर भी निर्भर करती है।' उन्होंने कहा कि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार 'बैटरी कचरा प्रबंधन नियम, 2022' को कितनी कड़ाई से लागू करती है। अगर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़ी सबसे गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं में से एक यानी बैटरी के जीवनकाल के अंत में उसके प्रबंधन का सीधा समाधान कर देगी।'
नीति को स्वच्छ हवा के अधिकार से जोड़ा
उधर थिंक टैंक 'Envirocatalysts' के संस्थापक और मुख्य विश्लेषक सुनील दहिया ने इस नीति को स्वच्छ हवा के अधिकार से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि यह नीति स्वच्छ गतिशीलता को व्यापक पर्यावरणीय लक्ष्यों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
दहिया ने कहा, 'दिल्ली EV नीति 2026-2030 स्वच्छ हवा के अधिकार को सीधे जीवन के संवैधानिक अधिकार से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि परिवहन क्षेत्र को अब एक रहने योग्य वातावरण प्रदान करने की जिम्मेदारी लेनी होगी।'सिंग
सिंगल विंडो क्लीयरेंस से कई मुश्किलें हो जाएंगी आसान
दहिया ने नीति में प्रस्तावित संस्थागत तंत्रों की ओर भी इशारा किया- जिसमें एक सिंगल-विंडो क्लीयरेंस प्रणाली, एक समर्पित EV कोष और एक EV सेल का निर्माण शामिल है और इन्हें कार्यान्वयन के प्रमुख सहायक के रूप में बताया। दहिया ने आगे कहा कि उत्सर्जन में कमी पर नजर रखना और बैटरी रीसाइक्लिंग पर ध्यान केंद्रित करना जवाबदेही सुनिश्चित करता है और कचरे के एक नए संकट को रोकता है।




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