दिल्ली में DTC सभी बसों का करेगा संचालन, रूट्स की होगी समीक्षा; क्या बदलेगा?
दिल्ली में एक अप्रैल से सभी बसों का संचालन अब अकेले डीटीसी करेगा। डिम्ट्स का अनुबंध खत्म होने के बाद निजी बसें भी डीटीसी के अधीन चलेंगी। रूटों की समीक्षा कर यात्रियों की सुविधा के अनुसार बसों की संख्या तय की जाएगी।

एक अप्रैल यानी बुधवार से दिल्ली में सभी बसों का संचालन डीटीसी करेगा। दिल्ली सरकार के कैबिनेट फैसले के मुताबिक 31 मार्च की आधी रात को डिम्ट्स का अनुबंध खत्म हो जाएगा। अब दिल्ली के सभी 83 डिपो और करीब 6100 बसों का संचालन डीटीसी करेगा। डीटीसी के अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही रूटों पर बसों की संख्या की समीक्षा की जाएगी। यात्रियों की जरूरत के आधार पर इनका पुनर्निर्धारण कर बसों की संख्या कम या ज्यादा की जाएगी।
दिल्ली में 83 बस डिपो में से 44 डिपो डीटीसी के पास और 39 डिम्ट्स के अधीन थे। दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने दिसंबर में डिम्ट्स का अनुबंध निरस्त करने का फैसला ले लिया था और डीटीसी को फिर से मजबूत बनाने के लिए बसों के संचालन की जिम्मेदारी पूरी तरह से डीटीसी के हाथों में देने का निर्णय लिया था। इसके बाद डीटीसी ने चरणबद्ध तरीके से डिम्ट्स से हस्तांतरण लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी। जनवरी से ही डीटीसी के कर्मचारियों को डिम्ट्स के 39 डिपो में तैनात कर दिया गया था। अब सभी डिपो डीटीसी के अधीन काम करेंगे।
प्राइवेट ऑपरेटर्स की बसें चलती रहेंगी
डिम्ट्स के अधीन संचालित होने वाली प्राइवेट ऑपरेटर्स की बसों को हटाया नहीं जाएगा। दिल्ली परिवहन विभाग प्रति किलोमीटर की दर से इन बसों को भुगतान करती हैं और इनसे होने वाली आमदनी सरकार के खाते में जमा कराई जाती है। पहले डिम्ट्स के पास इनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी और अब यह काम डीटीसी करेगा। प्राइवेट बस ऑपरेटर्स अब डीटीसी के अधीन काम करेंगे।
दिल्ली में बसों की संख्या
इलेक्ट्रिक बसें - 4338
सीएनजी बसें - 1762
कुल बसें - 6100
यात्रियों को होगा फायदा
अभी तक दिल्ली के विभिन्न रूटों पर डिम्ट्स और डीटीसी दोनों की बसें संचालित हो रही थीं। जिसकी वजह से किसी रूट पर जरूरत से ज्यादा बसें थी और किसी रूट पर यात्रियों की संख्या के अनुपात में बसों की संख्या कम थी। डीटीसी के अधिकारी ने बताया कि कुछ समय बाद रूटों पर बसों की संख्या और यात्रियों के आंकड़ों के आधार पर समीक्षा की जाएगी। अगर किसी रूट पर जरूरत से ज्यादा या कम बसें होंगी तो इनमें परिवर्तन कर संतुलन बनाया जाएगा।




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