एमजीआर, करुणा और जया के बाद थलापति विजय; तमिलनाडु में नेताओं पर स्टारडम फिर भारी
Tamil Nadu Elections Vijay TVK: विजय का फिल्म से संन्यास लेकर पूरी तरह राजनीति में उतरने का फैसला काम कर गया है। तमिलनाडु में रामचंद्रन, करुणानिधि और जयललिता के बाद स्टारडम वाली खाली जगह विजय ले रहे हैं।

Tamil Nadu Elections Vijay TVK: तमिलनाडु की राजनीति में कलाकारों और खास तौर पर फिल्मों के स्टार का जलवा रहा है। डीएमके के नेता एम करुणानिधि और एआईएडीएमके की नेता जयललिता के निधन के बाद तमिल राजनीति में स्टार पावर वाले नेता की जो जगह खाली थी, उसे राज्य और तमिल प्रवासियों के बीच जबर्दस्त फैन बेस के साथ थलापति विजय भरते नजर आ रहे हैं। दो साल पहले विजय की बनाई पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है। 100 से 110 सीटों के बीच आगे-पीछे हो रही टीवीके की सरकार बनाने के लिए विजय को 118 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। तमिलनाडु चुनाव में भाजपा समेत कई छोटे दल भी कुछ-कुछ सीटों पर जीत रहे हैं। अगर थलापति विजय मुख्यमंत्री बन पाते हैं तो वो तमिलनाडु के 5वें कलाकार सीएम होंगे जिनका संबंध फिल्मों से रहा है।
डीएमके के संस्थापक और तमिलनाडु में पार्टी के पहले मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरै के निधन के बाद 1969 में सीएम बने एम करुणानिधि तमिल फिल्मों के बहुत बड़े पटकथा लेखक थे। करुणानिधि की लिखी पहली फिल्म ‘राजकुमारी’ 1947 में रिलीज हुई थी और उनकी लिखी आखिरी फिल्म ‘पोन्नार शंकर’ 2011 में आई। करुणानिधि ने 2018 में निधन से पहले अपने लंबे राजनीतिक और फिल्म करियर के दौरान द्रविड़ साहित्य में काफी योगदान दिया।
करुणानिधि के ठीक बाद 1977 में मुख्यमंत्री बने एमजी राचमंद्रन उर्फ MGR तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थे। करुणानिधि ने उनकी कई फिल्में लिखीं और दोनों की जोड़ी सुपरहिट थी। एमजीआर डीएमके में ट्रेजरर भी थे। अन्नादुरै के निधन के बाद सीएम और पार्टी अध्यक्ष बने करुणानिधि से जब उन्होंने पार्टी फंड के पैसे का हिसाब मांग लिया तो उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। फिर एमजीआर ने एआईएडीएमके नाम से अपनी पार्टी बना ली और 1977 के चुनाव में जीतकर मुख्यमंत्री बन गए। एमजीआर के निधन के बाद उनकी पत्नी वीएन जानकी कुछ दिन सीएम बनीं। जानकी भी कलाकार थीं और फिल्मों में काफी काम कर चुकी थीं। जानकी राज्य की तीसरी कलाकार सीएम थीं।
दिसंबर में एमजीआर के निधन के बाद जनवरी 1988 में जानकी रामचंद्रन की ताजपोशी से पार्टी में बगावत हुई और एमजीआर की करीबी नेता बन चुकीं जयललिता ने पार्टी तोड़ दी। जयललिता खुद तमिल फिल्मों की बहुत लोकप्रिय हीरोइन थीं। विधानसभा में जानकी रामचंद्रन के बहुमत साबित करने के दौरान बवाल हो गया और पुलिस बुलानी पड़ी। केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगा दिया। 1989 में चुनाव हुए तो डीएमके जीती और करुणानिधि फिर सीएम बने। जयललिता नेता विपक्ष बन गईं। 1991 के चुनाव में जयललिता ने जीत का स्वाद चखा और पहली बार सीएम बनीं। इस तरह वो राज्य की चौथी कलाकार सीएम बनीं। उसके बाद सीएम का पद लंबे समय तक करुणानिधि और जयललिता के बीच ही रहा। दोनों कई बार सीएम बने।
2016 में जयललिता और 2018 में करुणानिधि के निधन के बाद तमिल राजनीति में स्टारडम वाले नेता की जगह बची हुई थी। शिवाजी गणेशन, विजयकांत और कमल हासन जैसे कलाकारों ने पार्टी बनाई, लेकिन किसी को ऐसी राजनीतिक सफलता नहीं मिली, जो विजय को हासिल होती दिख रही है। दो नाव की सवारी करने वाले कलाकारों पर लोगों को बहुत भरोसा नहीं हुआ। एमजीआर और जयललिता ने राजनीति में सफलता मिलते ही फिल्मों से किनारा कर लिया था। विजय ने उससे सीख ली और पिछले साल ही अपनी अंतिम फिल्म ‘जन नयागन’ का ऐलान करते हुए सिनेमा से संन्यास ले लिया। विजय ने सिनेमा छोड़कर आम लोगों को भरोसा दिलाया कि वो पार्ट टाइम राजनीति करने नहीं आए हैं।
थलापति विजय 17 से राजनीति में उतरने की भूमिका बना रहे थे, अब मिली सफलता
विजय ने टीवीके पार्टी भले 2024 में बनाई, लेकिन वो राजनीति में उतरने की भूमिका 2009 से ही बना रहे थे। विजय ने 2009 में अपने लगभग 85000 फैन क्लब को एक संगठन का नाम और रूप दे दिया था। ‘विजय जन संगठन’ के जरिए वो राज्य भर में समाजसेवा और जमीनी काम कर रहे थे। 2011 के चुनाव में विजय ने जयललिता को खुला समर्थन दिया था, जिसका फायदा एआईएडीएम को मिला और वो 203 सीटें जीती थी। 2021 में इस संगठन ने स्थानीय निकाय के चुनाव में 169 सीटों पर कैंडिडेट उतारे और उसमें 116 जीत गए।
विजय का समर्थन देने और कैंडिडेट उतारने के दोनों प्रयोग कामयाब रहे, जिससे उन्हें आगे की राह साफ दिखने लगी। फिर विजय राजनीतिक मसलों पर खुलकर राय रखने लगे। 2 फरवरी 2024 को उन्होंने पार्टी बना ली। आज उनकी पार्टी सबसे बड़ा दल बनती दिख रही है और वह सीएम बनते हैं तो तमिलनाडु के 5वें कलाकार सीएम होंगे। एमजी रामचंद्रन, करुणानिधि और जयललिता के दौर की लंबाई और राजनीतिक प्रभुत्व को देखें तो स्टारडम के साथ राजनीति में धमाकेदार एंट्री मार रहे थलापति विजय की पारी भी लंबी और असरदार हो सकती है।




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