2 फिल्मों ने तमिलनाडु में बदल दी ऐक्टर विजय की छवि, TVK की जीत के 3 बड़े फैक्टर
पारंपरिक दल एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने में व्यस्त थे, वहीं विजय ने खुद को आम आदमी की आवाज के रूप में पेश किया। उनकी यह छवि उन युवाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हुई, जो मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से असंतुष्ट थे।

Tamil Nadu Elections and Acor Vijay: तमिलनाडु की राजनीति ने हमेशा से सिनेमा और सत्ता के अनूठे संगम को स्वीकार किया है। सुपरस्टार थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की शानदार जीत ने इसपर फिर एकबार मुहर लगा दी है। यह जीत मात्र एक अभिनेता की लोकप्रियता का परिणाम नहीं है, बल्कि सालों से फिल्मों के जरिए तैयार किए गए एक ठोस राजनीतिक नैरेटिव की परिणति है। विजय ने अपनी फिल्मों के माध्यम से खुद को व्यवस्था के विरुद्ध खड़ा होने वाले एक निडर योद्धा के रूप में स्थापित किया है। यही कारण है कि जनता ने उन्हें केवल एक स्क्रीन आइकन नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में चुना है।
फिल्मों के भाषणों ने बनाई अलग छवि
विजय की जीत का सबसे बड़ा स्तंभ उनकी व्यवस्था विरोधी छवि है। पिछले एक दशक में विजय ने अपनी फिल्म स्क्रिप्ट का चुनाव इस तरह किया कि वे सीधे तौर पर शासन की विफलताओं और प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर प्रहार करती दिखीं। फिल्मों के भीतर दिए गए उनके भाषणों और प्रशासनिक मुद्दों पर उनकी मुखरता ने जनता के बीच एक एक अलग धारण पैदा की।
जहां पारंपरिक दल एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने में व्यस्त थे, वहीं विजय ने खुद को आम आदमी की आवाज के रूप में पेश किया। उनकी यह छवि उन युवाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हुई, जो मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से असंतुष्ट थे।
मार्शल में GST का उड़ाया मजाक
2017 में रिलीज हुई फिल्म मार्शल विजय के राजनीतिक ग्राफ में एक मील का पत्थर साबित हुई। इस फिल्म ने उन्हें एक क्षेत्रीय अभिनेता से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया। इस फिल्म में जीएसटी (GST) और डिजिटल इंडिया जैसी केंद्र सरकार की प्रमुख नीतियों की तीखी आलोचना की गई थी। जब राजनीतिक समूहों ने फिल्म के दृश्यों पर आपत्ति जताई, तो इसने विजय की छवि को एक ऐसे मुखर सितारे के रूप में निखारा जो वैचारिक स्टैंड लेने से नहीं डरता। जनता के मन में यह बात बैठ गई कि विजय केवल मनोरंजन नहीं कर रहे, बल्कि वे कठिन प्रश्न पूछने का साहस रखते हैं।
सत्ता से सीधी टक्कर का प्रभाव
2018 की फिल्म 'सरकार' ने विजय की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की जमीन तैयार कर दी थी। सत्ताधारी दल के साथ उनके सीधे टकराव ने उनके राजनीतिक कद को और बढ़ाया। इस फिल्म में राज्य सरकार की लोकलुभावन और मुफ्त की योजनाओं की कड़ी आलोचना की गई थी। कानूनी दबाव और दृश्यों को एडिट करवाने की घटना ने विक्टिम कार्ड के बजाय वॉरियर कार्ड को मजबूती दी। इस फिल्म ने उनके मास पॉलिटिकल मैसेजिंग को घर-घर तक पहुंचाया और मतदाताओं को विश्वास दिलाया कि वे वास्तव में बदलाव ला सकते हैं।




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