Saayoni Ghosh fails Mamata loyalty test joins rebel TMC MPs after polarising West Bengal Elections with Kaba Madina Song सयानी निकलीं सायोनी; जिनके काबा-मदीना गाने से बर्बाद हुईं ममता, वो घोष भी चड्ढा हो गईं, India News in Hindi - Hindustan
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सयानी निकलीं सायोनी; जिनके काबा-मदीना गाने से बर्बाद हुईं ममता, वो घोष भी चड्ढा हो गईं

Saayoni Ghosh News: काबा-गदीना गाना गाकर बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की चूलें हिला देने वाले अभूतपूर्व ध्रुवीकरण की सूत्रधार TMC सांसद सायोनी घोष ने भी बगावत कर दी है। 19 बागी MP में उनका भी नाम है।

Fri, 12 June 2026 05:31 PMRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान
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सयानी निकलीं सायोनी; जिनके काबा-मदीना गाने से बर्बाद हुईं ममता, वो घोष भी चड्ढा हो गईं

Saayoni Ghosh News: पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान काबा-मदीना गाना गाकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और ममता बनर्जी की चूलें हिला देने वाले अभूतपूर्व ध्रुवीकरण की नींव रखने वाली सायोनी घोष भी टीएमसी के 19 बागी सांसदों में शामिल निकली हैं। लोकसभा अध्यक्ष को 18 मई को जिन सांसदों ने चिट्ठी लिखकर अपने समूह को अलग मान्यता देने की मांग की थी, उस पत्र में सायोनी का नाम भी है। लोकसभा में पार्टी की टूट का नेतृत्व कर रहीं काकोली घोष दस्तीदार ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार को समर्थन देने का इरादा जाहिर किया है। 33 साल की सायोनी घोष 2021 में टीएमसी में आई थीं और उस चुनाव में अग्निमित्रा पॉल से हार गई थीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में जाधवपुर से सायोनी संसद पहुंचीं। सायोनी बंगाली फिल्मों और वेब सीरीज की चर्चित अभिनेत्री रही हैं।

टीएमसी के जिन बागी 19 सांसदों के साइन सूत्रों के हवाले से बाहर आए हैं, उसमें कोई भी राजनेता बीजेपी और सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ सायोनी घोष जैसा आक्रामक भाषण नहीं करता था। लोकसभा के अंदर भी टीएमसी के जिन सांसदों के सरकार पर हमले के भाषण वायरल होते थे, जिन पर टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर चर्चा होती थी, उनमें महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी के अलावा सायोनी घोष शामिल थीं। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों में जब कुछ एमपी भाजपा में चले गए, तब सायोनी घोष ने ही बढ़-चढ़कर कहा था- 'सायोनी घोष है ना, वो चड्ढा नहीं है, इसलिए वो चड्ढा चड्ढी नहीं होगा कभी।' सायोनी ने कहा था कि बीजेपी के पास ED-CBI है, करोड़ों रुपये हैं, लेकिन उनके पास हवाई चप्पल और सफेद साड़ी वाली ममता बनर्जी हैं।

सायोनी घोष चुनाव नतीजों के कई दिनों बाद तक भी भाजपा और केंद्र सरकार पर हमले बोल रही थीं। जब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े, तब 15 मई को उन्होंने कहा था- ‘जीत गए बंगाल, अब कर देंगे कंगाल।’ ममता बनर्जी के घर एक बैठक के बाद सायोनी ने कहा था कि ममता हारी नहीं हैं, उनको वोट चुराकर, वोट की लूट करके हराया गया है। 2029 के लोकसभा और 2031 के विधानसभा के चुनाव में जनता इसका जवाब देगी। उन्होंने कहा था कि वो ममता बनर्जी के साथ समर्पित वर्कर की तरह रहेंगी और आगे टीएमसी का संघर्ष और भी तीव्र और उग्र होगा। ये सब अब इतिहास की बातें रह गईं। बागियों की लिस्ट में सायोनी घोष का नाम देखकर सोशल मीडिया पर सरकार के समर्थक और विरोधी दोनों सन्न हैं और उनकी तुलना चर्चित अवसरवादी नेताओं से कर रहे हैं।

अब जब यह बात सामने आई है कि बागी सांसदों ने लोकसभा के स्पीकर को 18 मई को चिट्ठी लिख दी थी तो 18 मई को ही सायोनी घोष के एक ट्वीट का मतलब नया हो गया है। 18 मई को सायोनी ने लिखा था- ‘जीतने के लिए सिर्फ जीत की ख्वाहिश काफी नहीं है। इसके लिए तैयारी, झटके से बाहर आने और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति चाहिए, जब बाकी लोग हाथ खड़े कर दें।’ सायोनी का यह ट्वीट बताता है कि वो चुनावी सदमे से उबरने की ममता और टीएमसी की रणनीति से आश्वस्त नहीं हो पा रही थीं कि पार्टी वापसी कर पाएगी। हताशा हावी हो, इससे पहले बदल रहे माहौल में सायोनी घोष भी उनके साथ हो गईं, जो पार्टी चलाने में अभिषेक बनर्जी की मनमानी से पहले से नाराज चल रहे थे और ममता का गढ़ टूटते ही बागी हो गए।

बगावत की चिट्ठी पर साइन करके भी बीजेपी पर हमला बोल रही थीं सायोनी घोष!

रोचक बात यह भी है कि 18 मई को बगावत का मन बना चुकीं सायोनी घोष ने अभिषेक पर हमले के बाद 30 मई को ट्वीट में इसे जनादेश चुराने वालों का पूर्व नियोजित हमला बताया था। सायोनी ने 8 जून को ट्वीट करके जावधपुर में रेहड़ी वालों पर बुलडोजर चलाने के खिलाफ बीजेपी सरकार पर हमला बोला था।

कभी वामपंथी दलों और कांग्रेस के बीच सिमटी बंगाल की राजनीति में ममता की सरकार बनने के बाद कांग्रेस और लेफ्ट धीरे-धीरे गायब से होते चले गए। केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने और अमित शाह के बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद आरएसएस ने बंगाल पर फोकस बढ़ाया। भाजपा को पहली बार जरूरत भर जमीन और ताकत 2019 के लोकसभा चुनाव से मिली, जब पार्टी के सांसद 2 से बढ़कर 18 तक पहुंच गए। 2021 के विधानसभा चुनाव में माहौल बनाने के बाद भी भाजपा 77 सीट पर जाकर अटक गई। बंगाल का यह पहला चुनाव था, जिसमें घुसपैठियों के मुद्दे को ध्रुवीकरण ने वोट में बदला और भाजपा उस पर सवार होकर विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल बनी।

ध्रुवीकरण का ताजा मुद्दा खोज रही बीजेपी को सायोनी घोष के काबा-मदीना से मदद

2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को 6 सीटों का नुकसान हुआ, लेकिन 12 सांसदों के साथ 2026 की तैयारी में भाजपा और संघ कमर कसकर जमीन पर उतर गए। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के रिवीजन को युद्धस्तर पर चलाया, जिसमें नाम कटने वाले ज्यादातर एक समुदाय के लोग होने से ध्रुवीकरण का माहौल और मजबूत हुआ। चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों की भरपूर तैनाती और यूपी से आए एक चर्चित आईपीएस अफसर से टीएमसी नेता जहांगीर खान का विवाद राज्य में गुंडागर्दी और पुलिस की सख्ती के टकराव का प्रतीकात्मक उदाहरण बना। इससे ध्रुवीकरण को जहांगीर के नाम पर चेहरा मिला। एक तरफ कानून-व्यवस्था और दूसरी तरफ टीएमसी के माफिया।

घुसपैठियों के मुद्दे को भाजपा और संघ ने पिछले कई सालों से गांव-गांव में फैला दिया था। बंगाल में ऐतिहासिक जीत की पटकथा लिखने के लिए भाजपा को निर्णायक ध्रुवीकरण वाले एक तात्कालिक मुद्दे की जरूरत थी। एकदम नया और ताजा, जिस पर माहौल बनाया जा सके। सायोनी घोष ने ‘दिल में काबा और आंखों में मदीना’ गाने को चुनावी मंच से गाकर बीजेपी के हाथ में वो चिंगारी दी, जिसने भाजपा और संघ परिवार द्वारा तुष्टीकरण के खिलाफ तैयार की गई जमीन को लहका दिया। मतदान केंद्रों पर यह आग इस कदर टूटी की ममता की सरकार और टीएमसी बुरी तरह झुलस गई। बीजेपी की फायरब्रांड नेता रहीं उमा भारती ने नतीजों के बाद कहा भी कि टीएमसी और ममता की हार का प्रमुख कारण यह गाना रहा, जिसने मतदाताओं के बड़े वर्ग की भावना को ठेस पहुंचाया।

कोलकाता एयरपोर्ट पर चेहरा छुपाते नजर आई थीं सायोनी घोष

ममता की हार से चतुर नेताओं को टीएमसी की राजनीति में भविष्य और करियर दोनों डूबने का डर तुरंत सताने लगा। ज्यादातर को ममता की ममता के छांव में मौका मिला और सबने खुद की पहचान बनाई। ऐसे होशियार नेताओं के ग्रुप में जाकर सायोनी घोष ने सयानी नेता होने का परिचय दिया है। सायोनी घोष नए अवतार में लोकसभा के अगले सत्र में सरकार पर प्रहार के बदले एनडीए के प्रचार में धारदार मुहावरों के साथ विपक्ष के छक्के छुड़ाते नजर आ सकती हैं। कोलकाता एयरपोर्ट पर 11 जून को चेहरा छुपाने की कोशिश में पूरा फेस ढंककर बाहर निकलीं सायोनी घोष की राजनीति का नया चेहरा देखने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा, फिलहाल यही संभावना दिख रही है।

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